यशवंत सिन्हा का आरोप- PM मोदी ने अधिकार क्षेत्र से बाहर जाकर खुद ही ‘राफेल डील’ को तय किया

Yashwant Sinha attacks PM Modi on Rafale Deal

भाजपा के वरिष्ठ नेता और पूर्व वित्त मंत्री यशवंत सिन्हा ने प्रधानमंत्री मोदी पर बड़ा आरोप लगाया है। कथित राफेल घोटाले को लेकर यशवंत सिन्हा ने कहा है कि पीएम मोदी ने विशेष कंपनी को फायदा पहुँचाने के लिए अपने सभी अधिकारों से आगे जाते हुए इस समझौते को खुद तय किया है।

बोलता हिंदुस्तान से राफेल डील पर बात करते हुए पूर्व वित्त मंत्री ने कहा कि जब हम लोग इस मामले की तय में गए तो बहुत सारे चौकाने वाले तथ्य सामने आए। और तब ही हमने तय किया कि हम इस मामले को देश की जनता के सामने रखेंगे।

उन्होंने कहा कि देश में बोफोर्स घोटाले के बाद रक्षा सौदों में कड़े नियमों का पालन किया जाता रहा है लेकिन मोदी सरकार ने राफेल सौदें में सभी नियमों की धड़ल्ले से उपेक्षा की है।

उन्होंने सरकार पर देश की रक्षा को खतरे में डालने का आरोप लगाते हुए कहा कि इस सौदे में पहले फ़्रांस की ‘डासौल्ट’ कम्पनी के साथ मिलकर भारत की सरकारी कंपनी एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (एचएएल) विमान बनाने वाली थी।

लेकिन इस 50 वर्षीय अनुभव वाली कंपनी को हटाकर अनिल अंबानी की 14 दिन पुरानी कंपनी को इसकी जगह दे दी गई।

उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी पर सीधा आरोप लगाते हुए कहा कि पीएम मोदी ने फ़्रांस जाकर अपने स्तर पर राफेल विमान खरीदने के लिए नया सौदा तय किया।

इसके लिए उन्होंने रक्षा विभाग और रक्षा समितियों की इजाज़त नहीं ली जो कि किसी भी रक्षा सौदे को तय करने के लिए अनिवार्य है। उनको इस तरह से रक्षा सौदा तय करने का अधिकार नहीं है लेकिन उन्होंने अधिकार क्षेत्र से बाहर जाते हुए इसको तय किया।

क्या है विवाद
राफेल एक लड़ाकू विमान है। इस विमान को भारत फ्रांस से खरीद रहा है। कांग्रेस ने मोदी सरकार पर आरोप लगाया है कि मोदी सरकार ने विमान महंगी कीमत पर खरीदा है जबकि सरकार का कहना है कि यही सही कीमत है। ये भी आरोप लगाया जा रहा है कि इस डील में सरकार ने उद्योगपति अनिल अंबानी को फायदा पहुँचाया है।

बता दें, कि इस डील की शुरुआत यूपीए शासनकाल में हुई थी। कांग्रेस का कहना है कि यूपीए सरकार में 12 दिसंबर, 2012 को 126 राफेल विमानों को 10.2 अरब अमेरिकी डॉलर (तब के 54 हज़ार करोड़ रुपये) में खरीदने का फैसला लिया गया था। इस डील में एक विमान की कीमत 526 करोड़ थी।

इनमें से 18 विमान तैयार स्थिति में मिलने थे और 108 को भारत की सरकारी कंपनी, हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (एचएएल), फ्रांस की कंपनी ‘डासौल्ट’ के साथ मिलकर बनाती। 2015 में प्रधानमंत्री मोदी ने अपनी फ़्रांस यात्रा के दौरान इस डील को रद्द कर इसी जहाज़ को खरीदने के लिए में नई डील की।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, नई डील में एक विमान की कीमत लगभग 1670 करोड़ रुपये होगी और केवल 36 विमान ही खरीदें जाएंगें। नई डील में अब जहाज़ एचएएल की जगह उद्योगपति अनिल अंबानी की कंपनी बनाएगी।

जबकि अनिल अम्बानी की कंपनी को विमान बनाने का कोई अनुभव नहीं है क्योंकि ये कंपनी राफेल समझौते के मात्र 14 दिन पहले बनी है। साथ ही टेक्नोलॉजी ट्रान्सफर भी नहीं होगा जबकि पिछली डील में टेक्नोलॉजी भी ट्रान्सफर की जा रही थी।

 

Source: boltaup.com

देश कर्नाटक की कांग्रेस-जेडीएस सरकार ने दी राज्य के लोगों को राहत, पेट्रोल-डीजल के दाम में की कटौती

in a big relief to people of Karnataka Congress JDS government of state reduces petrol and diesel price

कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष दिनेश राव ने पेट्रोल-डीजल के आसमान छूते दामों को लेकर पीएम मोदी पर तंज कसते हुए कहा कि उनकी सरकार ने राज्य में पेट्रोल-डीजल के दाम घटाने का फैसला किया है। ये उनकी सरकार की तरफ से पीएम नरेंद्र मोदी को जन्मदिन का तोहफा है।
देश भर में पेट्रोल-डीजल के दामों में लगी आग की खबरों के बीच कर्नाटक के लोगों को राहत देने वाली एक खबर आई है। प्रदेश की कांग्रेस-जेडीएस सरकार ने राज्य में पेट्रोल-डीजल के दाम में 2-2 रुपये प्रति लीटर की कटौती करने का ऐलान किया है। सोमवार को कर्नाटक के मुख्यमंत्री एचडी कुमारस्वामी ने राज्य की जनता को राहत देने का ऐलान करते हुए कहा कि उनकी सरकार पेट्रोल और डीजल पर दो रुपये कम करने जा रही है।

वहीं, राज्य सरकार में शामिल कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष दिनेश राव ने पेट्रोल-डीजल के आसमान छूते दामों को लेकर पीएम मोदी पर तंज कसते हुए कहा कि उनकी सरकार ने राज्य में पेट्रोल-डीजल के दाम घटाने का फैसला किया है। ये उनकी सरकार की तरफ से पीएम नरेंद्र मोदी को जन्मदिन का तोहफा है। उन्होंने कहा, “हम उन्हें यह बताना चाहते हैं कि अगर राज्य सरकार पेट्रोल-डीजल पर राहत दे सकती है तो केंद्र सरकार भी तो दे सकती है।पेट्रोल-डीजल के दामों में लगभग रोज हो रही बढ़ोतरी के बीच ये खबर लोगों को राहत देने वाली है। बता दें कि सोमवार को भी तेल के दामों में बढ़ोतरी जारी रही। सोमवार को दिल्ली में पेट्रोल 15 पैसे बढ़कर 82.06 और डीजल 6 पैसे बढ़कर 73.78 रुपये प्रति लीटर पर पहुंच गया। वहीं मुंबई में पेट्रोल 89.44 और डीजल 78.33 रुपये प्रति लीटर बिक रहा है।

हालांकि, इससे पहले भी कई राज्यों ने जनता को राहत देने के लिए अपने यहां पेट्रोल-डीजल के दामों में कटौती का ऐलान किया है। इससे पहले पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी प्रदेश में पेट्रोल-डीज़ल के दाम में एक रुपए की कटौती का ऐलान कर चुकी हैं। जबकि आंध्र प्रदेश की सरकार ने 2 रुपये प्रति लीटर की राहत देने का ऐलान किया है। वहीं, राज्य में आगामी चुनावों को देखते हुए राजस्थान में वसुंधरा राजे के नेतृत्व वाली बीजेपी सरकार ने भी प्रदेश में पेट्रोल-डीजल पर लगने वाले वैट में चार फीसदी की कमी करने का ऐलान किया है। जिससे वहां के लोगों को करीब ढाई रुपए प्रति लीटर की राहत मिलेगी।

बिहार में बीजेपी-जेडीयू सीट शेयरिंग पर सहमति! उपेक्षा से दूसरे सहयोगी दलों के तल्ख तेवर

Seat sharing between BJP and JDU in Bihar other parties in NDA getting angry

पटना में जेडीयू की राज्य कार्यकारिणी की बैठक को संबोधित करते हुए जेडीयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष और बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने लोकसभा चुनाव में बीजेपी के साथ गठबंधन के मुद्दे पर सहमति होने का ऐलान कर दिया. नीतीश कुमार ने कहा, ‘सारी बातचीत हो चुकी है जो कि बहुत ही कॉन्फिडेंशियल है. बात इतनी कॉन्फिडेंशियल है कि मेरे अगल-बगल रहने वालों को भी इसकी भनक नहीं है. बीजेपी ने उन्हें कितनी सीटें दी है इसका राज वह अभी नहीं खोलेंगे.’ नीतीश ने कहा ‘बीजेपी ने उन्हें ऐसा करने से मना किया है.’

जेडीयू-बीजेपी में बनी बात !

बिहार की कार्यकारिणी की बैठक में नीतीश कुमार के ऐलान के बाद अब जेडीयू-बीजेपी के बीच गठबंधन को लेकर चल रही किसी तरह की खींचतान के कयासों पर विराम लग गया है. जेडीयू सूत्रों के मुताबिक, ‘जेडीयू के खाते में 15 सीटें मिल सकती हैं. हालांकि, एक और सीट पर अभी बातचीत चल रही है. यानी समझौते के मुताबिक, जेडीयू 15 से 16 सीटों पर चुनाव लड़ सकती है. हालांकि अभी यह खुलासा नहीं हो पाया है कि जेडीयू को मिली सीटों में झारखंड और यूपी में भी लोकसभा की एक-दो सीट होगी या नहीं.

जेडीयू सूत्रों के मुताबिक, मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने पार्टी की कार्यकारिणी की बैठक में पार्टी प्रवक्ताओं को भी बीजेपी के साथ सीट शेयरिंग पर चुप रहने की नसीहत दी है.

Seat sharing between BJP and JDU in Bihar other parties in NDA getting angry
Seat sharing between BJP and JDU in Bihar other parties in NDA getting angry

पूरे मामले को बेहद कॉन्फिडेंशियल बताना और दूसरी तरफ सीट शेयरिंग पर कंफिडेंस दिखाना साफ संकेत दे रहा है कि नीतीश कुमार की बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह से मुलाकात के बाद जो माहौल बना था वो सही दिशा में जा रहा है.

जेडीयू के प्रवक्ता और विधान पार्षद नीरज कुमार फर्स्टपोस्ट से बातचीत के दौरान कहते हैं ‘सीट शेयरिंग के मुद्दे पर जिन लोगों ने विवाद पैदा करने और भ्रम फैलाने की कोशिश की थी उन्हें अब औंधे मुंह गिरना पड़ा है. जेडीयू की राज्य कार्यकारिणी की बैठक में स्पष्ट हो गया है कि अपने कार्यक्रम की बदौलत और अपने काम की बदौलत जेडीयू हर चुनौतियों का मुकाबला करने के लिए तैयार है.’

नीतीश के ऐलान से नाराज दूसरे सहयोगी

लेकिन, जेडीयू-बीजेपी के साथ सीट शेयरिंग का मुद्दा फाइनल होने की बात कहे जाने पर एनडीए के दूसरे सहयोगी अनजान हैं. उन्हें लगता है कि बड़ी पार्टी होने के नाम पर जेडीयू और बीजेपी की तरफ से उनकी उपेक्षा की जा रही है. बिहार में एनडीए की सहयोगी आरएलएसपी ने नीतीश कुमार के राज्य कार्यकारिणी में गठबंधऩ पर दिए बयान को यूनिलेटरल (एकतरफा) फैसला बताया है.

आरएलएसपी के इंटेलेक्चुएल सेल के प्रमुख सुबोध कुमार का कहना है ‘यह एरोगेंस ऑफ पावर है.’ सुबोध कुमार ने फ़र्स्टपोस्ट से बातचीत में नीतीश कुमार के बयान को ‘व्याकुलता की निशानी’ बताया है. उनका मानना है ‘इस तरह से एकतरफा ऐलान नहीं होना चाहिए था, बल्कि, कोऑर्डिनेशन के जरिए बात होनी चाहिए थी.’ उन्होंने मांग की है ‘जल्द से जल्द एनडीए के सभी घटक दलों के साथ बैठक कर सीट शेयरिंग पर अंतिम फैसला कर लेना चाहिए.’

उधर आरएलएसपी से अलग राह पर चल रहे जहानाबाद से सांसद अरुण कुमार भी इस फैसले को लेकर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और सुशील मोदी दोनों पर प्रहार कर रहे हैं. अरुण कुमार ने फ़र्स्टपोस्ट से बातचीत में बताया, ‘बिहार में नीतीश कुमार और सुशील मोदी का मिलन ही राज्य के हित में नहीं है. यहां शिक्षा का कबाड़ा बना दिया गया है, कानून-व्यवस्था ध्वस्त है, शिक्षा मंत्री कह रहे हैं कि बिहार में फर्जी शिक्षक हैं.’ अरुण कुमार बिहार में मुख्यमंत्री-उपमुख्यमंत्री की जोड़ी के खिलाफ ही लड़ाई की बात कर रहे हैं.

हालांकि एलजेपी की तरफ से कोई तल्ख प्रतिक्रिया नहीं आई है, लेकिन, पार्टी सूत्रों के मुताबिक, बिहार में जेडीयू-बीजेपी के साथ मिलकर ही एलजेपी चुनाव लड़ेगी.

बिहार में एनडीए के सहयोगी उपेंद्र कुशवाहा की पार्टी की तरफ से जिस तरह संकेत दिया जा रहा है उससे साफ है कि कुशवाहा किसी भी कीमत पर कम सीटों पर समझौते के मूड में नहीं हैं. उनकी पार्टी के नेता लोकसभा में जेडीयू से बड़ी पार्टी होने की बात कर रहे हैं. लेकिन, नीतीश कुमार की एनडीए में वापसी के बाद पूरा समीकरण बदल गया है. अब बातचीत की टेबल पर अनदेखी से एनडीए के दूसरे दल नाराज हो रहे हैं.

दशहरा बाद नीतीश कैबिनेट का विस्तार

Seat sharing between BJP and JDU in Bihar other parties in NDA getting angry
Seat sharing between BJP and JDU in Bihar other parties in NDA getting angry

लेकिन, नीतीश कुमार ने बीजेपी के साथ बात बनने के बाद अब लोकसभा चुनाव से पहले संगठन और सरकार दोनों को चुस्त करने का फैसला किया है. उम्मीद की जा रही है कि दशहरा के बाद नीतीश कैबिनेट का विस्तार किया जाएगा, जिसमें वक्त के हिसाब से कुछ नए चेहरों को जगह दी जाएगी, जबकि कुछ पुरानों की छुट्टी भी की जाएगी.

जेडीयू सूत्रों के मुताबिक, ‘कैबिनेट विस्तार से पहले ब्लॉक से लेकर जिला और राज्य स्तर पर 20 सूत्री कमिटी का गठन किया जाएगा. 20 सूत्रीय इस कमेटी के गठन के बाद आयोग और बोर्ड-निगम में खाली पड़े पदों को भरा जाएगा. कहा जा रहा है कि बोर्ड और निगमों में जेडीयू के नेताओं को पद पर बैठाने के बाद मुख्यमंत्री नीतीश कुमार कैबिनेट का विस्तार करेंगे.

नीतीश कुमार बीजेपी के साथ ‘कॉन्फिडेंशियल’ बातचीत के बाद भले ही ज्यादा आश्वस्त लग रहे हों, लेकिन, दूसरे सहयोगियों के रुख को देखकर लोकसभा चुनाव से पहले बिहार में एनडीए में उलटफेर की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता.

 

Source: hindi.firstpost.com

कांग्रेस ने गोवा में सरकार बनाने का दावा किया पेश, चिट्ठी लेकर राजभवन पहुंचे विधायक

Congress in talks with others for stable alternative in goa says aicc incharge

गोवा में कांग्रेस ने सरकार बनाने का दावा पेश किया है. एबीपी न्यूज के अनुसार कांग्रेस के 14 विधायक सोमवार को राज्यपाल मृदुला सिन्हा से मिलने राजभवन पहुंचे. यहां राज्यपाल को न पाकर कांग्रेस का प्रतिनिधित्वमंडल सरकार बनाने का दावा पेश करने वाली चिट्ठी छोड़कर आया.

बता दें कि गोवा के मुख्यमंत्री मनोहर पर्रिकर पिछले कुछ महीने से गंभीर रूप से बीमार रहे हैं. उनकी बीमारी को देखते हुए किसी नए को यहां सरकार की कमान देने की अटकलें लगाई जा रही हैं. हालांकि बीजेपी ने इससे इनकार किया है.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सलाह पर रविवार को पर्रिकर को विशेष विमान से दिल्ली लाया गया जहां चेकअप के लिए उन्हें एम्स में भर्ती कराया गया.

इस वजह से बीते 7 महीने से 3 बार इलाज के सिलसिले में अमेरिका होकर लौटे हैं.

Source: hindi.firstpost.com

बीजेपी सांसद के पैर धोकर कार्यकर्ता ने पीया पानी, विवाद देख ग्रन्थों से जायज ठहराया

BJP Worker wash the feet of BJP MP and Drunk

गोड्डा : कलाली से कन्हवारा गांव में कझिया नदी पर 21 करोड़ की लागत से बनने वाले हाइलेवल पुल के शिलान्यास के मौके पर भाजपा कार्यकर्ता द्वारा बीजेपी सांसद डॉ निशिकांत दुबे के पैर धोकर उसी पानी को पीने का मामला सामने आया है।

डॉ. निशिकांत दुबे ने अपनी फेसबुक वाल पर इसकी तस्वीर साझा करते हुए कार्यकर्ता की काफी प्रशंसा की, हालांकि आलोचना के शिकार होते देख काफी देर के बाद उन्होंने उस पोस्ट को एडिट कर पांव पखार कर पीने की बात को हटा दिया।

इस तस्वीर को अपने फेसबुक पर डालते हुए सांसद ने लिखा कि आज मैं खुद को बहुत छोटा कार्यकर्ता समझ रहा हूं। उन्होंने बताया कि भाजपा के महान कार्यकर्ता पवन साह ने पुल बनाने की खुशी में हजारों लोगों के सामने उनके पैर धोए। उन्होंने आगे ऐसी इच्छा भी जताई कि उन्हें भी यह मौका मिले और वह भी कार्यकर्ता के पैर धोकर ‘चरणामृत’ पिएं।

विवाद बढ़ता देख उन्होने अपनी सफाई में लिखा कि “अपनों में श्रेष्ठता बांटी नही जाती और कार्यकर्ता यदि खुशी का इजहार पैर धोकर कर रहा है तो क्या गजब हुआ?” उन्होंने संस्कृति और परंपरा के हवाले से कहा कि पैर धोना तो झारखंड में अतिथि के लिए होता ही है। सारे कार्यक्रम में आदिवासी महिलाएँ क्या यह नहीं करती हैं?

उन्होंने अपनी आलोचना को गलत ठहराते हुए लिखा कि इसे राजनीतिक रंग क्यों दिया जा रहा है? अतिथि के पैर धोना गलत है तो अपने पुरखों से पूछिए कि महाभारत में कृष्ण जी ने क्या पैर नहीं धोए थे? लानत है घटिया मानसिकता पर।

बिहार: माझी ने मचाई राजनीतिक हलचल, इतने सीटों की मांग कर महागठबंधन की चिंता बढ़ाई!

