मुग़ल इतिहास की सबसे बड़ी जीत, जब 60 मुसलमान पड़े 60 हज़ार पर भारी, देखें विडियो

कहा जाता है कि अगर आप कोई भी काम सच्ची लगन और ईमानदारी से करते हैं। तो सभी मुश्किलों को पार करते हुए आप अपनी मंजिल तक जरूर पहुंचते हैं। बशर्ते आप में आत्मविश्वास और इच्छाशक्ति की कमी बिल्कुल भी ना हो इस बात का जीता जागता उदाहरण है कि यारमुक का युद्ध जो कि आज से सदियों पहले हुआ था आपको बता दें कि यरमूक का युद्ध बीजान्टिन साम्राज्य की सेना और रशीदून खिलाफत की मुस्लिम अरब लीग सेना के बीच हुआ था।

यारमुक का युद्ध रहा सबसे चर्चित जंग

यह युद्ध 6 मार्च 636 ईसवी में प्रमुख नदी के पास लड़ा गया था जो कि 6 दिनों तक चला था इस युद्ध में सहाबी-ए-रसूल अबु उबैदा मुसलमानों के सिपहसालार थे। बताया जाता है कि जब रोमनों ने मुसलमानों पर हमला किया तो खालिद बिन वलीद ने अपने 60 आदमियों के साथ 60 हजार की फौज को खड़ा किया था।

60 हजार की फ़ौज से लड़े थे 60 सैनिक

दरअसल 60000 सैनिकों की फौज के आगे 60 आदमियों को खड़ा करना बहुत ही मुश्किल काम था लेकिन उन्होंने अपनी एकता विश्वास और इच्छाशक्ति की बदौलत 60 आदमियों के साथ ही उस 60000 सैनिकों की सेना को हरा दिया।

इस तरह वहां पर रोमनों शासन पूरी तरह से खत्म हो गया। बाकी बचे लोग वहां को छोड़कर चले गए।

आत्मविश्वास की बदौलत जीती जंग

बताया जाता है कि जबला बिन ऐहम गस्सानी साठ हज़ार सवारों को लेकर मैदान में उतरे तो उन्हें आता देख मुजाहिद ओने फ़ौरन हजरत अबू उबैदा को इस बारे में इतना की और हज़रत अबू उबैदा रजियल्लाहु अन्हु ने मुजाहिदों को बुलाया और निडर होकर मैदान में जाने का आदेश दिया।

2000 सैनिकों के बराबर था एक

इसके बाद सभी मुजाहिद अपने हजारों और घोड़ों को लेकर मैदान में पहुंच गए बताया जाता है कि हज़रत अबू सुफियान रजियल्लाहु अन्हु इतनी बड़ी सेना से इसलिए लड़ पाए। क्योंकि उनका कहना था| 30 आदमीयों को लेकर 60 हजार से लडने का इरादा रख़ते हैं। क्योंकि हमारे 1 सैनिक 2000 के बराबर है। उनकी ये बात सुनकर सब चौंकाने रह गए।

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