दिल्ली में वायु गुणवत्ता ‘बहुत ख़राब’ श्रेणी में पहुंची, बढ़ते प्रदूषण के विरोध में प्रदर्शन, CPCB ने ट्रकों पर प्रतिबंध की सिफारिश की

Delhi worst air pollution

देश की राजधानी नई दिल्ली की हवा में दिवाली से पहले ही प्रदूषण इतना बढ़ गया है कि सांस लेना मुहाल हो गया है। मंगलवार को दिल्ली की वायु गुणवत्ता ‘बहुत खराब’ श्रेणी में दर्ज की है क्योंकि पड़ोसी राज्यों में पराली जलाये जाने वाले क्षेत्रों से लगातार हवा बहकर इधर आ रही है।

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अगर दिवाली में लोग पटाखे जलाने लगे तो समस्या और बड़ी हो जाएगी। हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने रात 8 से 10 का समय तय करने के साथ ही ग्रीन पटाखे जलाने का आदेश जारी कर रखा है।

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वहीं, दिल्ली में प्रदूषण के खतरनाक स्तर तक बढ़ोतरी और ऐसे में स्वास्थ्य के प्रति बढ़ती चिंताओं को लेकर लोगों के एक समूह ने मंगलवार को पर्यावरण मंत्रालय के कार्यालय के बाहर प्रदर्शन किया।

बीते तीन हफ्तों में दिल्ली में वायु गुणवत्ता खतरनाक स्तर पर पहुंच गई है और सोमवार को इस मौसम की सबसे खराब वायु गुणवत्ता दर्ज की गई जो ‘गंभीर स्तर’ पर थी। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के आंकड़ों के मुताबिक वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 394 दर्ज किया गया, जो ‘बेहद खराब’ श्रेणी में आता है।

Delhi-Pollution
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दैनिक भास्कर की ख़बर के मुताबिक, दिल्ली के सर गंगाराम अस्पताल में रखे सफेद फेफड़े 48 घंटों के भीतर काले पड़ गए। दरअसल दिल्ली में ख़राब वायु के चलते अस्पताल ने एक फेफड़े का मॉडल लगाया था, जिसके हेपा फिल्टर से बनाया गया था. हेपा फिल्टर का इस्तेमाल एयर प्यूरीफायर किया जाता है।

लंग केयर फाउंडेशन के अध्यक्ष डॉ. अरविंद कुमार के अनुसार, तीन नवंबर सुबह 10 बजे फेफड़ों के मॉडल को अस्पताल परिसर में लगाया गया था और 48 घंटे के बाद यह पूरी तरह काला पड़ चुका था।

डॉ. अरविंद का मानना है कि दिल्ली की हवा अब रहने लायक नहीं रही है. उन्होंने आगे बताया कि अगर यही स्थिति रही तो लंग की बीमारी महामारी का रूप ले लेगी।

सीपीसीबी ने ट्रकों पर प्रतिबंध की सिफारिश की

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NBT की रिपोर्ट के मुताबिक, प्रदूषण की निगरानी करने वाली संस्था सीपीसीबी ने 8 से 10 नवंबर तक शहर में ट्रकों के प्रवेश पर पाबंदी लगाने की सिफारिश की है। दिल्ली के 25 इलाकों में वायु की गुणवत्ता ‘काफी खराब’ दर्ज की गई जबकि आठ क्षेत्रों में यह ‘खराब’ रही। विशेषज्ञों ने आगाह किया कि इस दिवाली पर पिछले साल की तुलना में “कम प्रदूषणकारी पटाखे” जलाए जाने के बाद भी प्रदूषण का स्तर काफी ज्यादा बढ़ सकता है।

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