Jitan Ram Manjhi has increased the difficulties of the alliance

बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री और हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जीतन राम मांझी ने महागठबंधन की मुश्किलें बढ़ा दी है। मांझी ने पार्टी की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक के बाद आगामी लोकसभा चुनाव में सभी 40 सीटों पर तैयारी होने का दावा किया है।

साथ ही मांझी ने लोकसभा चुनाव में अपनी पार्टी के लिए 20 और विधानसभा में 120 सीटें का दावा किया है। ज्ञात हो कि मांझी महागठबंधन का हिस्सा हैं।

इसके अलावा सवर्ण आरक्षण के मुद्दे पर जी मीडिया से बात करते हुए मांझी ने राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) से अलग रुख अख्तियार करते हुए गरीब सवर्णों के लिए आरक्षण की मांग की है।

मांझी के दावे पर आरजेडी ने भी प्रतिक्रिया दी है। आरजेडी विधायक शिवचन्द्र राम ने मांझी को महागठबंधन का बड़ा नेता बताते हुए कहा कि हर पार्टी को यह आकांक्षा रहती है कि ज्यादा से ज्यादा सीटों पर लड़े।

महागठबंधन में शामिल सभी दलों के राष्ट्रीय अध्यक्ष एक साथ बैठेंगे और सीटों का बंटवारा होगा। उन्होंने कहा कि महागठबंधन का एकमात्र लक्ष्य देश में नरेंद्र मोदी और बिहार में नीतीश कुमार को हराना है।

मांझी के दावे पर भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) ने भी तंज कसा है। बिहार सरकार के मंत्री विनोद नारायण झा ने 20 सीटों के दावे पर कहा कि मांझी के इस बयान का कोई मतलब नहीं है।

यह बयान हवा-हवाई है। जीतन राम मांझी डिंग हाक रहे हैं। उन्होंने कहा कि वह महागठबंधन के लोगों को ब्लैकमेल कर रहे हैं। उन्हें दो से अधिक सीट नहीं मिलने वाली है। मांझी को स्वार्थी बताते हुए उन्होंने कहा कि उनका अपना और बेटे का मामला सेटल हो गया है, अब दामाद के लिए परेशान हैं।

जेडीयू प्रवक्ता सुहेली मेहता ने कहा कि जीता राम मांझी ने आरजेडी और कांग्रेस को हैसियत बता दी है। जो बिना काम किए दलितों की हितैषी बन जा रहे हैं, उनको अब मांझी के लिए दरियादिली दिखानी चाहिए।

 

Source: hindi.siasat.com

PM मोदी के चहेते CBI अधिकारी एके शर्मा ने ‘विजय माल्या’ को देश से भगायाः राहुल गांधी

Rahul Gandhi alleged CBI joint director ak Sharma weakened Mallya lookout notice

कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने विजय माल्या के मुद्दे को लेकर केंद्र की मोदी सरकार पर एक बार फिर बड़ा हमला बोला है।

उन्होंने आरोप लगाते हुए कहा कि पीएम मोदी के एक पसंदीदा अधिकारी ने माल्या के खिलाफ़ लुकआउट नोटिस को कमज़ोर किया था।

राहुल गांधी ने ट्वीट कर कहा, “सीबीआइ के संयुक्त निदेशक एके शर्मा ने माल्या के लुकआउट नोटिस को कमजोर किया, जिससे माल्या को भागने में मदद मिली।

एके शर्मा जो कि गुजरात कैडर के अधिकारी हैं और सीबीआई में पीएम मोदी के पसंदीदा हैं”। कांग्रेस अध्यक्ष ने दावा किया कि नीरव मोदी और मेहुल चोकसी के भागने में भी इसी अधिकारी का हाथ है।

इससे पहले शुक्रवार को राहुल गांधी ने आरोप लगाया था कि सीबीआई ने ‘हिरासत’ नोटिस को ‘सूचना’ में बदलकर माल्या को देश से निकल भागने में मदद की। सीबीआई सीधे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को रिपोर्ट करती है। ऐसे में यह समझ से परे है कि सीबीआई ने मोदी की अनुमति के बिना इतना बड़ा कदम उठा लिया।

बता दें कि माल्या ने बुधवार को दावा किया था कि उसने ब्रिटेन आने से पहले वित्त मंत्री अरुण जेटली से मुलाकात की थी। जिसके बाद से कांग्रेस लगातार मोदी सरकार पर हमलावर है।

राहुल ने गुरुवार को कहा था कि जेटली ने माल्या को देश छोड़ने में मदद की। वह लगातार झूठ बोल रहे हैं। उन्हें पद से इस्तीफा देना चाहिए और मामले की जांच होनी चाहिए।

सिर्फ विपक्ष ही नहीं बल्कि बीजेपी के अपने नेता सुब्रमण्यम स्वामी का भी यह मानना है कि विजय माल्या के भागने की ख़बर सरकार को थी। उन्होंने कहा था कि सरकार के इशारे पर विजय माल्या के लिए लुकआउट नोटिस को बदला गया।

 

Source: boltaup.com

मोदीराज में सरकारी बैंक हुए कंगाल! NPA से दो सालों में बैंकों का लाभांश 65.6 अरब रुपए घटा

Government banks Danger in modi govt

फंसे हुए कर्ज (एन.पी.ए) भारतीय बैंकों की सबसे बड़ी समस्या बन चुका है। इन कर्जों के कारण बैंकों की कमाई घट रही है, घाटा बढ़ रहा है और अब उनके लाभांश पर भी एन.पी.ए का असर दिखाई दे रहा है। लाभांश यानि सालाना फायदे में से बटने वाला हिस्सा।

सरकारी बैंकों में ज़्यादातर शेयर की मालिक सरकार ही होती है इस कारण हर साल बैंकों की कमाई में से उसे हिस्सा मिलता है। लेकिन एन.पी.ए की बढ़ती समस्या के कारण इसमें पिछले कुछ सालों में भारी गिरावट आई है।

2016-17 में पांच बैंकों ने लाभांश की घोषणा की जबकि 2014-15 में 22 सरकारी बैंकों में से 20 ने लाभांश चुकाया था। सरकारी बैंकों ने वित्त वर्ष 2015 में जहां 70 अरब रुपए लाभांश दिया था, जो पिछले वित्त वर्ष में 4.4 अरब रुपए रह गया।

यानि केवल दो ही सालों में 65.6 अरब रुपए लाभांश घटा है और 20 में से केवल पांच बैंक लाभांश देने लायक बचे हैं बाकि सब एन.पी.ए से बर्बाद होने की स्तिथि में पहुँच चुके हैं।

एन.पी.ए बैंकों का वो लोन होता है जिसके वापस आने की उम्मीद नहीं होती, इस कर्ज़ में 73% से ज़्यादा हिस्सा उद्योगपतियों का है। अक्सर उद्योगपति बैंक से कर्ज़ लेकर खुद को दिवालिया दिखा देते हैं और उनका लोन एन.पी.ए में बदल जाता है। यही उस लोन के साथ होता है जिसे बिना चुकाए नीरव मोदी और विजय माल्या जैसे लोग देश छोड़कर भाग जाते हैं।

मोदी सरकार के कार्यकाल में भारतीय बैंकों की स्तिथि बहुत ज़्यादा बिगड़ चुकी है। सरकार पर उद्योगपतियों से पैसा ना वसूलने और उन्हें देश से भगाने का आरोप लग रहा है। सरकारी बैंकों के एन.पी.ए में भी पिछले कुछ सालों में इसी तरह का बढ़ोतरी देखी गई है।

रिज़र्व बैंक ने बताया है कि मार्च 2018 में एनपीए 10.40 लाख करोड़ रुपए पहुँच चुका है। जबकि 2013-14 में ये 2 लाख 40 हज़ार करोड़ रुपए था। देश में लगभग 90% एन.पी.ए सरकारी बैंकों का ही है।

गौरतलब है कि लगातार सामने आ रहे बैंक घोटालों के चलते पिछले कुछ महीनों से बैंकों का घाटा बढ़ता जा रहा है। देश के 21 सरकारी बैंकों में से 15 को 2017-18 की चौथी तिमाही (जनवरी से मार्च) में 47000 करोड़ रुपए से ज्यादा का घाटा हुआ है।

 

Source: boltaup.com

मनोज तिवारी ने तोड़ा सील बंद मकान का ताला, वीडियो वायरल होते ही बढ़ा विवाद

Manoj Tiwari break sealing in Gokulpuri

दिल्ली के भाजपा प्रमुख मनोज तिवारी द्वारा एक सीलबंद घर का ताला तोड़ने का वीडियो सामने आया है। यह घर मनोज तिवारी के संसदीय क्षेत्र पूर्वी दिल्ली के गोकुलपुरी का है। आम आदमी पार्टी (आप) और कांग्रेस ने इस वीडियो को दिल्ली के भाजपा शासित नगर निगमों से जोड़ दिया है।

आप के संयोजक और मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने आरोप लगाया कि भाजपा की नोटबंदी और जीएसटी के बाद अब सीलिंग ने दिल्ली को बर्बाद कर दिया है। उन्होंने ट्वीट किया, ‘वह (भाजपा) सुबह में सीलिंग करती है और शाम में ताला तोड़ती है। क्या वह समझती है कि लोग बेवकूफ हैं।’

इसके अलावा ‘न्याय युद्ध’ अभियान चला रहे पूर्व कांग्रेस विधायक मुकेश शर्मा ने कहा, “रविवार को गोकलपुर इलाके में मनोज तिवारी द्वारा सील किए गए घर के ताले को तोड़ना एक ‘ड्रामा’ है। यदि बीजेपी इस मुद्दे पर गंभीर है, तो तिवारी समेत दिल्ली के सभी सांसदों को अपनी सरकार से सीलिंग के खिलाफ एक अध्यादेश लाने की मांग करनी चाहिए। आने वाले दिनों में कांग्रेस सीलिंग के खिलाफ अपने अभियान को तेज करेगी।”

वहीं तिवारी ने कहा कि वह गोकुलपुर गए थे जहां लोगों ने उन्हें बताया कि 1000 के बीच केवल एक घर को निगम ने सील किया है। उन्होंने कहा, ‘मैंने निगम की चुनिंदा नीति के विरुद्ध सील को तोड़ दिया। स्थानीय लोगों ने दावा किया कि सभी मकान अवैध रुप से बनाये गए हैं लेकिन खास मकान को ही निगम ने कार्रवाई के लिए चुना।’

उन्होंने कहा कि वह उच्चतम न्यायालय और उसकी निगरानी समिति से यह सुनिश्चित करने की अपील करना चाहते हैं कि सीलिंग अभियान के नाम पर चुनिंदा कार्रवाई न की जाए।

रुपया गिरने से 2018 में पहली बार 400 अरब डॉलर से नीचे आया ‘विदेशी मुद्रा भंडार’, 5800 करोड़ का नुकसान

Foreign exchange reserves fall first time in 2018

2014 में भाजपा की तरफ से दावा किया गया था कि नरेंद्र मोदी के प्रधानमंत्री बनने के बाद डॉलर के मुकाबले रुपया नहीं गिरेगा और ना ही पेट्रोल-डीजल की कीमतें असमान पर पहुंचेंगी।

लेकिन 2018 में देश की अर्थव्यवस्था इन दोनों मुश्किलों का सामना कर रही है और इसके कई अन्य परिणाम भी भुगतने पड़ रहे हैं।

देश का ‘विदेशी मुद्रा भंडार’ सात सितंबर को समाप्त सप्ताह में 81.95 करोड़ डॉलर कम होकर 399.282 अरब डॉलर पर आ गया। यह पिछले एक साल में यानि 2018 में पहला मौका है जब विदेशी मुद्रा भंडार 400 अरब डॉलर से नीचे आया है।

रिजर्व बैंक के शुक्रवार को जारी ताजा आंकड़ों के अनुसार यह लगातार दूसरा सप्ताह है जब विदेशी मुद्रा भंडार में भारी गिरावट आयी है। गौरतलब है कि पिछले हफ्ते विदेशी मुद्रा भण्डार में 1.191 अरब डॉलर की गिरावट दर्ज की गई थी।

ये नुकसान केवल देश में ही नहीं बल्कि अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर भी देश को झेलना पड़ रहा है। अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष से निकासी का विशेष अधिकार 15 लाख डॉलर कम होकर 1.476 अरब डॉलर रह गया है। आईएमएफ में देश का भंडार भी 25 लाख डॉलर घटकर 2.474 अरब डॉलर पर आ गया।

 

Source: boltaup.com

खनन क्षेत्र में 15 गुना निवेश गिरा, ‘नोटबंदी’ के बाद अब ‘निवेश में मंदी’ ले डूबेगी लाखों नौकरियां

Huge fall in fdi for mining industry

देश की अर्थव्यवस्था के हालात बिगड़ते जा रहे हैं। देश में एक तरफ जहाँ स्वदेशी कारोबार का ग्राफ गिर रहा है और लोग बेरोजगारी से परेशान हैं वहीं अब विदेशी निवेश यानि एफडीआई भी घटती जा रही है।

मोदी सरकार का दावा है कि उसके आने के बाद देश को अंतर्राष्ट्रीय पटल पर एक नई पहचान मिली है। पहले के मुकाबले सभी क्षेत्र के ज़्यादा लोगों ने भारत की तरफ आकर्षित होना शुरू किया है। लेकिन आंकड़े कुछ और कहानी बता रहे हैं।

बिज़नस स्टैण्डर्ड की एक खबर के मुताबिक, खनन क्षेत्र क्षेत्र में एफडीआई लगातार गिरती जा रही है। जहाँ वर्ष 2014-15 में खनन क्षेत्र में 659 मिलियन अमेरिकी डॉलर यानि कि लगभग 3,737 करोड़ रुपिए का विदेशी निवेश हुआ था वहीं, ये इस वर्ष 2017-18 में गिरकर 36 मिलियन डॉलर यानि कि लगभग 250 करोड़ रुपए रह गया है।

मतलब 3,383 करोड़ रुपए का नुकसान!

खनन क्षेत्र में इन तीन सालों में ये बड़ी गिरावट आई है। ये तब है जब मोदी सरकार देश में विदेशी निवेश बढ़ाने के लिए कई श्रम विरोधी कानूनों को बढ़ावा दे रही है।

गौरतलब है कि खनन क्षेत्र का जीडीपी में 7-8% का योगदान देता है और करोड़ों की संख्या में लोग इसमें कार्यरत हैं। ऐसे में अगर निवेश गिरेगा तो नौकरियों पर भी मुसीबत आ सकती है।

दरअसल, नोटबंदी के बाद से देश में जिस तरह के आर्थिक हालत बदले हैं। उसके बाद से ज़्यादातर क्षेत्रों के की स्तिथि ख़राब नज़र आ रही है। जीएसटी ने इन हालातों को और ज़्यादा ख़राब करने का काम किया है। और ऐसे में विदेशी निवेशक भी पैसा निवेश करने से बचते नज़र आ रहे हैं।

 

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पूर्व RBI गवर्नर राजन का खुलासा: ‘पीएमओ को भेजी थी बड़े घोटालेबाजों की लिस्ट’, लेकिन…

भारतीय रिजर्व बैंक के पूर्व गवर्नर रघुराम राजन ने संसदीय समिति को सौंपे एक रिपोर्ट में कहा है कि उन्होंने देश में हाई प्रोफाइल घोटालेबाजों की एक लिस्ट प्रधानमंत्री कार्यालय को भेजी थी लेकिन उस पर क्या कार्रवाई हुई, उन्हें इसकी कोई जानकारी नहीं है।

Ex RBI governor ne PM ki bheji thi ye badi list
Ex RBI governor ne PM ki bheji thi ye badi list

अपनी रिपोर्ट में राजन ने कहा है कि बैंक अधिकारियों के अति उत्साह, सरकार की निर्णय लेने की प्रक्रिया में सुस्ती तथा आर्थिक वृद्धि दर में नरमी डूबे कर्ज के बढ़ने की प्रमुख वजह है। इसके अलावा संसदीय समिति के अध्यक्ष मुरली मनोहर जोशी को दिये नोट में उन्होंने कहा, ‘‘कोयला खदानों का संदिग्ध आवंटन के साथ जांच की आशंका जैसे राजकाज से जुड़ी विभिन्न समस्याओं के कारण यूपीए और एनडीए दोनों सरकारों में निर्णय लेने की प्रक्रिया में देरी हुई।’‘

राजन ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों में धोखाधड़ी के मामले दिन-ब-दिन बढ़ते जा रहे हैं। राजन ने संसदीय समिति से कहा, “जब मैं गवर्नर था तब आरबीआई ने फ्रॉड मॉनिटरिंग का एक विभाग बनाया था ताकि छानबीन करने वाली एजेंसी को फ्रॉड केस की जानकारी उपलब्ध कराई जा सके।

Ex RBI governor ne PM ki bheji thi ye badi list
Ex RBI governor ne PM ki bheji thi ye badi list

मैंने तब पीएमओ को हाई प्रोफाइल फ्रॉड केस की लिस्ट भेजी थी और उनमें से किसी एक या दो घोटालेबाज की गिरफ्तारी के लिए कॉर्डिनेशन की गुजारिश की थी। मुझे नहीं मालूम कि उस बारे में क्या प्रगति हुई है। यह ऐसा मामला है जिस पर तत्परता से कार्रवाई होनी चाहिए थी।”

राजन ने कहा कि दुर्भाग्यवश किसी भी एक बड़े घोटालेबाज की गिरफ्तारी नहीं हो सकी, इस वजह से ऐसे मामलों में कमी नहीं आ सकी। बता दें कि राजन सितंबर 2013 से सितंबर 2016 तक आरबीआई के गवर्नर थे। राजन की रिपोर्ट पर कांग्रेस ने पीएम नरेंद्र मोदी पर निशाना साधा है और पूछा है कि प्रधानमंत्री बताएं कि क्यों पीएमओ ने उन चिन्हित डिफाल्टरों के खिलाफ कार्रवाई क्यों नहीं की?

कांग्रेस प्रवक्ता रणदीप सिंह सुरजेवाला ने आरोप लगाया कि यूपीए सरकार के वक्त 2014 में एनपीए 2.83 लाख करोड़ का था जो मोदी सरकार में बढ़कर 12 लाख करोड़ रुपये हो गया है। हालांकि, राजन ने अपनी रिपोर्ट में यह भी कहा है कि बड़ी संख्या में बैंकों का डूबा कर्ज या एनपीए 2006 से 2008 के दौरान बढ़ा जब देश की आर्थिक वृद्धि दर काफी तेज थी।

Ex RBI governor ne PM ki bheji thi ye badi list
Ex RBI governor ne PM ki bheji thi ye badi list

राजन ने कहा कि यही वह समय था जब बैंकों ने गलतियां कीं। उन्होंने पीछे की वृद्धि और प्रदर्शन के आधार पर भविष्य का अनुमान लगा लिया और परियोजनाओं के लिए बड़ा कर्ज दिया, जबकि उनमें प्रवर्तकों की इक्विटी कम थी। राजन ने कहा कि कई बार बैंकों ने कर्ज देने के लिए प्रवर्तक के निवेशक बैंक की रिपोर्ट के आधार पर करार किया और अपनी ओर से पूरी जांच पड़ताल नहीं की।

अखिलेश का बड़ा बयान, कहा: ‘… तो 2019 में ख़त्म हो जायेगा लोकतंत्र’

2019 ko lekar akhilesh ne kaha khatm ho jayega loktantra

उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने कहा है कि अगर 2019 में फिर से बीजेपी जीत गई तो देश में लोकतंत्र खत्म हो जाएगा। शुक्रवार (14 सितंबर) को इटावा में एक रैली को संबोधित करते हुए अखिलेश ने कहा कि अगर बीजेपी 2019 में जीत जाती है और केंद्र की सत्ता में वापसी करती है तो इस बात की प्रबल संभावना है कि उसके बाद देश में कोई चुनाव नहीं होगा।

2019 ko lekar akhilesh ne kaha khatm ho jayega loktantra
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उन्होंने पार्टी समर्थकों से कहा कि साल 2019 में लोकतंत्र को बचाने का आखिरी मौका है। पूर्व सीएम ने आरोप लगाया कि केंद्र की सत्ताधारी बीजेपी सरकार देश को जातिवाद और संप्रदायवाद की आग में झोक रही है। उन्होंने कहा कि मोदी सरकार दलितों के हित के खिलाफ काम कर रही है।

इससे पहले अखिलेश ने बीजेपी सरकार को तेल की बढ़ती कीमतों, रुपये के गिरते भाव, बढ़ती महंगाई, एलपीजी सिलेंडर के बढ़ते दाम पर घेरा और लोगों से 2019 के लोकसभा चुनावों में बीजेपी को सबक सिखाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि केंद्र की बीजेपी सरकार सभी मोर्चों पर फेल हो चुकी है।

2019 ko lekar akhilesh ne kaha khatm ho jayega loktantra
2019 ko lekar akhilesh ne kaha khatm ho jayega loktantra

2014 के चुनावों में जितने वादे किए थे उनमें कुछ बी पूरा नहीं किया। अखिलेश ने नोटबंदी और जीएसटी का जिक्र करते हुए कहा कि जिन लोगों ने नोटबंदी और जीएसटी लागू किया उनलोगों ने देश की आर्थिक प्रगति रोक दी है। सपा अध्यक्ष ने कहा कि बीजेपी ने अपना कालाधन सफेद करने के लिए नोटबंदी लागू किया लेकिन अब लोकसभा चुनाव आ गया है, जनता बीजेपी को करारा जवाब देगी।

2019 ko lekar akhilesh ne kaha khatm ho jayega loktantra
2019 ko lekar akhilesh ne kaha khatm ho jayega loktantra

बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह के बयान पर अखिलेश ने चुटकी ली और कहा कि वो कहते हैं हम पचास साल तक सत्ता से दूर नहीं जाएंगे। लगता है कि उन लोगों को उप चुनाव के नतीजे याद नहीं हैं। तीन सीटों पर उप चुनाव हुए सभी पर बीजेपी को हार का सामना करना पड़ा। अखिलेश ने सीएम योगी आदित्यनाथ पर भी निशाना साधा और कहा कि उनकी उल्टी गिनती शुरू हो चुकी है। महंत से सीएम बने योगी 2019 के बाद सीएम नहीं रहेंगे।

JNUSU चुनावः ABVP की गुंडागर्दी के बाद मतगणना स्थगित, अलका बोलीं- ये गोडसे के तरीकों से चुनाव जीतना चाहते हैं

Alka Lamba slams ABVP after jnusu vote counting suspended

जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय में छात्रसंघ चुनाव के नतीजे घोषित होने वाले है। मगर उससे पहले आरएसएस की छात्र इकाई अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) के छात्रों ने जमकर हंगामा काटा और तोड़फोड़ की।

बताया जा रहा है कि एबीवीपी के छात्रों ने सुबह करीब चार बजे इलेक्शन कमिश्नर पर धावा बोल दिया और बूथ कैपचरिंग की कोशिश की, जिसमें एक सुरक्षा में तैनात गार्ड को चोट भी आई हैं। इस दौरान एबीवीपी के छात्रों ने एक पत्रकार से भी बदसलूकी की।

एबीवीपी छात्रों की इस गुंडागर्दी को लेकर आम आदमी पार्टी की विधायक अलका लांबा ने बीजेपी पर बड़ा हमला बोला है।

उन्होंने ट्विटर के ज़रिए कहा कि यहां भी इन संघ समर्थित ABVP का दंगाई खेल चालू है, यह लोकतांत्रिक तरीकों से नहीं बल्कि हिंसक, गोड़से के तरीकों से चुनाव जीतने में विश्वास रखते हैं।

कल डीयू था, आज जेएनयू है, कल देश का चुनाव होगा। इन भाजपाईयों की गुंडई जारी रहेगी। सत्ता के दम पर यह लोकतंत्र का दमन करेंगे।

दरअसल जेएनयू में एबीवीपी छात्रों की नाराजगी थी कि उसके प्रतिनिधि को नहीं बुलाया गया जबकि इलेक्शन कमीशन की तरफ से कहा गया कि उन्होंने बुलाया गया था लेकिन वह समय पर नहीं पहुंच सके।

कमीशन का आरोप है कि एक अध्यक्ष और जॉइंट सिकरेट्री पद के प्रत्याशी ने चुनाव समिति के साथ मारपीट की, चुनाव समिति की महिला सदस्यों के साथ मारपीट भी की गई।

इस हिंसा से जेएनयू छात्रसंघ इलेक्शन कमीशन ने काउंटिंग रोक दी है। छात्रों ने बताया कि इलेक्शन कमीशन ने एबीवीपी के लोगों को तीन बार बुलाया मगर कोई गया नहीं जिसके बाद गुस्साए एबीवीपी छात्रों ने इलेक्शन कमीशन के लोगों के साथ हाथापाई की।

इस हाथापाई के बाद कमीशन ने अनिश्चितकालीन वक़्त के लिए काउंटिंग रोक दी। उनका कहना है कि जब तक एबीवीपी के लोग अपनी हरकत जारी रखेंगें काउंटिंग नहीं शुरू की जाएगी।

वहीँ एबीवीपी का कहना है कि जेएनयूएसयू इलेक्शन में पहले राउंड काउंटिंग (साइंस स्कूल और अन्य स्पेशल सेन्टर) शुरू होने के समय एबीवीपी के काउंटिंग एजेंट को बुलाए बिना चुनाव समिति के सदस्यों ने लेफ्ट के कार्यकर्ताओं के साथ काउंटिंग शुरू कर दिया है।

छात्रों का कहना है कि चुनाव समिति के मेंबर्स और लेफ्ट दोनों मिलकर साजिश और धांधली कर रहे हैं।

बता दें कि बीते शुक्रवार जेएनयू छात्रसंघ चुनाव के चार अहम पदों के लिए शुक्रवार को वोटिंग हुई थी। जिसमें अध्यक्ष, उपाध्यक्ष, सचिव और संयुक्त सचिव के पदों के लिए हुए इस चुनाव में 68 फीसदी वोटिंग हुई थी।

जिसके नतीजे 16 सितंबर को घोषित किए जाएंगे। चुनाव में एबीवीपी, बापसा, एनएसयूआई, संयुक्त वाम मोर्चा, छात्र राजद और सवर्ण मोर्चा ने बढ़चढ़कर हिस्सा लिया था।

 

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PM मोदी की तरह अगर राहुल गांधी ने ख़ुद को ‘बोहरा समाज’ का हिस्सा बताया होता तो अब तक वो ‘मुल्ला’ घोषित कर दिए जाते : आचार्य

Acharya Pramod comment on PM Modi's meet with Bohra samaj

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शुक्रवार को इंदौर में बोहरा समाज की वाअज (प्रवचन) में शिरकत करने के लिए पहुंचे। उन्होंने यहां माणिकबाग स्थित सैफी मस्जिद में ख़ुद को बोहरा समाज का हिस्सा बताते हुए बोहरा समाज की जमकर तारीफ़ की।

पीएम मोदी ने कहा कि शांति-सद्भाव, सत्याग्रह और राष्ट्रभक्ति के प्रति बोहरा समाज की अहम भूमिका रही है। इसलिए आप सबके बीच आना मुझे एक नया अनुभव देता है।

बोहरा समाज के गुरु सैयदना साहब की तारीफ़ करते हुए उन्होंने कहा कि सैयदना साहब ने समाज को जीने की सीख दी।

पीएम मोदी ने कहा कि अपने देश, मातृभूमि से प्रेम की सीख सैयदना साहब देते रहे हैं। सैयदना साहब ने गांधीजी के साथ मिलकर मूल्यों की स्थापना में अहम योगदान दिया था।

पीएम मोदी की बोहरा समुदाय से इस मुलाकात पर आध्यात्मिक गुरु आचार्य प्रमोद ने टिप्पणी की है। उन्होंने कहा कि जिस तरह से मोदी जी ने बोहरा समुदाय के लोगों से मस्जिद में मिलकर ख़ुद को उनके समाज का हिस्सा बताया, अगर इसी तरह राहुल गांधी ने ख़ुद को बोहरा समाज का हिस्सा कहा होता तो अबतक उन्हें मुस्लिम घोषित कर दिया जाता।

उन्होंने ट्वीट कर लिखा, “मस्जिद में जाकर मोदी जी का ये बयान बहुत अच्छा है, कि मैं आपके समाज का हिस्सा हूँ, लेकिन अगर यही बात राहुल गांधी ने कही होती, तो वो ‘मुल्ला’ हो जाता”।

ग़ौरतलब कि सोशल मीडिया पर आपको राहुल गांधी की कई ऐसी तस्वीरें मिलेंगी जिनमें कैप्शन के साथ उन्हें ‘मुल्ला’ लिखा जाता है।

राहुल गांधी को मुल्ला लिखे जाने की वजह सिर्फ इतनी होती है कि वो इन तस्वीरों में अल्पसंख्यक समुदाय के लोगों से मिलते-जुलते दिखाई देते हैं।

अब सवाल यह उठता है कि जब राहुल गांधी पर अल्पसंख्यक समुदाय के लोगों से मिलने पर मुसलमान का तमगा लगाया जा सकता है तो फिर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कैसे मुसलमानों से मिलने पर हिंदू हृदय सम्राट बन जाते हैं?

 

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चौकीदार और दरबान में फर्क होता है मोदीजी, चौकीदार ‘माल्या’ को रोक लेता और दरबान पैसा लेकर गेट खोल देता हैः कुणाल कामरा

Comedian Kunal Kamra hoops PM Modi

भारतीय बैंकों को हज़ारों करोड़ की चपत लगाने वाले उद्योगपति विजय माल्या के वित्त मंत्री अरुण जेटली से भारत छोड़ने से पहले मुलाकात वाले बयान के बाद सीधे तौर पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की भूमिका पर सवाल उठ रहे हैं।

विपक्ष के साथ-साथ सोशल मीडिया पर अब ‘चौकीदार पीएम’ पर बहस होने लगी है। जगजाहिर है कि कई मौकों पर खुद पीएम मोदी ने अपने आपको देश का चौकीदार कहा है।

इसी कड़ी में ट्विटर पर कॉमेडियन कुणाल कामरा ने लिखते हुए पीएम मोदी कि चौकीदारी पर ही सवाल उठाए हैं। कुणाल ने ‘चौकीदार’ और ‘दरबान’ में फर्क बताते हुए लिखा है की, “चौकीदार और दरबान में फर्क होता है मोदीजी।

चौकीदार माल्या को रोक लेता और दरबान गेट खोलकर सल्यूट करता, बक्शीश लेता और जाने देता।”

कुणाल ने आगे पीएम मोदी से पूछा है कि अब आप ही बताओ आप चौकीदार हो या दरबान?

माल्या ने लंदन की कोर्ट के बाहर बुधवार को खुलासा करते हुए कहा था कि भारत छोड़ने से पहले उसने मामला सुलझाने के लिए वित्त मंत्री (अरुण जेटली) से मुलाकात की थी।

यह चौकाने वाली बात है की वित्त मंत्री और सीबीआई प्रधानमंत्री को सीधे रिपोर्ट करते हैं ऐसे में विजय माल्या संसद भवन के सेंट्रल हॉल में सरकार के कद्दावर मंत्री से मिलने के बाद देश छोड़कर भाग जाता है।

लेकिन, वित्त मंत्री अरुण जेटली सीबीआई और ईडी को खबर तक नहीं करते। वरना माल्या को पकड़ने में इतनी मशक्कत नहीं करती पड़ती। ये सब घटना तब हुई जब विजय माल्या के घोटाले की बात उजागर हो चुकी थी।

वहीं विपक्षी नेता विजय माल्या के आए बयान से पहले से ही बोलते आ रहे थे कि उसे विदेश भागने में जरुर केंद्र सरकार ने मदद की है। वरना बैंकों का हजारों करोड़ रुपए लेकर विदेश भागना इतना आसान नहीं है वो भी घोटाले के उजागर होने के बाद!

 

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DUSU चुनाव : EVM में धांधली कर ABVP को जिताया गया, बैलेट पेपर से दोबारा कराए जाएं चुनावः अजय माकन

Ajay Maken demands revoting fo DUSU with Ballot papers

दिल्ली यूनिवर्सिटी छात्रसंघ चुनावों में मतगणना के दौरान ईवीएम मशीनों में गड़बड़ी का मामला सामने आने के बाद कांग्रेस ने चुनाव फिर से मतपत्र के ज़रिए कराने की अपील की है।

दिल्ली कांग्रेस के अध्यक्ष एवं कांग्रेस के राष्ट्रीय प्रवक्ता अजय माकन ने कहा कि हमारी मांग है कि डूसू चुनाव फिर से मतपत्र से कराएं जाएं। उन्होंने डुसू के अन्य सभी चुनावों को भी मतपत्र के ज़रिए कराए जाने की अपील करते हुए कहा कि हम यह भी चाहते हैं कि मतगणना कैमरे की निगरानी में हो।

ईवीएम में गड़बड़ी के बाद एबीवीपी की जीत पर सवाल खड़े करते हुए माकन ने कहा कि ऐसा क्यों होता है कि जब ईवीएम खराब होती है तो इसका फायदा सिर्फ बीजेपी और एबीवीपी को मिलता है, ईवीएम कभी कांग्रेस और एनएसयूआई को फ़ायदा नहीं पहुंचाती।

ग़ौरतलब है कि ईवीएम में गड़बड़ी की ख़बरों के बाद चुनाव आयोग ने सफ़ाई देते हुए कहा कि उन्होंने यूनिवर्सिटी को कोई ईवीएम नहीं दी। आयोग ने कहा कि मुमकिन है छात्र संघ चुनावों में इस्तेमाल की गई मशीनें यूनिवर्सिटी प्रशासन ने निजी तौर पर तैयार कराई हों।

चुनाव आयोग के इस बयान पर संदेह व्यक्त करते हुए माकन ने कहा कि मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने कहा है कि चुनाव आयोग ने दिल्ली विश्वविद्यालय को कोई ईवीएम नहीं दी।

यहां तो चुनाव आयोग की कोई बात नहीं थी। हम तो सिर्फ यह कह रहे हैं कि डीयू में मशीनों से छेड़छाड़ हुई है। इस पर तो डीयू को जवाब देना चाहिए, लेकिन चुनाव आयोग जवाब दे रहा है।

कांग्रेस नेता ने कहा कि अगर उनकी मांगे नहीं मानी गईं तो वो अदालत का दरवाज़ा भी खटखटा सकते हैं। वहीं पत्रकार जैनेन्द्र कुमार ने इस मामले में जानकारी जेते हुए ट्विटर के ज़रिए कहा कि दिल्ली यूनिवर्सिटी ने उसी ECIL से ईवीएम खरीदा है जो चुनाव आयोग को भी ईवीएम सप्लाई करता है।

अगर डूसू में ईवीएम से छेड़छाड़ हो सकती है तो विधानसभा और लोकसभा चुनावों में भी गड़बड़ी की जा सकती है। इसलिए मतपत्र से चुनाव होने चाहिए।

 

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खुलासा : SBI को SC के वकील ने बताया था कि ‘माल्या’ भागने वाला है फिर भी ‘वित्त मंत्रालय’ ने कुछ नहीं किया

SBI delayed action against Mallya said SC Lawyer dushyant dave

विजय माल्या के मामले को लेकर अब नए खुलासे सामने आ रहे हैं। जिस तरह से चीज़े सामने आ रही हैं उसके बाद सरकार पर शराब कारोबारी विजय माल्या को भगाने के आरोप बढ़ते जा रहे हैं।

अब पता चला है कि वित्त मंत्रालय को कई स्रोतों से माल्या के भागने की जानकारी थी लेकिन कोई कदम नहीं उठाया गया।

‘द इंडियन एक्सप्रेस’ की खबर के मुताबिक, स्टेट बैंक ऑफ़ इंडिया (एसबीआई) को माल्या के भागने की जानकारी दे दी गई थी। इसके बावजूद बैंक ने कोई कदम नहीं उठाया।

गौरतलब है कि एसबीआई देश का सबसे बड़ा बैंक है और वित्त मंत्रालय के अंतर्गत आता है। विजय माल्या पर देश के बैंकों का 9000 करोड़ से ज़्यादा का कर्ज है जिसे बिना चुकाए वो देश छोड़कर भाग गया।

वहीं, माल्या ने बुधवार को लंदन में कोर्ट के बाहर कहा है कि वो भारत छोड़ने से पहले वित्त मंत्री अरुण जेटली से मिले थे। और माल्या के भागने से कुछ महीने पहले जांच एजेंसी सीबीआई ने उसके लिए निकाले गए ‘लुक आउट’ नोटिस में ‘हिरासत’ के नियम को बदलकर सिर्फ ‘सूचना देना’ कर दिया।

मतलब इस नोटिस से ये होता है कि अगर आरोपी भारत छोड़ने की कोशिश करे तो उसे हिरासत में ले लिया जाता है। लेकिन सीबीआई ने हिरासत के नियम को बदलकर ये कर दिया कि उसे बस इमिग्रेशन वाले बता दें कि आरोपी भाग रहा है वो उसे रोके नहीं।

ये सभी बाते माल्या के पक्ष में गई और वो आसानी से देश छोड़कर भाग गया। ये भी उल्लेखनीय है कि मोदी सरकार पर लगातार सीबीआई को अपने लिए इस्तेमाल करने का आरोप लगता रहा है।

सुप्रीम कोर्ट के एक वरिष्ठ वकील दुष्यंत दवे ने इंडियन एक्सप्रेस को बताया है कि 2 मार्च, 2016 को जब विजय माल्या देश छोड़कर फरार हुआ था, उससे 4 दिन पहले ही उन्होंने बैंक को कहा था कि माल्या भारत छोड़कर फरार हो सकता है, इसलिए आप उसे रोकने के लिए कोर्ट में गुहार लगाएं।

लेकिन हैरानी की बात है कि एसबीआई बैंक ने इस मामले पर कोई कारवाई नहीं की, जिसका नतीजा ये हुआ कि विजय माल्या आराम से देश के बैंकों को कई हजार करोड़ रुपए का चूना लगाकर फरार हो गया।

 

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PM मोदी की अनुमति के बगैर CBI ने कैसे विजय माल्या का लुकआउट नोटिस बदला होगा?- राहुल गांधी

Rahul Gandhi attacks on PM Modi issue of Vijay Mallya

कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने भगोड़े कारोबारी विजय माल्या के मामले पर शुक्रवार को सरकार पर फिर हमला बोला और कहा कि यह समझ से परे है कि इतने बड़े मामले में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अनुमति के बिना सीबीआई ने लुकआउट नोटिस बदला होगा।

गांधी ने ट्वीट कर कहा, ‘ सीबीआई ने बड़ी खामोशी से डिटेन नोटिस को इन्फॉर्म नोटिस में बदल दिया जिससे माल्या देश से बाहर भाग सका. सीबीआई सीधे प्रधानमंत्री को रिपोर्ट करती है।

ऐसे में यह समझ से परे है कि इतने बड़े और विवादित मामले में सीबीआई ने प्रधानमंत्री की अनुमति के बगैर लुकआउट नोटिस बदला होगा।

राहुल गांधी ने गुरुवार को भी इस मामले को लेकर नरेंद्र मोदी सरकार पर निशाना साधा था और आरोप लगाया था कि ‘जेटली की मिलीभगत’ से माल्या भागने में सफल रहा।

 

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CM योगी ने गन्ना किसानों पर दिया था ऊंटपटांग बयान, अब आज़म ने किया तंज, ‘यूपी वालों को अपने मुंह पर ज़ोर से…’

Azam Khan attack on CM Yogi for Sugarcane

रामपुर – उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के गन्ने वाले ब्यान को लेकर सपा नेता आजम खां ने जमकर निशाना साधा है. आजम खां ने तंज कसते हुए कहा कि उत्तर प्रदेश की जनता को आज अपने मुंह पर जोर से दो थप्पड़ मारने चाहिए कि उन्होंने कितने पढ़े लिखे आदमी को मुख्यमंत्री बनाया है. अब जनता के लिए ये प्रकोप है, सजा है.

Azam Khan attack on CM Yogi for Sugarcane
Azam Khan attack on CM Yogi for Sugarcane

क्या है पूरा मामला

मंगलवार को बागपत में एक जन जनसभा को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा था कि किसान कम गन्ना उगाए, वैसे भी देश में शुगर के मरीज बढ़ते जा रहे हैं. उनके इस बयान पर पलटवार करते हुए पूर्व मंत्री और सपा के कद्दावर नेता आजम खां ने कहा कि असल में योगी जी ने गलत क्षेत्र में बयान दे दिया.

Azam Khan attack on CM Yogi for Sugarcane
Azam Khan attack on CM Yogi for Sugarcane

प्रदेश के मुखिया का क्या बयान है, पूरे प्रदेश की जनता को शर्म आनी चाहिए और आज प्रदेश की जनता को अपने मुंह पर दो थप्पड़ मारने चाहिए कि उन्होंने कितने पढ़े लिखे और कितनी महान पार्टी के व्यक्ति को मुख्यमंत्री बनाया है.

Azam Khan attack on CM Yogi for Sugarcane
Azam Khan attack on CM Yogi for Sugarcane

यह तो जनता के लिए प्रकोप है, सजा है. मैं तो जाहिल गवार हूं. अगर मैं इस बयान पर कोई जवाब दूं तो मुख्यमंत्री को ऐसे बयान पर शर्म आनी चाहिए क्योंकि आप उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री हो और पश्चिमी उत्तर प्रदेश प्रदेश के अधिकतर किसान गन्ना की पैदावार करता है.

Azam Khan attack on CM Yogi for Sugarcane
Azam Khan attack on CM Yogi for Sugarcane

आप उस किसान को प्रोत्साहित ना करके आप उसको यह कह रहे हो कि वह गन्ना की खेती ना करें. इससे यह साबित होता है कि जनता को किस तरह से मूर्ख बनाया गया और जनता बनी भी. इस पर और कुछ कहना तो जाहिल पन ही होगा क्योंकि ऐसे बयान पर बात करना ही सबसे बड़ी शर्मिंदगी की बात होगी और यह मैं नहीं करूंगा.

Azam Khan attack on CM Yogi for Sugarcane
Azam Khan attack on CM Yogi for Sugarcane

उन्होंने कहा कि जहां किसान गन्ना उगाता है और उससे झूठा वादा किया जाता है कि 14 दिनों के अंदर उसका भुगतान हो जाएगा जबकि 6 महीने बीत जाने के बावजूद भी करोड़ों रुपए बकाया है. उन्होंने कहा कि तुम्हें शर्म आनी चाहिए अगर वह ऐसा बयान देते हैं.

Azam Khan attack on CM Yogi for Sugarcane
Azam Khan attack on CM Yogi for Sugarcane

इससे साफ जाहिर हो जाता है कि BJP सरकार किसानों की कितनी बड़ी हितैषी है और किस तरह से वह किसानों के विकास के लिए काम कर रही है. बड़े वादे करने से कुछ नहीं होता जमीनी स्तर पर भी कुछ करना होता है और जब इंसान कुछ नहीं कर पाता है तो ऐसे शर्मिंदगी भरे बयान देता है.

माल्या केस में ललित मोदी की एंट्री, कहा- अरुण जेटली को झूठ बोलने की आदत

Lalit Modi's entry in the case of Mallya said Arun jaitley's habit of lying

भारत से करोड़ो रुपए लेकर फरार शराब कारोबारी विजय माल्या ने देश छोडने से पहले हाल ही में वित्त मंत्री अरुण जेटली के साथ मुलाक़ात का खुलासा किया है। जिसके बाद भारत की राजनीति में भूचाल सा आ गया। हालांकि जेटली ने माल्या के दावों को पूरी तरह से खारिज किया है।

इसी बीच अब इस पूरे विवाद में अब आईपीएल के पूर्व कमिश्नर ललित मोदी की एंट्री हुई है। उन्होने जेटली की तुलना सांप से की। उन्होंने कहा, ‘अरुण जेटली को झूठ बोलने की आदत है।’

ललित मोदी ने ट्वीट करचे हुए लिखा है कि अरुण जेटली को झूठ बोलने की आदत है, विजय माल्या से अरुण जेटली की कथित मुलाकात पर कहा कि जेटली इस तरह का इनकार क्यों कर रहे हैं जब कई लोग इस बात को जानते हैं कि उसने मुलाकात की थी, जो वहां मौजूद थे। अरुण जेटली को झूठ बोलने की आदत है। आप एक सांप (चिह्न) से क्या उम्मीद कर सकते हैं। ललित मोदी पर आईपीएल के ठेके देने में रिश्वत लेने, मनी लॉन्ड्रिंग के आरोप हैं और वह भारत से 2010 से फरार है।

बता दें कि कल विजय माल्या ने लंदन में दावा किया था कि वो भारत छोड़ने से पहले सेटलमेंट के लिए वित्त मंत्री अरुण जेटली ने मिला था। माल्या के दावों को वित्त मंत्री अरुण जेटली ने सिरे से खारिज कर दिया। उन्होंने कहा, ‘मेरे संज्ञान में यह बात सामने आई है कि विजय माल्याय ने सेटलमेंट ऑफर के लिए मुझसे मिलने का दावा किया है जो कि पूरी तरह से गलत हैं क्योंकि यह सच को सामने नहीं रखता।’ उन्होंने कहा, कि उन्होंने साल 2014 के बाद से ही माल्या को कभी मुलाकात का समय नहीं दिया।

पीएम मोदी को कहा था अनपढ़, अब बोले संजय निरुपम – ‘लोकतंत्र में पीएम भगवान नहीं होता’

PM Modi has said illiterate says Sanjay Nirupam

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता संजय निरुपम ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लेकर बुधवार को एक विवादित बयान दिया। उन्होंने मोदी को ‘निरक्षर’ करार दिया।

महाराष्ट्र के स्कूलों में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की जिंदगी पर बनी लघु फिल्म दिखाने के राज्य सरकार के फैसले की आलोचना करते हुए निरुपम ने कहा, ‘जो बच्चे स्कूल, कॉलेज में पढ़ रहे हैं मोदी जैसे अनपढ़-गंवार के बारे में जानकर उननो क्या मिलने वाला है? यदि कोई बच्चा पीएम की शैक्षणिक योग्यता के बारे में सवाल करेगा तो आप उसे क्या बताएंगे? लोगों को उनकी योग्यता नहीं पता है। किन ताकतों ने दिल्ली विश्विद्यालय पर दवाब डाला ताकि उनकी डिग्री जारी ना की जाए। जबकि उन्होंने दावा किया था वह वहां पढ़ चुके हैं?’

बयान पर विवाद बढ्ने पर उन्होने कहा कि “यह लोकतंत्र है, और लोकतंत्र में प्रधानमंत्री भगवान नहीं होते हैं लोग उनके बारे में डेकोरम का ध्यान रखकर ही बात करते हैं। मैंने जिन शब्दों का इस्तेमाल किया, वे अभद्र नहीं थे।”

वहीं दूसरी और भाजपा महाराष्ट्र इकाई के प्रवक्ता शाइना एनसी ने निरुपम को ‘मानसिक तौर पर विक्षिप्त’ करार दिया है।निरुपम की आपत्तिजनक टिप्पणी पर प्रतिक्रिया देते हुए साइना एनसी ने ट्वीट किया, ‘मानसिक रूप से विक्षिप्त संजय निरुपम द्वारा एक और अप्रिय टिप्पणी। लगता है कि वह भूल गए हैं कि नरेंद्र मोदी 125 करोड़ भारतीयों द्वारा चुने गए हैं जो ‘अनपढ़ या गंवार’ नहीं हैं। विचारधारा और प्रासंगिक प्रश्नों से कांग्रेस दूर हो गई है, जनता 2019 में जवाब देगी।’

पेट्रोल और डीजल के बढ़ते दामों पर बोले ओवैसी – मोदी सरकार ने सबकी जिंदगी में भर दिया अंधेरा

Owaisi on the rising prices of Petrol and Diesel

ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (आईएमआईएम) अध्यक्ष असदुद्दीन ओवैसी ने पेट्रोल और डीजल की बढ़ती कीमतों पर मोदी सरकार को घेरते हुए कहा कि मोदी सरकार ने सबकी जिंदगी में अंधेरा भर दिया है।

उन्होने कहा कि मैं पीएम मोदी से कहना चाहता हूं कि उन्होंने हमेशा एक अंधेरे में रखने का माहौल बनाया है यह दिखाने के लिए कि पेट्रोल और डीजल के दाम आम आदमी की पहुंचे से बाहर है। उन्होंने आगे कहा कि उन्होंने किए गए वादों को पूरा नहीं करके अंधेरा बनाया है। आगे कहा कि हम प्रकाश हैं, विरोधी अंधेरा है।

कांग्रेस पर निशाना साधते हुए ओवैसी ने कहा कि ये समझ के बाहर है कि सिर से लेकर पांव तक भ्रष्टाचार के मामलों में डूबे कांग्रेसी नेता नैतिकता की बात करते हैं। पिछले चार वर्षों में केंद्र सरकार न केवल घरेलू बल्कि विदेशी मोर्चे पर कामयाब रही है।

बता दें कि शुक्रवार को पेट्रोल के दाम में 28 पैसे का इजाफा हुआ है। वहीं डीजल की कीमत भी 22 पैसे प्रति लीटर के हिसाब से बढ़ गई है। दिल्ली में शुक्रवार को पेट्रोल की नई कीमत 81.28 तो डीजल की कीमत 73.30 रुपए पहुंच गई।

केजरीवाल ने 2016 में ही बता दिया था ‘माल्या’ भागा नहीं है बल्कि उसे मोदी सरकार द्वारा भगाया गया है !

Kejriwal had told in 2016 that the govt helped Mallya

भारतीय बैंकों को हज़ारों करोड़ की चपत लगाने वाले उद्योगपति विजय माल्या ने वित्त मंत्री अरुण जेटली पर बड़ा आरोप लगाया है। माल्या ने लंदन की कोर्ट के बाहर बुधवार को कहा कि भारत छोड़ने से पहले उसने मामला सुलझाने के लिए वित्त मंत्री से मुलाकात की थी।

विपक्षी नेता विजय माल्या के आए बयान से पहले से ही बोलते आ रहे थे कि उसे विदेश भागने में जरुर केंद्र सरकार ने मदद की है। वरना बैंकों का हजारों करोड़ रुपए लेकर विदेश भागना इतना आसान नहीं है वो भी घोटाले के उजागर होने के बाद!

दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल ने मार्च 2016 में ही ट्वीट करते बताया था कि माल्या को भगाने में मोदी सरकार की मिलीभगत है।

अपने मार्च 2016 के ट्वीट में केजरीवाल ने लिखा था कि, “सीबीआई सीधे प्रधानमंत्री को रिपोर्ट करती है, प्रधानमंत्री की जवाबदेही है कि माल्या को भारत छोड़ने की अनुमति क्यों दी गई? सीबीआई सरकार की सहमति के बिना माल्या को विदेश जाने की इजाज़त नहीं दे सकती।

अरविन्द केजरीवाल साथ ही मोदी सरकार पर ये भी आरोप लगाते रहे हैं कि विजय माल्या भागा नहीं है बल्कि उसे मोदी सरकार द्वारा भगाया गया है।

वहीं भाजपा वरिष्ठ नेता सुब्रह्मण्यम स्वामी ने साल के जून महीने में कहा था कि, “माल्या भारत छोड़ ही नहीं सकते थे, क्योंकि उनके खिलाफ कई नोटिस एयरपोर्ट्स पर लगे थे।

लेकिन, फिर वो दिल्ली आए और किसी शक्तिशाली (संभवतः अरुण जेटली) शख्स से मुलाकात की और उनके विदेश प्रस्थान करने से पहले सारे नोटिस एयरपोर्ट से हटा लिए गए। आखिर कौन था वो शख्स? जिसने उसे जाने दिया”?

विजय माल्या के इस बयान के बाद बीजेपी में बड़ी हलचल पैदा हो गई है। साथ ही कांग्रेस बीजेपी को इस मामले में घेरने में कोई कसर नहीं छोड़ रही। अन्य विपक्षी दल के नेता भी इस मामले को लेकर लगातार बीजेपी पर हमलावर हैं।

Source: boltaup.com

पुण्यप्रसून वाजपेयी का लेखः अरबों रुपये लुटाकर जो संसद पहुंचा, वह तो देश लूटेगा ही और सत्ता-संसद ही उसे बचाएगी

Punya Prasun Bajpai article on election and leader

एक मार्च 2016 को विजय माल्या संसद के सेन्ट्रल हाल में वित्त मंत्री अरुण जेटली से मिलते हैं. दो मार्च को रात ग्यारह बजे दर्जन भर बक्सों के साथ जेय एयरवेज की फ्लाइट से लंदन रवाना हो जाते हैं. फ्लाइट के अधिकारी माल्या को विशेष यात्री के तौर पर सारी सुविधाये देते हैं. और उसके बाद देश में शुरु होता है माल्या के खिलाफ कार्रवाई करने का सिलसिला या कहें कार्रवाई दिखाने का सिलसिला. क्योंकि देश छोड़ने के बाद देश के 17 बैंक सुप्रीम कोर्ट में विजय माल्या के खिलाफ याचिका डालते हैं. जिसमें बैक से कर्ज लेकर अरबो रुपये ना लौटाने का जिक्र होता है और सभी बैंक गुहार लगाते है कि माल्या देश छोड़कर ना भाग जाये इस दिशा में जरुरी कार्रवाई करें. माल्या के देश छोडने के बाद ईडी भी माल्या के देश छोडने के बाद अपने एयरलाइन्स के लिये लिये गये 900 करोड रुपये देश से बाहर भेजने का केस दर्ज करता है. माल्या के देश छोडने के बाद 13 मार्च को हैदराबाद हाईकोर्ट भी माल्या के खिलाफ गैर जमानती वारंट जारी करता है.

Punya Prasun Bajpai article on election and leader
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क्योंकि माल्या जीएमआर हेदराबाद इंटरनेशनल एयरपोर्ट के नाम जो पचास लाख का चेक देते हैं, वह बाउंस कर जाता है. 24 अप्रैाल को राज्यसभा की ऐथिक्स कमेटी की रिपोर्ट में माल्या को राज्यसभा की सदस्यतता रद्द करने की बात इस टिप्पणी के साथ कहती है कि 3 मई को वह माल्या को सदन से निलंबित किया जाये या नही इस पर फैसला सुनायेगी. और फैसले के 24 घंटे पहले यानी 2 मई को राज्यसभा के चैयरमैन हामिद अंसारी के पास विजय माल्या का फैक्स आता है जिसमें वह अपने उपर लगाये गये आरोपो को गलत ठहराते हुये राज्यसभा की सदस्यतता से इस्तीफा दे देते हैं. और अगले दिन यानी तीन मई 2016 को राज्यसभा के एथिक्स कमेटी माल्या की सदस्यता रद्द करने का फैसला दे देती है. उसके बाद जांच एजेंसियां जागती हैं. पासपोर्ट अवैध करार दिये जाते हैं . विदेश यात्रा पर रोक लग जाती है. तमाम संपत्ति जब्त करने की एलान हो जाता है. और किसी आर्थिक अपराधी यानी देश को चूना लगाने वाले शख्स के खिलाफ कौन-कौन सी एजेंसी क्या क्या कर सकती है, वह सब होता है. चाहे सीबीआई हो आईबी हो ईडी हो या फिर खुद संसद ही क्यो ना हो.

Punya Prasun Bajpai article on election and leader
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तो क्या वाकई देश ऐसे चलता है जैसा आज कांग्रेसी नेता पूनिया कह गये कि अगर संसद के सीसीटीवी को खंगाला जाये तो देश खुद ही देख लेगा कि कैसे माल्या और जेटली एक मार्च 2016 को संसद के सेन्ट्रल हाल में बात नहीं बल्कि अकेले गुफ्तगु भर नहीं बल्कि बैठक कर रहे थे. और यह झूठ हुआ तो वह राजनीति छोड देंगे. या फिर वित्त मंत्री अरुण जेटली बोले, माल्या मिले थे. पर बतौर राज्यसभा सांसद वह तब किसी से भी मिल सकते थे. पर कोई बैठक नहीं हुई. तो सवाल तीन हैं. पहला, जो संसद कानून बनाती है उसे ही नहीं पता कानून तोडने वाले अगर उसके साथ बैठे हैं तो उसे क्या करना चाहिये.

Punya Prasun Bajpai article on election and leader
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दूसरा, सांसद बन कर अपराध होता है या अपराधी होते हुये सांसद बन कर विशेषाधिकार पाकर सुविधा मिल जाती है. तीसरा , देश में कानून का राज के दायरे में सांसद या संसद नहीं आती है क्योंकि कानून वही बनते हैं. दरअसल तीनों सवालो के जवाब उस हकीकत में छिपे हैं कि आखिर कैसे विजयमाल्या सांसद बनते है और कैसे देश की संसदीय राजनीति करोडो के वारे न्यारे तले बिक जाती है. उसके लिये विचार , कानून या ईमानदारी कोई मायने नहीं रखती है. कैसे ? इसके लिये आपको 2002 और 2010 में राज्यसभा के लिये चुने गये विजय माल्या के पैसो के आगे रेंगते कांग्रेस और बीजेपी के सांसदों के जरीये समझना होगा. या फिर कार्नाटक में मौजूदा सत्ताधारी जेडीएस का खेल ही कि कैसे करोडों-अरबों के खेल तले होता रहा इसे भी समझना होगा और संसद पहुंचकर कोई बिजनेसमैन कैसे अपना धंधा चमका लेता है इसे भी जानना होगा. 2002 में कर्नाटक में कांग्रेस की सत्ता थी. तो राज्यसभा के चार सदस्यों के लिये चुनाव होता है. चुने जाने के लिये हर उम्मीदवार को औसत वोट 43.8 चाहिये थे. कांग्रेस के तीन उम्मीदवार जीतते हैं और 40 विधायकों को संभाले बीजेपी के एक मात्र डीके तारादेवी सिद्दार्थ हार जाते हैं. क्योंकि बीजेपी को हराने के लिये कांग्रेस जेडीएस के साथ मिलकर निर्दलीय उम्मीदवार विजयमाल्या को जीता देती है.

Punya Prasun Bajpai article on election and leader
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और मजे की बाज तो ये भी होती है कि बीजेपी के चार विधायक भी तब बिक जाते हैं. यानी रिजल्ट आने पर पता चलता है कि विजयमाल्या को 46 वोट मिल गये. यानी दो वोट ज्यादा. और तब अखबारों में सुर्खियां यही बनती है कि करोडों का खेल कर विजय माल्या संसद पहुंच गये. तब हर विधायक के हिस्से में कितना आया इसकी कोई तय रकम तो सामने नहीं आती है लेकिन 25 करोड रुपये हर विधायक के आसरे कर्नाटक के अखबार विश्लेषण जरुर करते हैं. आप सोच सकते हैं कि 2002 में 46 वोट पाने के लिये 25 करोड़ के हिसाब से 11 अरब 50 करोड रुपये जो बांटे गये होंगे, वह कहां से आये होंगे और फिर उसकी वसूली संसद पहुंच कर कैसे विजय माल्या ने की होगी. क्योंकि वाजपेयी सरकार के बाद जब मनमोहन सिंह की सरकार बनती है और उड्डयन मंत्रालय एनसीपी के पास जाता है.

Punya Prasun Bajpai article on election and leader
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प्रफुल्ल पटेल उड्डयन मंत्री बनते हैं और तब विजय माल्या उड्डयन मंत्रालय की समिति के स्थायी सदस्य बन जाते हैं. और अपने ही धंधे के ऊपर संसदीय समिति का हर निर्णय कैसे मुहर लगाता होगा, ये बताने की जरुर नहीं है. और उस दौर में किगंफिशर की उड़ान कैसे आसामान से उपर होती है, ये कोई कहां भूला होगा. पर बात यही नहीं रुकती . 2010 में फिर से कर्नाटक से 4 राज्यसभा सीट खाली होती हैं. इस बार सत्ता में बीजेपी के सरकार कर्नाटक में होती है. और औसत 45 विधायकों के वोट की जरुरत चुने जाने के लिये होती है. बीजेपी के दो और कांग्रेस का एक उम्मीदवार तो पहले चरण के वोट में ही जीत जाता है. पर चौथे उम्मीदवार के तौर पर इस बार कांग्रेस का उम्मीदवार फंस जाता है. क्योंकि कांग्रेस के पास 29 वोट होते हैं. बीजेपी के पास 26 वोट होते है . और 27 वोट जेडीएस के होते हैं.

Punya Prasun Bajpai article on election and leader
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जेडीएस सीधे करोडों का सौदा एकमुश्त करती है. तो 5 निर्दलीय विधायक भी माल्या के लिये बिक जाते हैं. और 13 वोट बीजेपी की तरफ से पड़ जाते हैं. यानी 2002 की सुई काग्रेस से घुम कर 2010 में बीजेपी के पक्ष में माल्या के लिये घुम जाती है. फिर कर्नाटक के अखबारों में खबर छपती है करोडों-अरबों का खेल हुआ है. इसबार रकम 25 करोड से ज्यादा बतायी जाती है. यानी 2002 की साढे ग्यारह अरब की रकम 20 अरब तक बतायी जाती है. तो फिर ये रकम कहां से विजय माल्या लाये होंगे और जहां से लाये होंगे, वहां वापस रकम कैसे भरेंगे. ये खेल संसद में रहते हुये कोई खुले तौर पर खेलता है. इस दौर में आफशोर इन्वेस्टमेंट को लेकर जब पनामा पेपर और पैराडाइड पेपर आते है तो उसमें भी विजय माल्या का नाम होता है. यानी एक लंबी फेरहिस्त है माल्या को लेकर. लेकिन देश जब नये सवाल में जा उलझा है कि संसद में 1 मार्च 2016 को विजयमाल्या लंदन भागने से पहले वित्त मंत्री से मिले या नहीं? या क्या वह वाकई कह रहे थे कि वह भाग रहे हैं, पीछे सब देख लेना. और पीछे देखने का सिललिसा कैसे होता है, ये पूरा देश देख समझ सकता है.

Punya Prasun Bajpai article on election and leader
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लेकिन आखिरी सवाल तो यही है कि जिस संसद में 218 सांसद दागदार हैं, उसी संसद के एक पूर्व सदस्य से अरबों रुपये लेकर कर्नाटक की सियासत और देश की संसद अगर 2002 से लेकर 2016 तक चलती रही तो यह क्यो ना मान लिया जाये कि संसद ऐसे ही चलती है और अरबों रुपये लुटाकर जो संसद पहुंचेगा वह देश को नहीं तो किसे लुटेगा.

(लेखक जाने माने पत्रकार हैं, यह लेख उनके फेसबुक वॉल से लिया गया है)

शर्मनाकः RSS के दीनदयाल उपाध्याय की मूर्ती लगाने के लिये उखाड़ दी स्वतंत्रता सेनानी पंडित नेहरू की प्रतिमा

RSS ke Deendayal Upadhyaya ki murti lagane ke liye ukhad diye pandit nhairu ki prathima

इलाहाबाद – नेहरू-गांधी परिवार के पैतृक शहर इलाहाबाद में आज देश के पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरू की मूर्ति को क्रेन के जरिये जबरन हटाए जाने पर जमकर हंगामा मचा. नेहरू की यह मूर्ति उनके पैतृक आवास आनंद भवन के बाहर से महज इसलिए हटाई गई क्योंकि पड़ोस में लगी जनसंघ के अध्यक्ष रहे पंडित दीन दयाल उपाध्याय के मूर्ति स्थल का विस्तार किया जाना था.

RSS ke Deendayal Upadhyaya ki murti lagane ke liye ukhad diye pandit nhairu ki prathima

दीनदयाल उपाध्याय के मूर्ति स्थल के विस्तार के लिए पंडित नेहरू की मूर्ति पर रस्सी और बोरियां बांधकर क्रेन के जरिये हटाया गया जिसके बाद कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने हंगामा शुरू कर दिया. कांग्रेस कार्यकर्ताओं की नाराज़गी नेहरू के मूर्तिस्थल को जूते और चप्पल पहने हुए मजदूरों से तोड़वाए जाने पर ज़्यादा रही.

RSS ke Deendayal Upadhyaya ki murti lagane ke liye ukhad diye pandit nhairu ki prathima

हटाई गई पंडित नेहरू की मूर्ति साल 1995 में लगाई गई थी, जिसका उदघाटन तत्कालीन गवर्नर मोतीलाल बोरा ने किया था. पंडित दीन दयाल उपाध्याय की मूर्ति साल 1991 में लगाई गई थी, जिसके उद्घाटन समारोह में यूपी के तत्कालीन सीएम कल्याण सिंह, बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष डा. मुरली मनोहर जोशी और नेता बीजेपी संसदीय दल लाल कृष्ण आडवाणी ने किया था. पंडित नेहरू की हटाई गई मूर्ति को शाम को पड़ोस में ही एक जगह पर शिफ्ट कर दिया गया।

RSS ke Deendayal Upadhyaya ki murti lagane ke liye ukhad diye pandit nhairu ki prathima

कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने क्रेन को रोककर योगी सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की और उस पर बदले की भावना और भेदभाव के साथ काम करने का आरोप लगाया. हंगामा करने वाले कांग्रेस नेताओं का कहना है कि बीजेपी की सरकारें महापुरुषों की मूर्तियों का लगातार अपमान कर रही है. इलाहाबाद में आनंद भवन के बाहर से नेहरू की मूर्ति को अपमानजनक तरीके से हटाया जाना एक विचारधारा को ख़त्म किये जाने की साजिश है, जिसे कतई बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और इसके खिलाफ शुक्रवार से आंदोलन की शुरुआत की जाएगी.

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नेहरू की मूर्ति को क्रेन से जबरन हटाए जाने की घटना के दौरान सैकड़ों की तादात में तमाशबीनों की भीड़ जुटी रही. नेहरू की इसहटाई गई मूर्ति को पड़ोस में ही दूसरी जगह लगाया जाएगा. इस बारे में सरकारी अमला कैमरे पर कुछ भी बोलने से साफ़ बचता नजर आया. अफसरों की दलील है कि चौराहे के सौंदर्यीकरण की वजह से ऐसा करना ज़रूरी था. हालांकि उनके पास इस बात का कोई जवाब नहीं है कि सौंदर्यीकरण के लिए दीनदयाल उपाध्याय के मूर्ति स्थल और बीजेपी सांसद श्यामाचरण गुप्ता के बंगले से कोई छेड़छाड़ क्यों नहीं की गई.

RSS ke Deendayal Upadhyaya ki murti lagane ke liye ukhad diye pandit nhairu ki prathima

इलाहाबाद में पंडित नेहरू के पैतृक आवास आनंद भवन से महज सौ मीटर की दूरी पर बालसन चौराहे पर तीन अलग-अलग पार्कों में राष्ट्रपिता महात्मा गांधी, देश के पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरू और जनसंघ के अध्यक्ष रहे पंडित दीन दयाल उपाध्याय की मूर्तियां लगी हैं. कुंभ मेले के मद्देनजर इलाहाबाद में इन दिनों चौराहों के सौंदर्यीकरण और चौड़ीकरण का काम चल रहा है. विकास प्राधिकरण ने बालसन चौराहे पर पंडित दीन दयाल उपाध्याय के मूर्ति स्थल को बढ़ाकर उसे नेहरू के मूर्ति स्थल तक बढ़ाने का प्रस्ताव तैयार किया है. इसके बाद की जगह पर सड़क बनाकर रास्ता तैयार किया जाएगा.

प्राधिकरण ने इसके लिए ही बृहस्पतिवार को दोपहर में नेहरू की मूर्ति को हटाने का काम शुरू किया. इसके लिए जो तरीका अपनाया गया, उस पर भी सवाल उठ रहे हैं. सम्मानजनक तरीके से मूर्ति हटाए जाने के बजाय उसे चेहरे के साथ बोरे में लपेट दिया गय।

लोकसभा चुनावों में अपने पिता के खिलाफ लड़ेंगी रामविलास पासवान की बेटी

Ramvilas Paswan daughter Asha Paswan says will fight against him in loksabha election from RJD ticket

लोक जनशक्ति पार्टी के अध्यक्ष और केंद्रीय मंत्री रामविलास पासवान की बेटी आशा पासवान ने गुरुवार को घोषणा की कि अगर अगले लोकसभा चुनावों में उन्हें राष्ट्रीय जनता दल से टिकट मिलता है तो वो अपने पिता के खिलाफ चुनाव में खड़ी होंगी.

रामविलास पासवान बिहार के हाजीपुर संसदीय सीट से सांसद हैं और यहीं से उनकी बेटी उनका मुकाबला करने की बात कर रही हैं.

टाइम्स ऑफ इंडिया की खबर के मुताबिक, आशा पासवान ने अपने पिता पर बेटे-बेटियों में भेदभाव करने का आरोप लगाते हुए कहा कि उनके पिता ने उनके भाई चिराग पासवान और उनमें हमेशा भेदभाव किया है. उनका कहना था कि ‘मुझे हमेशा नजरअंदाज किया गया. चिराग को उन्होंने एलजेपी का नेता बना दिया. आज वो जमुई के सांसद हैं. अगर आरजेडी मुझे टिकट देती है तो मैं हाजीपुर से लडूंगी.’

उन्होंने कहा कि लालू प्रसाद यादव उनके चाचा जैसे हैं और तेजस्वी यादव और तेजप्रताप यादव उनके कजिन हैं.

बता दें की रामविलास पासवान ने दो शादी की है. उनकी पहली बीवी राजकुमारी देवी से उनको एक बेटी और दूसरी बीवी रीना से एक बेटी और बेटा है. उन्होंने 1981 में अपनी पहली बीवी को तलाक दे दिया था.

आशा पासवान अपने पति अनिल साधु के साथ पटना में रहती हैं. दिलचस्प बात ये है कि पिछले बुधवार को साधु खुद पासवान के खिलाफ लड़ने की बात कर चुके हैं. वो पहले एलजेपी में थे लेकिन हाल ही में उन्होंने आरजेडी जॉइन किया है. उन्होंने कहा था कि पासवान के खिलाफ या तो वो खड़े होंगे या उनकी बीवी आशा.

रामविलास पासवान पर अकसर ही परिवारवाद के आरोप लगते हैं. उनके बेटे चिराग पासवान के अलावा उनके छोटे भाई पशुपति कुमार पारस एलजेपी के बिहार अध्यक्ष हैं. भतीजे प्रिंस राज पार्टी के स्टूडेंट विंग के अध्क्ष और दूसरे भाई रामचंद्र पासवान सांसद हैं.

Source: hindi.firstpost.com

जिस विजय माल्या पर करोड़ों का कर्ज़ है उसे जेटली ने विदेश भागने से रोका क्यों नहीं? दाल में कुछ तो काला है : कीर्ति आजाद

Kirti Azad ask question to Arun Jaitley

भारतीय बैंकों का हज़ारों करोड़ रूपए लेकर भागे उद्योगपति विजय माल्या ने बुधवार को बड़ा खुलासा करते हुए ब्रिटिश कोर्ट के बाहर मीडिया से कहा कि “वो भारत छोड़ने से पहले वित्त मंत्री अरुण जेटली से मिले थे।“

माल्या के इस बयान के बाद मोदी सरकार और खासकर वित्त मंत्री अरुण जेटली सवालों के घेरे में गए हैं। अरुण जेटली और मोदी सरकार को बैंकों का पैसा लेकर भाग रहे उद्योगपतियों को विदेश भागने को लेकर संदेह की नजर से देखा जा रहा है।

अब तक केंद्र सरकार पर विजय माल्या को भगाने का आरोप लग रहा था। लेकिन ये बयान देकर माल्या ने सभी आरोपों को सच में बदल दिया है।

इस मामले के सामने आने के बाद विपक्ष के साथ में खुद बीजेपी के नेता अरुण जेटली पर हमलावर है। भाजपा सांसद कीर्ति आजाद ने ट्वीट करके कहा है कि, “जब जेटली विजय माल्या से मिले तो फिर क्या हुआ?

जब अरुण जेटली को मालूम था कि विजय माल्या लंदन जा रहा है और उसके ऊपर करोड़ों का कर्ज़ है तो फिर जेटली ने ईडी और सीबीआई जैसे एजेंसियों को इसकी सूचना क्यों नहीं दी?”

कीर्ति आजाद ने वित्त मंत्री अरुण जेटली से सवाल पूछा कि, “माल्या को विदेश भागने से रोका क्यों नहीं? दाल में काला है या फिर पूरी दाल काली है? मामला गड़बड़ है।”

केंद्र सरकार पर इससे पहले भी माल्या की मदद करने के आरोप लग चुके हैं। आरोप है कि केंद्र सरकार सीबीआई का इस्तेमाल कर माल्या के खिलाफ लंदन के कोर्ट में चल रहे मामले को कमज़ोर कर रही है।

जिन धाराओं के अंतर्गत मुकदमा दायर किया गया है और जिस तरह सबूत कोर्ट में पेश किये जा रहे हैं वो मामले को कमज़ोर कर रहे हैं।

बता दें, कि विजय माल्या पर भारतीय बैंकों का 9,990 करोड़ रुपिए का कर्ज़ बकाया है जिसे बिना चुकाए वो भारत छोड़कर इंग्लैंड भाग गए थे।

Source: boltaup.com

DUSU मतगणना स्थगित किए जाने पर बोले आप नेता- जो EVM एक यूनिवर्सिटी का चुनाव नहीं करा पाया वो देश का चुनाव कैसे कराएगा

DUSU elections postponed due to EVM fault aap leader raised question on EVM

दिल्ली विश्वविद्यालय छात्रसंघ चुनाव में हो रही मतगणना ईवीएम में गड़बड़ी के चलते आज के लिए स्थगित कर दी गई है। बताया जा रहा है कि जब मतगणना स्थगित की गई तब एनएसयूआई के सन्नी छिल्लर अध्यक्ष पद पर और एनएसयूआई के ही आकाश चौधरी सेक्रेटरी पद पर आगे चल रहे थे।

एनएसयूआई के सदस्यों ने आरोप लगाते हुए कहा कि एबीवीपी अध्यक्ष पर पीछे चल रही है इसलिए प्रशासन रिजल्ट में छेड़छाड़ की कोशिश कर रहा है। बता दें कि मतगणना की शुरुआत ही बाधाओं के साथ हुई।

पहले तो मतगणना एक घंटे देर से शुरू हुई। बाद में डूसू के काउंटिंग सेंटर पर ईवीएम में गड़बड़ी को लेकर विवाद हो गया। छात्रों के बीच झड़प हुई। मतगणना केंद्र पर शीशे के दरवाजे तोड़े गए और जमकर हंगामा काटा गया।

डूसू इलेक्शन ऑफिसर ने कहा कि दिल्ली यूनिवर्सिटी छात्र संघ चुनाव की मतगणना ईवीएम में गड़बड़ी और छात्रों के हंगामे के कारण स्थगित कर दी गई है। उन्होंने बताया कि मतगणना की तारीख का ऐलान अब बाद में किया जाएगा।

इस मामले के सामने आने के बाद आप नेता विपिन राठौर ने ईवीएम पर सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने कहा कि जो ईवीएम एक विश्वविद्यालय का चुनाव नहीं करा पाया वो लोकसभा का चुनाव कैसे कराएगा।

उन्होंने ट्वीट कर लिखा, “जो एक विश्वविद्यालय का चुनाव जीतने के लिए लोकतंत्र व लोकतांत्रिक व्यवस्था को तार-तार कर सकता है वो लोकसभा चुनाव में क्या करेंगा अंदाजा लगाना सहज है और हाँ जब एक विश्वविद्यालय का चुनाव EVM से नहीं हो पाया तो देश का चुनाव क्या खाक होगा”।

बता दें कि बुधवार को हुए दिल्ली विश्वविद्यालय छात्रसंघ चुनाव में करीब 44.46 प्रतिशत वोटिंग हुई। मतदान शांतिपूर्ण हुआ। कॉलेजों में 52 केंद्रों पर वोट डाले गए। डीयू में 1.35 लाख छात्र हैं। 23 उम्मीदवारों ने चुनाव लड़ा। चुनाव के लिए करीब 700 इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनें लगाई गईं थीं।

 

Source: boltaup.com

अमित शाह का अवैध आप्रवासन मुद्दा चुनाव के समय के लिए राजनीति भाषणबाजी का कला है

Amit Shah's illegal immigration rhetoric poll time gimmick

राजस्थान में मतदान के दौरान, बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह ने एक बार फिर असम में नागरिकों के राष्ट्रीय रजिस्टर (एनआरसी) अभ्यास का बचाव किया और सभी बांग्लादेशी घुसपैठियों को निष्कासित करने की कसम खाई। इसे याद किया जाएगा कि जुलाई में जारी एनआरसी की अंतिम मसौदा सूची में 40 लाख लोग शामिल थे। लेकिन बाद की रिपोर्टों ने कई मामलों पर प्रकाश डाला जहां एक ही परिवार के सदस्यों को उनके एनआरसी अनुप्रयोगों के लिए अलग-अलग प्रतिक्रिया मिली। इसने अभ्यास की गुणवत्ता पर सवाल उठाए हैं। हालांकि, शाह कांग्रेस से लड़ रहे हैं – जिसने एनआरसी के कमजोर निष्पादन की आलोचना की है – और इसके वोट बैंक को बचाने के बाद आरोप लगाया है।

फिर भी, तथ्य यह है कि कोई भी नहीं जानता कि प्रक्रिया के अंत में घोषित अवैध आप्रवासियों के साथ क्या होगा। शाह के कहने के बावजूद, बांग्लादेश को निर्वासन एक विकल्प नहीं है क्योंकि वह देश 1972 से भारत में किसी भी बड़े पैमाने पर आउटबाउंड प्रवास को मान्यता नहीं देता है। और कुछ महीनों में बांग्लादेश में चुनाव के साथ, भारतीय स्थिति को स्वीकार करने के लिए ढाका में किसी भी शासन के लिए आत्मघाती होगा। इसके अलावा, नई दिल्ली अच्छी तरह से ढाका के साथ इस मुद्दे को मजबूर नहीं करेगी। हाल के दिनों में भारत-बांग्लादेश संबंध उत्कृष्ट रहे हैं और अवैध आप्रवासन दर्शक को उठाकर बांग्लादेश नेपाल के रास्ता देख सकते हैं।

इसलिए, यह स्पष्ट है कि शाह एनआरसी के साथ पहचान राजनीति खेल रहे हैं। शाह के पुनरावृत्ति ने यह पुष्टि की है कि सरकार का नागरिकता (संशोधन) विधेयक 2016 पड़ोसी देशों से हिंदुओं को नागरिकता प्रदान करेगा – एक प्रावधान जो आगे प्रवास और आगे बढ़ने के लिए प्रेरित हो सकता है, उन अदालतों में चुनौती दी जा सकती है जहां इसकी संवैधानिकता का परीक्षण किया जाएगा। आरक्षण के लिए अकिन, अवैध घुसपैठियों को निष्कासित करना राजनीतिक रूप से सही राजनीति है जो जमीन पर कुछ भी हल नहीं करेगा। एकमात्र व्यावहारिक पाठ्यक्रम बांग्लादेश के साथ उस देश से भविष्य में प्रवास को रोकने के लिए काम करना है।

 

Source: hindi.siasat.com

क्या एससी/एसटी ऐक्ट के अपने ही अजेंडे में फंस गई बीजेपी!

Is the BJP stuck in its own agenda of the SC ST Act

सोशल मीडिया में बड़ा कैम्पेन ‘नोटा’ को लेकर चलाया जा रहा है। कहा जा रहा है कि एससी/एसटी कानून की मुखालिफ जातियां मतदान केंद्र तक जाएं, अगर उन्हें लगता है कि बीजेपी के खिलाफ वह किसी दूसरी पार्टी को वोट नहीं दे सकती हैं तो ‘नोटा’ का बटन दबा दें।

कहा जा रहा है कि इस कैम्पेन का सीधा नुकसान बीजेपी को होगा लेकिन इस अभियान की काट के लिए बीजेपी का आईटी सेल काफी सक्रिय हो गया है। वह इस अभियान को बेअसर करने में जुट गया है।

‘प्रॉक्सी वॉर’ भी शुरू हो गया है। जातियों के झगड़े में उलझे हिंदू समाज के लिए सोशल मीडिया पर एक संदेश बहुत तेजी के साथ वायरल हो रहा है- ‘जातियों के झगड़े में अगर मोदी जी को 2019 में हरा दिया तो याद रखना कि उसके बाद जाति तो क्या, धर्म भी बताना मुश्किल हो जाएगा।’ बीएसपी तो ‘नोटा कैम्पेन’ का भी बीजेपी की रणनीति का हिस्सा मानती है।

पार्टी का कहना है कि बीजेपी यह नहीं चाहती है कि उससे नाराज वोटर उसकी मुखालिफ पार्टियों के साथ खड़ा हो, इस वजह से बीजेपी ने साजिशन सोशल मीडिया पर यह कैम्पेन चलवाया है।

बीजेपी के लिए जोखिम दोनों ही हालात में था। अगर वह इस कानून को नरम होने देती, तो एकमुश्त चौथाई आबादी को खिलाफ कर लेती। ऐसे में बीजेपी ने कम खतरे वाली स्थिति के साथ जाना पसंद किया है।

बीजेपी के एक सीनियर लीडर ने एनबीटी से बातचीत में माना भी कि पार्टी को दोनों ही हालात में लड़कर ही बाहर आना पड़ता। इसलिए यह कहना जल्दबाजी होगी कि बीजेपी अपनी रणनीति में फंस गई है।

(स्रोत: नवभारत टाइम्स)

 

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मोदी जी को अब ‘हिंदू-मुसलमान’ का झगड़ा नहीं जितवा सकता क्योंकि काठ की हांडी बार-बार चूल्हे पर नहीं चढ़तीः कांग्रेस नेता

Congress spokesperson shakeel ahmad says bjp will lose 2019 elections due to various factors

बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह जहां बीजेपी को आगामी लोकसभा चुनाव में 2014 से भी ज्यादा सीटें मिलने का दावा कर रहे हैं, वहीं कांग्रेस उनके इस दावे के उलट 2019 में बीजेपी की हार की बात कहती नज़र आ रही है।

कांग्रेस के राष्ट्रीय प्रवक्ता शकील अहमद ने न्यूज़ एजेंसी एएनआई से बातचीत में कहा कि बीजेपी को अब बांग्लादेश-पाकिस्तान, शमशान-क़ब्रिस्तान और हिन्दु-मुसलमान का झगड़ा नहीं जितवा सकता।

उन्होंने कहा कि काठ की हांडी बार-बार चूल्हे पर नहीं चढ़ती। यानी अब इन सब बेकार के मुद्दों से बीजेपी जनता को गुमराह नहीं कर सकती।

कांग्रेस नेता ने कहा कि 2019 में बीजेपी की हार के कई कारण होंगे। मोदी सरकार अपने शासनकाल में सभी मोर्चों पर नाकाम साबित हुई है। सरकार नौजवानों को रोज़गार देने में नाकाम रही, किसानों की बदहाली के लिए भी मोदी सरकार ज़िम्मेदार है।

उन्होंने कहा कि मोदी सरकार सीमा सुरक्षा के मुद्दे पर भी पूरी तरह नाकाम रही है। चीन और पाकिस्तान आए दिन सीमा पर सीज़फायर का उल्लंघन कर रहे हैं। सीमा पर हमारे जवान मारे जा रहे हैं।

गोरखपुर के बीआरडी मेडिकल कॉलेज में हुई बच्चों की मौत का ज़िक्र करते हुए शकील अहमद ने कहा कि ऑक्सीजन के बिना सैकड़ों बच्चों की मौत भी बीजेपी की हार का कारण होगी।

इसके साथ ही कांग्रेस नेता ने राफ़ेल और नोटबंदी को घोटाला बताते हुए कहा कि मोदी सरकार के शासनकाल में राफ़ेल और नोटबंदी जैसे बड़े घोटाले हुए, जो बीजेपी की हार का करण बनेंगे।

बता दें कि इससे पहले भारतीय जनता पार्टी की दो दिवसीय राष्ट्रीय कार्यकारिणी बैठक में अमित शाह ने दावा किया था कि बीजेपी को आगामी लोकसभा चुनाव में 2014 से भी ज्यादा सीटें मिलेंगी। उन्होंने बैठक में अजेय भाजपा का नारा भी दिया था।

 

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रुपये के गिरने पर मनमोहन सिंह को कमज़ोर प्रधानमंत्री कहने वाले मोदी आज खुद देश के सबसे कमज़ोर PM हो गए हैंः कांग्रेस नेता

Shakti Sinh Gohil slams Modi govt over price hike in Petrol Diesel

पेट्रोल-डीज़ल की बढ़ती कीमत और डॉलर के मुकाबले रुपए में आई गिरावट को लेकर विपक्ष लगातार सत्ताधारी मोदी सरकार पर हमलावर है। इसी कड़ी में अब बिहार कांग्रेस के प्रभारी शक्ति सिंह गोहिल ने इस मुद्दे पर पीएम मोदी के पुराने बयान को याद करते हुए उनपर निशाना साधा है।

उन्होंने न्यूज़ एजेंसी एएनआई से बातचीत में कहा कि पीएम मोदी को अपने पुराने वीडियोज़ देखने चाहिए। जिसमें वह पेट्रोल-डीज़ल के बढ़ते दामों और रुपए के गिरते स्तर लिए सरकार को ज़िम्मेदार ठहराते हुए तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को कमज़ोर बताया करते थे।

कांग्रेस नेता ने कहा कि आज मोदी सरकार के शासनकाल में पेट्रोल के दाम आसमान छू रहे हैं और रुपया तेज़ी से पाताल की ओर जा रहा है। लेकिन मोदी जी ख़ुद को कमज़ोर नहीं बता रहे। उनके पुराने बयानों के हिसाब से उन्हें देश का सबसे कमज़ोर प्रधानमंत्री होना चाहिए।

साथ ही शक्ति सिंह गोहिल ने यह भी कहा कि यूपीए सरकार में जब भी कच्चे तेल की कीमत अंतरराष्ट्रीय बाज़ार में बढ़ती थी तो जनता को राहत देने के लिए टैक्स कम कर दिए जाते थे। लेकिन मोदी सरकार में कच्चे तेल की कीमत कम होने के बावजूद टैक्स नहीं घटाए गए।

कांग्रेस नेता ने कहा कि अब कच्चे तेल की कीमत अंतरराष्ट्रीय बाज़ार में थोड़ी बढ़ी है तो सरकार को चाहिए कि टैक्स को कम कर दे। लेकिन सरकार ऐसा करेगी नहीं, क्योंकि उसे लगता है कि वो जो कुछ भी कर रही है वह सही है। उन्होंने कहा कि मोदी सरकार को यह अहंकार ले डूबेगा।

बता दें कि 2014 आम चुनावों से पहले नरेंद्र मोदी ने पेट्रोल-डीज़ल की बढ़ती कीमत और डॉलर के मुकाबले रुपए के गिरते स्तर को लेकर तत्कालीन यूपीए सरकार के खिलाफ़ मोर्चा खोल दिया था।

उन्होंने अपने कई बयानों में इसके लिए तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को ज़िम्मेदार ठहराते हुए उन्हें देश का सबसे कमज़ोर प्रधानमंत्री तक कह डाला था।

 

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माल्या के आरोप पर बोले राहुल – जेटली छोड़े पद, मोदी दे जांच का आदेश

Rahul Gandhi asked PM Modi to order an probe mallyas allegations

बुधवार को लंदन की वेस्टमिंस्टर मजिस्ट्रेट कोर्ट के बाहर शराब कारोबारी विजय माल्या द्वारा वित्त मंत्री अरुण जेटली से देश छोडने से पहले मुलाक़ात के बयान ने देश की राजनीति को हिला के रख दिया है। ऐसे में कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने पूरे मामले की स्वतंत्र जांच की मांग करते हुए अरुण जेटली के इस्तीफे की मांग की है।

राहुल गांधी ने ट्वीट किया, ‘विजय माल्या द्वारा लगाए गए आरोप बेहद गंभीर हैं। प्रधानमंत्री को इस मामले में तुरंत एक स्वतंत्र जांच करानी चाहिए। जब तक जांच पूरी हो, तब तक अरुण जेटली को वित्त मंत्री के पद पर नहीं रहना चाहिए।’

वहीं पार्टी प्रवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा कि माल्या के बारे में मोदी सरकार को सब कुछ पता था, बावजूद इसके उसे देश से फरार होने क्यों दिया गया? सिंघवी ने कहा, ‘कांग्रेस लगातार कहती आ रही है विजय माल्या, नीरव मोदी और कई अन्य लोगों को जानबूझकर बाहर जाने दिया गया है। माल्या ने जो कहा है उस पर वित्त मंत्री की ओर से और स्पष्ट और व्यापक जवाब आना चाहिए।’

कांग्रेस प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला ने ट्वीट कर कहा, ‘विजय माल्या, तो श्री अरुण जेटली से मिल, विदाई लेकर, देश का पैसा लेकर भाग गया है? चौकीदार नहीं, भागीदार है!’ इसके अलावा पूर्व केंद्रीय मंत्री यशवंत सिन्हा ने बीजेपी पर निशाना साधा है। उन्होंने ट्वीट किया, ‘सिर्फ वित्त मंत्री ही नहीं, बल्कि पूरी बीजेपी को विजय माल्या के साथ अपने संबंधों की बात को स्वीकार कर लेना चाहिए’

उधर, सीपीआईएम के वरिष्ठ नेता सीताराम येचुरी ने कहा कि यह सच्चाई है, जिससे हम पहले से ही वाकिफ हैं। सरकार कितना ही खंडन करे, लेकिन यह पुष्ट है कि जितनों ने भी जनता का पैसा लोन के जरिए लूटा और फरार हो गए, ऐसा सरकार की जानकारी के बिना संभव ही नहीं है।

मध्यप्रदेश में सामने आया व्यापम से भी बड़ा ई-टेंडरिंग घोटाला, जांच का इंतजार

E tendering scam in Madhya Pradesh

भोपाल: मध्यप्रदेश में शिवराज सरकार पर व्यापम से भी बड़े एक और घोटाले का आरोप लगा है। विपक्ष ने बीजेपी सरकार के खिलाफ ई-टेंडरिंग घोटाले को लेकर मोर्चा खोल दिया है। इसकी जांच आर्थिक अपराध शाखा कर रही है। लेकिन कोई खास जानकारी फिलहाल सामने नही आई है।

5 साल में हुए कम-से-कम 10,000 करोड़ के ई टेंडर पुलिस की Economic Offence Wing (EOW) की प्रारंभिक जांच के दायरे में हैं। हालांकि महीनों से हो रही इस जांच के बाद एक भी एफआईआऱ दर्ज नहीं हो पाई है। ऐसे में ईओडब्लू को केंद्र सरकार के इंडियन कम्प्यूटर इमरजेंसी रिस्पॉन्स टीम के भोपाल आने का इंतज़ार है।

आसान शब्दों में बताया जाये तो कहने को तो टेंडर कि यह प्रक्रिया ऑनलाइन थी लेकिन इसमें बोली लगाने वाली कंपनियों को पहले ही सबसे कम बोली का पता चल जाता था। ई-टेंडर प्रक्रिया में 3000 करोड़ के घोटाले की बात सामने आ रही है, लेकिन चूंकि यह प्रक्रिया 2014 से ही लागू है जिसके तहत तकरीबन तीन लाख करोड़ रुपये के टेंडर दिए जा चुके हैं।

E tendering scam in Madhya Pradesh
E tendering scam in Madhya Pradesh

23 जून को राजगढ़ के बांध से हज़ार गांवों में पेयजल सप्लाई करने की योजना का शिलान्यास प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने किया, लेकिन उससे पहले यह बात पकड़ में आई कि ई-प्रोक्योरमेंट पोर्टल में छेड़छाड़ करके लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी यानी पीएचई विभाग के 3000 करोड़ रुपये के तीन टेंडरों के रेट बदले गए हैं।

मामला सामने आते ही, मध्यप्रदेश स्टेट इलेक्ट्रॉनिक्स डेवलपमेंट कॉरपोरेशन के उस वक्त के एमडी मनीष रस्तोगी ने पीएचई के प्रमुख सचिव प्रमोद अग्रवाल को खत लिखा और तीनों टेंडर कैंसिल कर दिए गए। मध्य प्रदेश के नेता प्रतिपक्ष अजय सिंह ने ई टेंडर घोटाले का ब्यौरा देते हुए इस साल 2 जुलाई को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को पत्र लिखकर पूरे मामले की सीबीआई या सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में उच्चस्तरीय जांच कराने की माँग की थी।

माल्या-जेटली की मुलाकात पर बोलीं प्रियंका चतुर्वेदी, ‘देश को जुमलेबाज़ी की दी गोली और लूट ली देश की तिजोरी’

Priyanka Chaturvedi target PM Modi over Mallya talk to Arun Jaitley

विजय माल्या देश छोड़ने से पहले अरुण जेटली से मिले थे। ऐसा खुद उन्होंने मीडिया से बात करते हुए बताया है। अब इस मामले पर मोदी सरकार पर सवाल उठने लगे है।

कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने पहले ये बात कहीं थी कि माल्या भारत छोड़ने से पहले वरिष्ठ भाजपा नेता से मिले थे। अब इस मामले पर कांग्रेस का शक यकीन में बदल गया है।

माल्या की जेटली से मुलाकात पर कांग्रेस प्रवक्ता प्रियंका चतुर्वेदी ने पीएम मोदी को भी इस मामले शामिल बताया है।

प्रियंका ने सोशल मीडिया पर लिखा, इस मामले में चौकीदार क्यों नहीं जवाबदेह है भागीदार बनाने के? देश को जुमलेबाज़ी की दी गोली और लूट ली देश की तिजोरी।

बता दें कि मार्च 2016, में विजय माल्या भारत छोड़कर भागे थे। उस वक़्त भी वित्त मंत्री अरुण जेटली ही थे।

वहीँ इससे पहले कोर्ट की सुनवाई के दौरान विजय माल्या ने लंदन में मौजूद सीबीआई डायरेक्ट राकेश अस्थाना से हाथ मिलाया था जिसके बाद सरकार पर आरोपों का दौर फिर से शुरू हो गया था। अब माल्या का ये बयान मोदी सरकार को खतरे में डाल सकता है।

 

Source: boltaup.com

तेलंगाना विधानसभा चुनाव: ओवैसी की पार्टी AIMIM ने उम्मीदवारों की पहली लिस्ट जारी की!

Owaisi party AIMIM released the first list of candidates

असदुद्दीन ओवैसी की अगुवाई वाली ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहाद-उल मुस्लिमीन (एआईएमआईएम) ने तेलंगाना में होने वाले आगामी विधानसभा चुनाव के लिए सात प्रत्याशियों की अपनी पहली सूची मंगलवार को जारी कर दी।

एआईएमआईएम की एक विज्ञप्ति के मुताबिक, ओवैसी के छोटे भाई अकबरूद्दीन आवैसी हैदराबाद में चंद्रयानगुट्टा विधानसभा क्षेत्र से प्रत्याशी होंगे।

घोषित किये गये अन्य प्रत्याशियों में सैयद अहमद पाशा कादरी (याकूतपुरा), मुमताज अहमद खान (चारमीनार), मोहम्मद मोअजम खान (बहादुरपुरा), अहमद बिन अब्दुल्ला बलाला (मलकपेट), जफर हुसैन मेराज (नामपल्ली) और कौसर मोइनुद्दीन (कारवां) शामिल हैं।

पिछले सप्ताह भंग किये गये तेलंगाना विधानसभा में एआईएमआईएम के सात विधायक थे। राज्य विधानसभा का चुनाव अगले साल लोकसभा चुनाव के साथ कराया जाना था।

हालांकि, टीआरएस सरकार की सिफारिश के तहत विधानसभा भंग कर दिया गया जिसके कारण निर्धारित समय से पूर्व चुनाव कराया जाना जरूरी हो गया है।

 

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सीतामढ़ी में युवक की पीट-पीटकर हत्या, तेजस्वी बोले- भीड़ हत्या समर्थक PM मोदी नीतीश को ईनाम देंगे क्या?

Tejashwi condemns Nitish Kumar after mob lynching in sitamarhi

बिहार में मॉब लिंचिंग की घटनाएं थमने का नाम ही नहीं ले रही। बेुसराय के बाद अब सीतामढ़ी में भीड़ ने एक शख्स की चोरी के आरोप में पीट-पीट कर हत्या कर दी। jf

ख़बरों के मुताबिक, रुपेश झा नाम के जिस युवक की हत्या की गई है वह रविवार को सीतामढ़ी शहर से बहन का इलाज कराने के बाद वापस लौट रहा था। तभी भीड़ ने उसे रीगा थाना के रमनगरा के किशनपुर मोड़ के पास पकड़ लिया। जिसके बाद गांव वालों ने उसपर चोरी का आरोप लगाया और उसकी बेरहमी से पिटाई कर दी।

गांव वालों ने रुपेश को लाठी डंडों से इतना मारा कि वो बेहद गंभीर रूप से जख्मी हो गया। जिसके बाद उसे अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई। पुलिस अधिकारी कुमार वीर धीरेंद्र ने मीडिया को बताया कि रुपेश की हत्या गांव वालों ने मिलकर की है। इस घटना में एक नामजद सहित 151 लोगों के खिलाफ केस दर्ज किया गया है। पुलिस मामले की तफ़तीश कर रही है।

वहीं, इस घटना के बाद बिहार के पूर्व उप मुख्यमंत्री एवं राजद नेता तेजस्वी यादव ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार पर हमला बोला है। उन्होंने ट्विटर के ज़रिए कहा, “नीतीश जी, बिहार में कल मॉब लिंचिंग की दो घटनाएँ और हुई है। सीतामढ़ी में एक युवक की भीड़ ने सरेआम पीट-पीटकर हत्या कर दी। जमुई में भी भीड़ ने एक को पीटा”।

उन्होंने सवाल खड़े करते हुए कहा, “केंद्र की मॉब लिंचिग समर्थक सरकार ने बिहार में ऐसी घटनाओं को प्रायोजित करने पर आपको ईनाम देने का वादा किया है क्या”?

बता दें कि हाल के दिनों में बिहार में मॉब लिंचिंग की ये तीसरी घटना है। इससे पहले 7 सितंबर को बेगूसराय में भीड़ ने 3 लोगों को अपहरण के शक में पीट-पीट कर मार डाला था। वहीं 08 सितंबर को सासाराम में मामूली विवाद में एक महिला को इसी तरह भीड़ ने मार डाला था।

 

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मोदी सरकार सेना में डेढ़ लाख नौकरियां खत्म करने पर कर रही विचार

Modi government is considering less1.5 lakh jobs in the army

भारतीय सेना में मोदी सरकार बड़े पैमाने पर नौकरियों में कटौती करने पर विचार कर रही हैं। सेना में हथियारों की ख़रीद का हवाला देकर अगले पांच साल में 1.5 लाख जवानों की कटौती हो सकती है। इससे बचने वाले 5 से 7 हज़ार करोड़ रुपये से हथियार खरीदे जाएंगे।

जनरल रावत की योजना के पहले चरण में सेना में अधिकारियों और जवानों की संख्या 50 हजार तक घटाई जा सकती है।मौजूदा समय में सेना का कुल बजट 1.28 लाख करोड़ रुपया है। इसमें से 83 फीसद दैनिक खर्च और वेतन में ही खप जाता है। इसके बाद सेना के पाास महज 26,826 करोड़ रुपये बचता है। डेढ़ लाख नौकरियां खत्‍म करने के बाद सेना के पास खर्च करने के लिए 31,826 से 33,826 हजार करोड़ रुपये होंगे।

Modi government is considering less1.5 lakh jobs in the army
Modi government is considering less1.5 lakh jobs in the army

बता दें कि फिलहाल सेना में करीब 13 लाख सैन्यकर्मी हैं। रक्षा मंत्रालय पहले ही सेना के लिए विभिन्न सुधारों की घोषणा कर चुका है, जिनमें करीब 57,000 अधिकारियों और अन्य कर्मियों की पुनर्तैनाती और संसाधनों का बेहतर इस्तेमाल शामिल है।

अधिकारियों ने बताया कि जवानों की कटौती का लक्ष्य सेना के प्रत्येक विभाग के पुनगर्ठन से हासिल किया जाएगा। इनमें सैन्य मुख्यालय निदेशालय, रणनीतिक प्रभाग, संचार अवस्थापना, मरम्मत विभाग, प्रशासनिक विभाग और सहायक क्षेत्र शामिल है। पैनल ने हाल के वर्षों में तंत्र में तकनीक को शामिल करने के बावजूद बहुस्तरीय पद सृजित होने पर भी चिंता जताई है।

रवीश का लेखः दस साल में यूपीए सरकार से ज़्यादा एनडीए सरकार ने चार साल में उत्पाद शुल्क चूस लिया।

Ravish Kumar article on Modi Sarkar and Manmohan Sarkar

तेल की बढ़ी क़ीमतों पर तेल मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का तर्क है कि यूपीए सरकार ने 1.44 लाख करोड़ रुपये तेल बॉन्ड के ज़रिए जुटाए थे जिस पर ब्याज की देनदारी 70,000 करोड़ बनती है। मोदी सरकार ने इसे भरा है। 90 रुपये तेल के दाम हो जाने पर यह सफ़ाई है तो इस में भी झोल है। सरकार ने तेल के ज़रिए आपका तेल निकाल दिया है।

आनिद्यो चक्रवर्ती ने हिसाब लगाया है कि यूपीए ने 2005-6 से 2013-14 के बीच जितना पेट्रोल डीज़ल की एक्साइज़ ड्यूटी से नहीं वसूला उससे करीब तीन लाख करोड़ ज़्यादा उत्पाद शुल्क एन डी ए ने चार साल में वसूला है। उस वसूली में से दो लाख करोड़ चुका देना कोई बहुत बड़ी रक़म नहीं है।

Ravish Kumar article on Modi Sarkar and Manmohan Sarkar
Ravish Kumar article on Modi Sarkar and Manmohan Sarkar

यूपीए सरकार ने 2005-2013-14 तक 6 लाख 18 हज़ार करोड़ पेट्रोलियम उत्पादों से टैक्स के रूप में वसूला। मोदी सरकार ने 2014-15 से लेकर 2017 के बीच 8, 17,152 करोड़ वसूला है। इस साल ही मोदी सरकार पेट्रोलियम उत्पादों से ढाई लाख करोड़ से ज़्यादा कमाने जा रही है। इस साल का जोड़ दें तो मोदी सरकार चार साल में ही 10 लाख से 11 लाख करोड़ आपसे वसूल चुकी होगी। तो धर्मेंद्र प्रधान की यह दलील बहुत दमदार नहीं है।

Ravish Kumar article on Modi Sarkar and Manmohan Sarkar
Ravish Kumar article on Modi Sarkar and Manmohan Sarkar

आप कल्पना करें आपने दस साल के बराबर चार साल में इस सरकार को पेट्रोलियम उत्पादों के ज़रिए टैक्स दिया है। जबकि सरकार के दावे के अनुसार उसके चार साल में पचीस करोड़ से ज़्यादा लोगों ने गैस सब्सिडी छोड़ दी है। फिर भी आपसे टैक्स चूसा गया है जैसे ख़ून चूसा जाता है। आनिन्द्यों ने अपने आंकलन का सोर्स भी बताया है जो उनके ट्विट में है।

Ravish Kumar article on Modi Sarkar and Manmohan Sarkar
Ravish Kumar article on Modi Sarkar and Manmohan Sarkar

अब ऑयल बॉन्ड की कथा समझें। 2005 से कच्चे तेल का दाम तेज़ी से बढ़ना शुरू हुआ। 25 डॉलर प्रति बैरल से 60 डॉलर प्रति बैरल तक पहुँचा। तब तेल के दाम सरकार के नियंत्रण में थे। सरकार तेल कंपनियों पर दबाव डालती थी कि आपकी लागत का दस रुपया हम चुका देंगे आप दाम न बढ़ाएँ। सरकार यह पैसा नगद में नहीं देती थी। इसके लिए बॉन्ड जारी करती थी जिसे हम आप या कोई भी ख़रीदता था। तेल कंपनियों को वही बॉन्ड दिया जाता था जिसे तेल कंपनियाँ बेच देती थीं। मगर सरकार पर यह लोन बना रहता था। कोई भी सरकार इस तरह का लोन तुरंत नहीं चुकाती है। वो अगले साल पर टाल देती है ताकि जी डी पी का बहीखाता बढ़िया लगे। तो यूपीए सरकार ने एक लाख चवालीस हज़ार करोड़ का ऑयल बॉन्ड नहीं चुकाया। जिसे एन डी ए ने भरा।

Ravish Kumar article on Modi Sarkar and Manmohan Sarkar
Ravish Kumar article on Modi Sarkar and Manmohan Sarkar

क्या एन डी ए ऐसा नहीं करती है? मोदी सरकार ने भी खाद सब्सिडी और भारतीय खाद्य निगम व अन्य को एक लाख करोड़ से कुछ का बॉन्ड जारी किया जिसका भुगतान अगले साल पर टाल दिया। दिसंबर 2017 के CAG रिपोर्ट के अनुसार 2016-17 में मोदी सरकार ने Rs.1,03,331 करोड़ का सब्सिडी पेमेंट टाल दिया था। यही आरोप मोदी सरकार यू पी ए पर लगा रही है। जबकि वह ख़ुद भी ऐसा कर रही है। इस एक लाख करोड़ का पेमेंट टाल देने से जीडीपी में वित्तीय घाटा क़रीब 0.06 प्रतिशत कम दिखेगा। आपको लगेगा कि वित्तीय घाटा नियंत्रण में हैं।

अब यह सब तो हिन्दी अख़बारों में छपेगा नहीं। चैनलों में दिखेगा नहीं। फ़ेसबुक भी गति धीमी कर देता है तो करोड़ों लोगों तक यह बातें कैसे पहुँचेंगी। केवल मंत्री का बयान पहुँच रहा है जैसे कोई मंत्र हो।

(लेखक जाने माने पत्रकार एंव एंकर हैं, यह लेख उनके फेसबुक पेज से लिया गया है)

भारतीय अर्थव्यवस्था को बर्बाद कर देने के बाद यदि अमित शाह सोचते हैं कि भाजपा 50 सालो तक राज करेगी तो इसका बड़ा कारण……

Girish Malviya article on Modi and Shah

गिरीश मालवीय

बीते रोज़ सोमवार को दोपहर 12 बजकर 30 मिनट पर रुपया डॉलर के मुकाबले 72.67 पर पहुंच गया दरअसल इस साल डॉलर के मुकाबले रुपया 11 प्रतिशत से ज्यादा टूट चुका है रुपये को इस गिरती हालत से बचाने के लिए आरबीआई अभी तक करीब 22 बिलियन डॉलर का फॉरेक्स रिजर्व का इस्तेमाल कर चुका है लेकिन हालात अभी नहीं सुधरे हैं।

इस गिरते हुए रुपये से भारतीय अर्थव्यवस्था को बहुत नुकसान झेलना पड़ रहा है स्टेट बैंक ऑफ इंडिया के आंकड़ों से यह तथ्य सामने आया है कि रुपये के अवमूल्यन के कारण भारत को विदेशी कर्ज चुकाने में 68,500 करोड़ रुपये अतिरिक्त खर्च करने पड़ेंगे यह लघु अवधि में चुकाए जाने वाले कर्ज हैं जिन्हें अगले कुछ महीनों में वापस किया जाना है।

इस दरमियान कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें ऐसी ही है जैसा कहा जाता है कि ‘एक तो दुबले ऊपर से दो आषाढ़’ , एसबीआई के मुख्य आर्थिक सलाहकार सौम्य कांति घोष का मानना है कि अगर कच्चे तेल की अंतरराष्ट्रीय कीमत औसतन 76 डॉलर प्रति बैरल रहती है तो देश का तेल आयात बिल 45,700 करोड़ रुपये बढ़ जाएगा।

बैंकों की हालत बढ़ते एनपीए के कारण पहले ही खराब है नोटबन्दी और जल्दबाज़ी में लागू की गयीं जीएसटी ने छोटे और मध्यम श्रेणी के उद्योगों पर गहरी मार मारी है असंगठित क्षेत्र पूरी तरह से बर्बाद हो गया है भारतीय अर्थव्यवस्था को इस कदर बर्बाद कर देने के बाद भाजपा यदि अब भी सोचती हैं कि 2019 में जीतने के बाद वह 50 सालो तक राज करेगी। तो इसका बड़ा कारण कमजोर विपक्ष भी है।

(लेखक आर्थिक मामलों के जानकार एंव स्वतंत्र टिप्पणीकार हैं)

जम्मू-कश्मीर: महबूबा मुफ्ती ने भी किया स्थानीय निकाय और पंचायत चुनाव का बहिष्कार!

Mehbooba Mufti also boycotted local bodies and panchayat elections

पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (PDP) ने सोमवार को जम्मू एवं कश्मीर में आगामी नगर निगम और पंचायत चुनावों का बहिष्कार करने की घोषणा की। पार्टी ने इसके साथ ही सरकार को असुरक्षा के इस माहौल में चुनाव कराने के निर्णय की समीक्षा करने को कहा है।

पीडीपी प्रमुख महबूबा मुफ्ती ने कहा, “हमारे सिर पर अनुच्छेद 35ए की तलवार लटके रहने के कारण राज्य के लोगों में असुरक्षा की भावना है। पार्टी ने चुनावों से दूर रहने का फैसला सर्वसम्मति से किया है।”

उन्होंने कहा, “हमारी पार्टी चुनाव नहीं लड़ेगी, क्योंकि मौजूदा हालात ऐसे कार्य के लिए मुफीद नहीं है।” मुफ्ती ने कहा, “सरकार धारा 35-ए की रक्षा करने की इच्छुक नहीं है और लोगों में इसे लेकर असुरक्षा की भावना है। पार्टी इसलिए सरकार से आग्रह करती है कि वह इस समय चुनाव कराने के फैसले की समीक्षा करे।”

बारामुला विधानसभा का प्रतिनिधित्व करने वाले पीडीपी के असंतुष्ट विधायक जावेद बेग भी बैठक में उपस्थित थे। लेकिन पांच अन्य पीडीपी विधायक हसीब द्राबू, इमरान अंसारी, आबिद अंसारी, अब्दुल मजीद पद्दर और अब्बास वानी बैठक में शामिल नहीं हुए।

राज्यपाल सत्यपाल मलिक ने शहरी स्थानीय निकाय चुनाव एक से पांच अक्टूबर के बीच कराने और आठ नवंबर से चार दिसंबर तक पंचायत चुनाव कराने की घोषणा की है। अनुच्छेद 35ए के अंतर्गत जम्मू एवं कश्मीर में कोई भी बाहरी व्यक्ति जमीन व संपत्ति नहीं खरीद सकता।

 

Source: hindi.siasat.com

NRC से बाहर लोगों से मताधिकार छीन लिया जायेगा, उनके देश वापस भेज दिया जायेगा- राम माधव

Franchise will be stripped out of the NRC Ram Madhav

भाजपा महासचिव राम माधव ने सोमवार को कहा कि असम में राष्ट्रीय नागरिक पंजी (एनआरसी) की अंतिम सूची में शामिल नहीं किए जाने वाले लोगों का मताधिकार छीन लिया जाएगा और उन्हें वापस उनके देश भेज दिया जाएगा।

इस बीच, भाजपा के ही नेता और असम के मुख्यमंत्री सर्वानंद सोनोवाल ने कहा कि एनआरसी को पूरे भारत में लागू किया जाए। ‘एनआरसी: डिफेंडिंग दि बॉर्डर्स, सेक्यूरिंग दि कल्चर’ विषय पर एक सेमिनार को संबोधित करते हुए सोनोवाल ने कहा कि भारत के वाजिब नागरिकों को अपनी नागरिकता साबित करने और एनआरसी की अंतिम सूची में अपना नाम शामिल कराने के लिए पर्याप्त अवसर दिया जाएगा।

‘रामभाऊ म्हलगी प्रबोधिनी’ नाम के थिंक-टैंक की ओर से आयोजित सेमिनार में सोनोवाल ने कहा, ‘‘एनआरसी सभी राज्यों में लागू की जानी चाहिए। यह ऐसा दस्तावेज है जो सभी भारतीयों का संरक्षण कर सकता है। असम में एनआरसी में शामिल नहीं किए जाने वाले लोग अन्य राज्यों में जा सकते हैं। इसलिए हमें ठोस कदम उठाना होगा।’’

असम में रह रहे वास्तविक भारतीय नागरिकों की पहचान के लिए उच्चतम न्यायालय के आदेश पर अद्यतन की जा रही एनआरसी की 30 जुलाई को प्रकाशित मसौदा सूची में 40 लाख से ज्यादा लोगों के नाम शामिल नहीं किए गए जिससे राजनीतिक विवाद पैदा हो गया।

सेमिनार में माधव ने कहा कि 1985 में हुए ‘असम समझौते’ के तहत एनआरसी को अद्यतन किया जा रहा है, जिसके तहत सरकार ने राज्य के सभी अवैध प्रवासियों का पता लगाने और उन्हें देश से बाहर निकालने की प्रतिबद्धता जाहिर की थी।

उन्होंने कहा, ‘‘एनआरसी से सभी अवैध प्रवासियों की पहचान सुनिश्चित हो सकेगी। अगल कदम ‘मिटाने’ का होगा, यानी अवैध प्रवासियों के नाम मतदाता सूची से हटा दिए जाएंगे और उन्हें सभी सरकारी लाभों से वंचित कर दिया जाएगा। इसके अगले चरण में अवैध प्रवासियों को देश से बाहर कर दिया जाएगा।’’

अवैध प्रवासियों को देश से बाहर निकाले जाने पर भारत को अंतरराष्ट्रीय आलोचना का सामना करने की स्थिति की बात कहने वालों पर निशाना साधते हुए माधव ने कहा कि बांग्लादेश भी म्यामां के साथ सक्रिय बातचीत कर रहा है ताकि लाखों रोहिंग्या लोगों को वहां से बाहर निकाला जा सके। म्यामां में अत्याचार का शिकार होने के बाद लाखों रोहिंग्या मुसलमानों ने बांग्लादेश में शरण ले रखी है।

माधव ने कहा कि दुनिया में कोई भी देश अवैध प्रवासियों को बर्दाश्त नहीं करता, लेकिन भारत राजनीतिक कारणों से अवैध प्रवासियों के लिए ‘‘धर्मशाला’’ बन गया है।

 

Source: hindi.siasat.com

भारत बंद में शामिल तेजस्वी यादव बोले- गरीबों की छाती पर अमीरों का विकास कर रही है मोदी सरकार

Tejashwi Yadav attacks on Modi govt over Petrol Diesel price hike

21 विपक्षी दलों के साथ मिलकर कांग्रेस ने आज यानी 10 सितंबर को ‘भारत बंद’ किया है। ये बदं पेट्रोल-डीजल और रसोई गैस की बढ़ती कीमतों, डॉलर के मुकाबले कमजोर होते रुपए के विरोध में किया गया है।

इस ‘भारत बंद’ का असर देशभर में देखने को मिल रहा है। उत्तर भारत के राज्यों में इसका प्रभाव सबसे ज्यादा दिख रहा है। बिहार में कांग्रेस, राजद, सीपीआई, सीपीएम, जन अधिकार पार्टी, हिंदुस्तानी अवाम मोर्चा के कार्यकर्ता सुबह से सड़क पर उतर गए।

राजद नेता और बिहार के पूर्व उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव ने ‘भारत बंद’ का समर्थन करते हुए ट्वीट किया है कि ‘पेट्रोल-डीज़ल और गैस की क़ीमतों पर मोदी जी कहते थे, मैं यह कर दूँगा, वो कर दूँगा, आकाश को धरती पर ला दूँगा। क्या हुआ मोदी जी? आप तो तेल की क़ीमतों को ही आकाश पर ले गए। अब कह रहे है 2022 तक कर दूँगा।’

मैं तो कहता हूँ मोदी जी, “तेल न मिठाई, चूल्हे धरी कड़ाही”

तेजस्वी ने अपने दूसरे ट्वीट में लिखा है ‘जो लोग कहते थे ‘मोदी जी आएँगे, विकास लाएँगे’ वो अब कहाँ है? तेल देखो तेल की क़ीमतों की धार देखो। ग़रीबों की छाती पर, अमीरों का विकास देखो।’

Source: boltaup.com

राफेल घोटालाः सुप्रीम कोर्ट के वकील का दावा, ‘राफेल डील में अनिल अंबानी को मिली 21 हजार करोड़ की दलाली’

Once again prashant bhushan exposed rafale

नई दिल्ली – राफेल डील मोदी सरकार के लिये एक के बाद एक समस्याएं खड़ी कर रही है। बीते शनिवार को देश के जाने माने वकील वकील प्रशांत भूषण ने दावा किया कि राफेल लड़ाकू विमान सौदा ‘‘इतना बड़ा घोटाला है जिसकी हम कल्पना भी नहीं कर सकते’’। प्रशांत ने आरोप लगाते हुए कहा कि आफसेट करार के द्वारा अनिल अम्बानी के रिलायंस समूह को ‘‘दलाली (कमीशन)’’ के रूप में 21,000 करोड़ रुपये मिले। उन्होंने इस सौदे से जुड़ी कथित दलाली की 1980 के दशक के बोफोर्स तोप सौदे में दी गई दलाली से तुलना की। बता दें कि अनिल अंबानी ने इससे पहले आरोप से इनकार किया था।

Once again prashant bhushan exposed rafale
Once again prashant bhushan exposed rafale

प्रशांत भूषण ने कहा कि भाजपा नेतृत्व वाली सरकार ने सिर्फ सौदे में अनिल अम्बानी की कंपनी को जगह देने के लिए राष्ट्रीय सुरक्षा से समझौता किया, भारतीय वायु सेना को बेबस छोड़ दिया। प्रशांत ने कहा, राफेल सौदा इतना बड़ा घोटाला है जिसकी कल्पना भी नहीं की जा सकती। बोफोर्स 64 करोड़ रुपये का घोटाला था जिसमें चार फीसद कमीशन दिया गया था। इस घोटाले में तो कमीशन कम से कम 30 फीसद है। अनिल अम्बानी को दिए गए 21,000 करोड़ रुपये सिर्फ कमीशन हैं, कुछ और नहीं।

राफेल सौदे के बाद लड़ाकू विमानों की आपूर्ति करने वाली फ्रांसीसी कंपनी दसाल्ट ने भारतीय कंपनियों के लिए व्यापार के सृजन के दायित्वों का पालन करने के लिए रिलायंस ग्रुप के साथ एक संयुक्त उद्यम शुरू किया। भूषण ने पूछा कि वायुसेना को 126 विमानों की जरूरत थी और उसने किस तरह अपनी जरूरत ‘‘कम की’’ और नये सौदे से तकनीक वाली उपधारा ‘‘गायब’’ होने पर सवाल किए।

प्रशान्त भूषण ने कहा कि सरकार और अम्बानी मिलकर राफेल पर झूठ बोल रहे हैं। उन्होंने ये भी कहा कि प्रधानमंत्री ने जो किया वह ‘क्रिमिनल मिसकन्डक्ट’ है। राफेल विमान सौदे में भ्रष्टाचार हुआ और दलाली खाई गई। सरकारी खजाने का कम से कम 21000 करोड़ का नुकसान हुआ। अम्बानी को यह फायदा पहुंचाया गया। यह विमान सौदा देश की सुरक्षा से जुड़ा है। असली देशभक्त इसपर सवाल उठाएंगे और असली देशद्रोही झूठ फैलाएंगे।

अमित शाह को अखिलेश का जवाब, ‘जनता अगले 50 हफ़्तों से पहले ही इनको जवाब दे देगी’

Akhilesh Yadav angry on BJP president

नई दिल्ली – भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह ने हाल ही में कहा था कि भाजपा पचास साल तक सत्ता में रहेगी। अब उनके इस बयान की आलोचना होनी शुरु हो गई है। सपा सुप्रिमो और यूपी के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने भाजपा अध्यक्ष के इस बयान को लेकर उन पर निशाना साधा है। अखिलेश ने कहा है कि जनता अगले 50 हफ़्तों से पहले ही इनको जवाब दे देगी।

सपा सुप्रिमो ने कहा कि अहंकारी कह रहे हैं कि अगले 50 साल तक भाजपा सरकार ही रहेगी. मीडिया, सांविधानिक संस्थानों व लोगों की भीड़तंत्रीय हत्याओं के बाद अब क्या ये जनता के सरकार चुनने के अधिकार की भी हत्या करेंगे, जो ऐसे तानाशाही बयान दे रहे हैं. देखियेगा जनता अगले 50 हफ़्तों से पहले ही इनको जवाब दे देगी.

अखिलेश यादव ने कहा कि नोटबंदी, जीएसटी, दलित, किसान, नारी व युवा उत्पीड़न, महँगाई, बेरोज़गारी, पेट्रोल-डीज़ल के रोज़ बढ़ते दाम, अमीरों से मुनाफ़ाख़ोरी के सौदे भाजपा के जन विरोधी कारनामे रहे हैं. अब तो जनता को ऐसा लगने लगा है कि भाजपा जनता को दुख देने और परेशान करने की एक प्रयोगशाला खोल के बैठी है.

अखिलेश उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री पर भी निशाना साधा है, उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री के लिए हर पिता ‘पितातुल्य’ होना चाहिए, उन्नाव की बलात्कार-पीड़िता का वो बेबस पिता भी जिसको उनकी पुलिस ने मार-मार कर मार डाला. इसी प्रकार हर पुत्री ‘पुत्रीतुल्य’ होनी चाहिए, वो पुत्री भी जिसे काला झंडा दिखाने पर जेल की काल कोठरी में डाला गया. यही सच्चा राजधर्म है.

पुण्यप्रसून वाजपेयी का लेखः मान लीजिए…..मोदी सरकार अर्थव्यवस्था को संभालने में विफल है..

Punya Prasun Bajpai article on Modi and economy

हो सकता है डॉलर के मुकाबले रुपये की गिरती कीमत का असर सरकार पर ना पड़ रहा हो और सरकार ये सोच रही हो कि उसका वोटर तो देशभक्त है और रुपया देशभक्ति का प्रतीक है क्योंकि डॉलर तो विदेशी करेंसी है। पर जब किसी देश की अर्थव्यवस्था संभाले ना संभले तो सवाल सिर्फ करेंसी का नहीं होता। और ये कहकर कोई सरकार बच भी नहीं सकती है कि उसके खजाने में डॉलर भरा पड़ा है । विदेशी निवेश पहली की सरकार की तुलना में कहीं ज्यादा है । तो फिर चिन्ता किस बात की। दरअसल किस तरह देश जिस रास्ते निकल पड़ा है, उसमें सवाल सिर्फ डॉलर के मुकाबले रुपये के कमजोर होने भर का नहीं है । देश में उच्च शिक्षा का स्तर इतना नीचे जा चुका है कि 40 फीसदी की बढ़ोतरी बीते तीन बरस में छात्रों के विदेश जाने की हो गई है। सिर्फ पेट्रोल-डीजल ही नहीं बल्कि कोयला खादानो को लेकर सरकार के रुख ने ये हालात पैदा कर दिए हैं कि कोयले का आयात 66 फीसदी तक बढ़ गया है । भारत में इलाज सस्ता जरुर है लेकिन जो विदेश में इलाज कराने जाने वालो की तादाद में 22 फीसदी की बढ़ोतरी हो गई है । चीनी , चावल, गेहूं , प्याज के आयात में भी 6 से 11 फीसदी तक की बढ़ोतरी हो गई है। और दुनिया के बाजार से कोई भी उत्पाद लाने या दुनिया के बाजार में जाकर पढ़ाई करने या इलाज कराने का मतलब है डॉलर से भुगतान करना।

तो सच कहां से शुरु करें। पहला सच तो शिक्षा से ही जुड़ा है । 2013-14 में भारत से विदेश जाकर पढने वाले छात्रों को 61.71 रुपये के हिसाब से डॉलर का भुगतान करना पड़ता था । तो विदेश में पढ रहे भारतीय बच्चों को ट्यूशन फीस और हास्टल का कुल खर्चा 1.9 बिलियन डॉलर यानी 117 अरब 24 करोड 90 लाख रुपये देने पड़ते थे। और 2017-18 में ये रकम बढकर 2.8 बिलियन डॉलर यानी 201 अरब 88 करोड़ रुपये हो गई । और ये रकम इसलिये बढ़ गई क्योंकि रुपया कमजोर हो गया। डॉलर का मूल्य बढ़ता गया । यानी डॉलर जो 72 रुपये को छू रहा है अगर वह 2013-14 के मूल्य के बराबर टिका रहता तो करीब तीस अरब रुपये से ज्यादा भारतीय छात्रों का बच जाता । पर यहा सवाल सिर्फ डॉलर भर नहीं है ।

सवाल तो ये है कि आखिर वह कौन से हालात हैं, जब भारतीय यूनिवर्सिटिज को लेकर छात्रों का भरोसा डगमगा गया है । तो सरकार कह सकती है कि जो पढने बाहर जाते है उन्हें वह रोक नहीं सकते लेकिन शिक्षा के हालात तो बेहतर हुये हैं। तो इसका दूसरा चेहरा विदेश से भारत आकर पढ़ने वाले छात्रों की तादाद में कमी क्यो आ गई इससे समझा जा सकता है । रिजर्व बैंक की ही रिपोर्ट कहती है कि 2013-14 में जब मनमोहन सरकार थी तब विदेश से जितने छात्र पढने भारत आते थे उससे भारत को 600 मिलियन डालर की कमाई होती थी । पर 2017-18 में ये कम होते होते 479 मिलियन डालर पर आ गई । यानी कही ना कही शिक्षा अनुरुप हालात नहीं है तो फिर डॉलर या रुपये से इतर ज्यादा बडा सवाल तो ये हो चला है कि उच्च सिक्षा के लिये अगर भारतीय बच्चे विदेश जा रहे हैं और पढाई के बाद भारत लौटना नहीं चाहते हैं तो जिम्मेदारी किसकी होगी या फिर वोट बैक पर असर नही पडता है, यह सोचकर हर कोई खामोश है।

क्योंकि आलम तो ये भी है कि अमेरिका, ब्रिटेन और आस्ट्रेलिया जाकर पढने वाले बच्चों की तादाद लाखों में बढ़ गई है । सिर्फ अमेरिका जाने वाले बच्चो की तादाद मनमोहन सरकार के आखिरी दिनों में 1,25,897 थी जो 2016-17 में बढकर 1,86,267 हो गई । इसी तरह आस्ट्रेलिया में पढ़ने वाले बच्चो की संख्या में 35 फिसदी से ज्यादा का इजाफा हो गया । 2014 में 42 हजार भारतीय बच्चे आस्ट्रलिया में थे तो 2017 में ये बढकर 68 हजार हो गये । लोकसभा में सरकार ने ही जो आंकडे रखे वह बताता है कि बीते तीन बरस में सवा लाख छात्रो को वीजा दिया गया ।

तो क्या सिर्फ डॉलर के मुकाबले रुपये की कम होती कीमत भर का मामला है । क्योंकि देश छोडकर जाने वालो की तादाद और दुनिया के बाजार से भारत आयात किये जाने वाले उत्पादों में लगातार वृद्दि हो रही है। और इसे हर कोई जानता समझता है कि डॉलर के मुकाबले रुपया कमजोर होगा तो आयल इंपोर्ट बिल बढ जायेगा । चालू खाते का घाटा बढ़ जायेगा। व्यापार घाटा और ज्यादा बढ जायेगा । जो कंपनियां आयात ज्यादा करती है उनका मार्जिन घट रहा है । विदेशी मुद्रा भंडार पर असर पड़ने लगा है क्योंकि दुनिया के बाजार में छात्रों की ट्यूशन फीस की तरह ही सरकार को भी भुगतान डालर में ही करना पडता है । और इन सब का सीधा असर कैसे महंगाई पर पड़ रहा है और सवाल मीडिल क्लास भर का नहीं है बल्कि देश में किसानों को सिंचाई तक की व्यवस्था ना पाने वाली अर्थवयवस्था या कहे इन्फ्रास्ट्रक्चर खड़ा करने के दावों के बीच का सच यही है कि 42 फीसदी किसान डीजल का उपयोग कर ट्यूबवेल से पानी निकालते है । और महंगा होता डीजल उनकी सुबह शाम की रोटी पर असर डाल रहा है । तो महंगे हालात या कहें डॉलर के मुकाबले रुपये की चिंता तब नहीं होती जब भारत स्वालंबी होता । सरकार ही जब विदेशी चुनावी फंड या विदेशी डालर के कमीशन पर जा टिकेगी तो फिर डालर की महत्ता होगी क्या ये बताने की जरुरत होनी नहीं चाहिये। और ये सवाल होगा ही कि सरकार इक्नामी संभालने में सक्षम नहीं है, क्योंकि चीन अमेरिका व्यापार युद्द में भी भारत फंसा । अमेरिकी फेडरेल बैक ने ब्याज दर बढाई तो अमेरिकी कारोबारी उत्साहित हुय़े । भारत में डालर लगाकर बैठे अमेरिकी कारोबारी ही नहीं दुनिया भर के कारोबारियों ने या कहें निवेशकों ने भारत से पैसा निकाला। वह अमेरिका जाने लगे हैं।

इससे अंतर्रष्ट्रीय बाजार में डालर की मांग लगातार बढ़ गई । यूरोपिय देशों के औसत प्रदर्शन से भी अमेरिका में निवेश और डॉलर को लगातार मजबूती मिल रही है । और इन हालातो के बीच कच्चे तेल की बढती किमतो ने भारत के खजाने पर कील ठोंकने का काम कर दिया है । यानी ये सोचा ही नहीं गया कि इक्नामी संभालने का मतलब ये भी होता है कि भारत खुद हर उत्पाद का इतना उत्पादन करें कि वह निर्यात करने लगे । तक्षशिला और नालंदा यूनिवर्सिटी के जरीये दुनिया को पाठ पढाने वाले भारत को आज विदेशी शिक्षकों तक की जरुरत पड़ गई । यानी कैसे सत्ता ने खुद को ही देश से काटकर देश से जुडे होने का दावा किया ये भी कम दिलचस्प नहीं है । लकीर महीन पर पर समझना जरुरी है कि गांव का देश भारत कैसे स्मार्ट सीटी बनाने की दिशा में बढ गया । और स्मार्ट सिटी बनाने के लिये जिस इन्फ्रस्ट्क्चर को खड़ा करने की जरुरत बनायी गई उसमें भी विदेशी कंपनियो की ही भरमार है । चीन ने अपने गांव को देखा ।

जनसंख्या के जरीये श्रम को परखा । अपनी करेंसी की कीमत को कम कर दुनिया के बाजारा को अपने उत्पाद से भर दिया । भारत ने गांव की तरफ देखा ही नहीं । खेत से फैक्ट्री कैसे जुडे । खनिज संसाधनो का उपयोग उत्पादन बढाने में कैसे लगाये । उत्पादन के साथ रोजगार को कैसे जोडें । इन हालातो को दरकिनार कर उल्टे रास्ते इकनामी को चला दिया । जिससे सरकार का खजाना बढे या कहे राजनीतिक सत्ता तले ही सारे निर्णय हो । उसकी एवज में उसी पूंजी मिले । उसी पूंजी से वह चुनाव लडे । और चुनाव लडने के लिये रास्ता इतना महंगा कर दें कि कोई सामान्य सोच ना सके कि लोकतंत्र का स्वाद वह भी चख सकता है । तो हुआ यही कि भारतीय मजदूर सबसे सस्ते हैं । जमीन मुफ्त में मिल जाती है । खनिज संपदा के मोल कौड़ियों के भाव हैं। और इसकी एवज में सत्ता सरकार को कुछ डालर थमाने होंगे। क्योंकि ध्यान दीजिये देश की संपदा की लूट बेल्लारी से लेकर झारखंड तक कैसे होती है । और तो और भारतीय कंपनिया ही लूट में हिस्सेदारी कर कैसे बहुराष्ट्रीय बन जाती है ।

सबकुछ आंखों के सामने है पर ये कोई बोलने की हिम्मत कर नहीं पाता कि राजनीतिक सत्ता ने देश की इक्नामी का बेडा गर्क कर देश के सामाजिक हालातो को उस पटरी पर ला खड़ा किया जहां जाति-धर्म का बोलबाला हो । क्योंकि जैसे ही नजर इस सच पर जायेगी कि रिजर्व बैंक को भी अब डॉलर खरीदने पड रहे है । और अपनी जरुरतों के लेकर भारत दुनिया के बाजार पर ही निर्भर हो चुका है । तो फिर अगला सवाल ये भी होगा कि चुनाव जीतने का प्रचार मंत्र भी जब गुगल , ट्विटर , सोशल मीडिया या कहें विदेशी मीडिया पर जा टिका है तो वहा भी भुगतान को डालर में ही करना पडता है । तो तस्वीर साफ होगी कि सवाल सिर्फ डॉलर की किमत बढने या रुपये का मूल्य कम होने भर का नहीं है बल्कि देश की राजनीतिक व्यवस्था ने सिर्फ तेल, कोयला, स्टील , सेव मेवा, प्याज, गेहू भर को डालर पर निर्भर नहीं किया है बल्कि एक वोट का लोकतंत्र भी डालर पर निर्भर हो चला है।

(लेखक जाने माने पत्रकार हैं, यह लेख उनके फेसबुक वॉल से लिया गया है)

पेट्रोल पर दोगुना और डीजल पर चार गुना ज्यादा टैक्स वसूली कर रहे हैं मोदी, महंगे कच्चे तेल पर भी सस्ता पेट्रोल डीजल देते थे मनमोहन

Statistics shows Modi govt is imposing more tax than Manmohan govt

कांग्रेस तथा अन्य विपक्षी दलों ने 10 सितंबर को भारत बंद का ऐलान किया है। ये बदं पेट्रोल-डीजल और रसोई गैस की बढ़ती कीमतों, डॉलर के मुकाबले कमजोर होते रुपए के विरोध में किया गया है। कांग्रेस का दावा है कि आज के भारत बंद में 21 विपक्षी दल उसका साथ दे रहे हैं।

ये हैं वो विपक्षी दल –

शरद पवार की NCP, एमके स्टालिन की DMK, पूर्व प्रधानमंत्री एचडी देवेगौड़ा की JD(S), राज ठाकरे की महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (MNS), शरद यादव की लोकतांत्रिक जनता दल, RJD, जीतन राम मांझी की हिंदुस्तानी अवाम मोर्चा (हम), BSP, CPI, CPM. इसके अलावा कई व्यापार संगठनों और मदजूर संगठनों का भी समर्थन मिला है।

वही कई ऐसे भी विपक्षी दल हैं जो कांग्रेस के इस मुद्दें के साथ तो हैं लेकिन बंद में शामिल नहीं हुए। जैसे ममता बनर्जी की TMC, नवीन पटनायक की बीजू जनता दल, दिल्ली में सत्तारूढ़ आम आदमी पार्टी (आप)

‘भारत बंद’ पर कांग्रेस का तर्क

कांग्रेस ने नरेंद्र मोदी को नामदार अनर्थशास्त्री बताते हुए कहा है यूपीए सरकार के समय अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों के बावजूद तेल की कीमतें नियंत्रण में थी। लेकिन मोदी सरकार में ऐसा नही है।

कांग्रेस ने यूपीए और एनडीए सरकार की तुलना करते हुए सोशल मीडिया ट्विटर पर एक आंकड़ा भी पेश किया है जो इस प्रकार है-

16 मई 2014 को अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमत 107.09 डॉलर प्रति बैरल था। तब यूपीए की सरकार जनता को 71.41 रुपए प्रति लीटर पेट्रोल और 55.49 रुपए प्रति लीटर डीजल जनता को दे रही थी।

6 सितंबर 2018 को अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमत 73 डॉलर प्रति बैरल। लेकिन मोदी सरकार जनता को 79.51 रुपए प्रति लीटर पेट्रोल और 71.55 रुपए प्रति लीटर डीजल दिया।

कांग्रेस ने अपने ट्विटर हैंडल पर एक और आंकड़ा दिया है। कांग्रेस का कहना है कि यूपीए के समय पेट्रोल पर उत्पाद शुल्क 9.20 रु प्रति लीटर लगाया जाता था। लेकिन मोदी सरकार में यही शुल्क 19.48 रु प्रति लीटर लगाया जा रहा है।

डीजल की बात करें तो यूपीए के समय डीजल पर 3.46 रु प्रति लीटर उत्पाद शुल्क लगाया जाता था। लेकिन मोदी सरकार में यही शुल्क 15.33 रु प्रति लीटर लगाया जा रहा है।

सत्ताधारी बीजेपी की प्रतिक्रिया

बीजेपी ने कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों के इस बंद को असफल बताया है। केंद्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर कहा कि ‘भारत बंद के नाम पर पेट्रोल पम्पों में आग लगाई जा रही है बसों और गाड़ियों को तोड़ा जा रहा है, कांग्रेस पार्टी जवाब दे कि देश में हो रही इन हिंसाओं का जिम्मेदार कौन है।’

बीजेपी की ये प्रतिक्रिया जनता का मुख्य मुद्दें से ध्यान हटाने की कोशिश जैसा है। सवाल ये नहीं है कि भारत बंद में क्या हो रहा है, कितनी हिंसा हो रही है। सवाल तो ये है कि भारत बंद की जरूरत ही क्यों पड़ी है? भारत बंद का मुद्दा क्या है?

भारत बंद का मुद्दा है पेट्रोल-डीजल और रसोई गैस के आसमान छूते दाम, डॉलर के मुकाबले कमजोर होता रुपया। केंद्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद को ये बताना चाहिए कि  पेट्रोल-डीजल और रसोई गैस के बढ़ते दामों से जनता को कैसे छुटकारा दिलाया जाएगा। रुएया को कैसे मजबूत किया जाएगा।

बीजेपी ने कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों के इस बंद को असफल बताया है। केंद्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर कहा कि ‘भारत बंद के नाम पर पेट्रोल पम्पों में आग लगाई जा रही है बसों और गाड़ियों को तोड़ा जा रहा है, कांग्रेस पार्टी जवाब दे कि देश में हो रही इन हिंसाओं का जिम्मेदार कौन है।’

बीजेपी की ये प्रतिक्रिया जनता का मुख्य मुद्दें से ध्यान हटाने की कोशिश जैसा है। सवाल ये नहीं है कि भारत बंद में क्या हो रहा है, कितनी हिंसा हो रही है। सवाल तो ये है कि भारत बंद की जरूरत ही क्यों पड़ी है? भारत बंद का मुद्दा क्या है?

भारत बंद का मुद्दा है पेट्रोल-डीजल और रसोई गैस के आसमान छूते दाम, डॉलर के मुकाबले कमजोर होता रुपया। केंद्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद को ये बताना चाहिए कि पेट्रोल-डीजल और रसोई गैस के बढ़ते दामों से जनता को कैसे छुटकारा दिलाया जाएगा। रुएया को कैसे मजबूत किया जाएगा।

 

Source: boltaup.com

भारत बंद के बावजूद बढ़े पेट्रोल-डीजल के दाम: मोदी जी, अंबानी-अडानी का मुनाफा देशहित से ऊपर है क्या?

Another hike in Petrol Diesel price beside of Bharat Bandh

पेट्रोल-डीजल के दामों में लगातार हो रही बढ़ोतरी के विरोध में आज मुख्य विपक्षी पार्टी कांग्रेस समेत 21 दलों ने भारत-बंद का ऐलान किया है। दामों के बढ़ने के कारण पूरे देश में जगह-जगह पर विरोध प्रदर्शन किये जा रहे हैं। लेकिन मोदी सरकार ने इस विरोध और जनता की जेब की चिंता ना करते हुए आज फिर से दामों में वृद्धि कर दी है।

पेट्रोल के दाम में 23 पैसे की वृद्धि हुई है जबकि डीजल में 22 पैसे का इजाफा हुआ है। इन नए दामों के बाद दिल्ली में पेट्रोल की कीमत 80 रुपये 73 पैसे प्रति लीटर पहुंच गई है। जबकि मुंबई में एक लीटर पेट्रोल का दाम 88 रुपये 12 पैसे पहुंच गया है।

वहीं, डीजल के रेट में भी राहत नहीं मिली है. आज इसके दाम में 22 पैसे की बढ़ोतरी हुई है, जिसके बाद दिल्ली में एक लीटर डीजल के लिए 72 रुपये 83 पैसे खर्च करने पड़ेंगे। जबकि मुंबई की बात की जाए तो यहां एक लीटर डीजल का रेट बढ़कर 77 रुपये 32 पैसे हो गया है।

केंद्र की मोदी सरकार पर पेट्रोल-डीजल के दाम घटाने का दबाव बढ़ रहा है। हालाँकि, केंद्र सरकार का कहना है कि अंतर्राष्ट्रीय बाज़ार में कच्चे तेल के दाम बढ़ने वो देश में दाम बढ़ा रही है।

वहीं विपक्ष का कहना है कि सरकार ने अंतर्राष्ट्रीय बाज़ार में कच्चे तेल के दाम गिरने पर पेट्रोल डीजल के दाम कम नहीं करे और एक्साइज ड्यूटी यानि टैक्स बढ़ाया। लेकिन अन्तराष्ट्रीय बाज़ार में कीमतें बढ़ने पर सरकार दाम बढ़ा रही है।

गौरतलब है की 2013 के मुकाबले मोदी सरकार 105% पेट्रोल पर और 331% डीजल के दाम बढ़ा चुकी है। सत्ता में आने के बाद मोदी सरकार 10 बार से ज़्यादा एक्साइज ड्यूटी लगा चुकी है।

 

Source: boltaup.com

नोटबंदी की तरह फ्लॉप हुई मोदी की GST, चार महीनों में टैक्स कलेक्शन में आई 7000 करोड़ की गिरावट

GST may be another disastrous decision of Modi govt

पिछले कुछ महीनों के मुकाबले अगस्त में जीएसटी संग्रह में कमी आई है। ये गिरकर 93,960 करोड़ रुपये हो गया, जबकि अप्रैल में 1.03 लाख करोड़ रुपये का जीएसटी संग्रह हुआ था। चार महीने में लगभग 7000 करोड़ रुपए की गिरावट जीएसटी संग्रह में आई है।

मंत्रालय ने कहा है कि गिरावट का कारण 21 जुलाई को जीएसटी परिषद द्वारा सेनेटरी नैपकीन, जूते-चप्पल, फ्रिज, छोटे स्क्रीन के टीवी, वाशिंग मशीन सहित 88 वस्तुओं, उत्पादों पर कर दरों में की गई कमी है। संबंधित उत्पादों पर जीएसटी की नई दरें 27 जुलाई से प्रभावी हुई हैं।

अगस्त में राजस्व प्राप्ति जुलाई और जून महीने के संग्रह की तुलना में कमी आई है। अप्रैल में 1.03 लाख करोड़ रुपये था, उसके बाद जून में 95,610 करोड़ रुपये और जुलाई में 96,483 करोड़ रुपए का जीएसटी संग्रह हुआ था।

अनुमान है कि कर की दरों में गिरावट के बाद दाम घटने की उम्मीद में बाजार में कुछ समय के लिए उनकी बिक्री संभवत: कम हुई जिससे राजस्व वसूली पर असर हुआ होगा।

 

Source: boltaup.com