राफेल डील में CBI जांच की मांग पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा- ‘पहले CBI को अपना घर ठीक कर लेने दीजिए’

Supreme Court on CBI

केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार के शासन में देश की सबसे बड़ी जांच एजेंसी केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) खुद सवालों के घेरे में आ गई है। हाल ही में सीबीआई के अंदर दो वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा एक-दूसरे पर लगाए गए भष्टाचार और रिश्वतख़ोरी के गंभीर आरोपों के बाद सीबीआई की विश्वसनीयता और प्रतिष्ठा दावं पर लगी हुई है।

वहीं, केंद्र सरकार भी सीबीआई में हस्तक्षेप को लेकर विपक्ष के निशाने पर है। गौरतलब है कि, सीबीआई में जारी घमासान के बीच मोदी सरकार ने रातों रात अभूतपूर्व कदम उठाते हुए सीबीआई निदेशक आलोक वर्मा और विशेष निदेशक राकेश अस्थाना दोनों को छुट्टी पर भेज दिया था।

साथ ही, संयुक्त निदेशक एम नागेश्वर राव को तत्काल प्रभाव से अंतरिम निदेशक नियुक्त कर दिया गया। ओडिशा कैडर के 1986 बैच के आईपीएस अधिकारी राव ने आधी रात को ही पदभार संभाल लिया था। सीबीआई में मचे घमासान के बाद यह मामला अब सूप्रीम कोर्ट में है। जिसपर सूप्रीम कोर्ट ने हाल ही में चिंता जाहीर की है।

‘पहले सीबीआई को अपना घर ठीक करने दो’ – सुप्रीम कोर्ट

CBI
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NBT की रिपोर्ट के मुताबिक, बुधवार (31 अक्टूबर) को राफेल पर सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) में चल रहे घमासान को लेकर भी चिंता जाहिर की है। दरअसल, राफेल डील की सीबीआई जांच की मांग को लेकर दाखिल की गई याचिका पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने कहा कि जांच एजेंसी के अपने ‘घर की स्थिति’ ठीक कर लेने के बाद ही इस बारे में कोई फैसला लिया जा सकता है।

सीनियर वकील प्रशांत भूषण की याचिका पर जवाब देते हुए चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया रंजन गोगोई ने कहा, ‘पहले सीबीआई को अपना घर ठीक करने दो।’ कोर्ट का यह बयान तब आया है, जब पूर्व केंद्रीय मंत्री अरुण शौरी, यशवंत सिन्हा और प्रशांत भूषण ने कोर्ट में याचिका दायर की थी कि कोर्ट की निगरानी में सीबीआई से राफेल डील की जांच कराई जाए। सीजेआई के नेतृत्व में जस्टिस यूयू ललित और केएम जोसेफ भी इस पीठ का हिस्सा थे।

Supreme Court on CBI

सर्वोच्च अदालत ने सीबीआई मामले से जुड़ी याचिकाओं पर भी रोक लगा दी है, जिसमें वर्मा और अस्थाना द्वारा दायर की गई याचिकाएं भी शामिल हैं। जब प्रशांत भूषण ने कहा कि राफेल डील की जांच सीबीआई से कराई जाए जो कोर्ट ने कहा, ‘आपको उसके लिए इंतजार करना होगा।’

गौरतलब है कि, देश में इस वक्त कई महत्वपूर्ण बड़े मुद्दों पर राजनीतिक घमासान मचा हुआ है। जिसपर सूप्रीम कोर्ट सुनवाई कर रहा है। इनमें से एक राफेल डील भी है। पिछले कई दिनों से राफेल विमान की कीमतों को लेकर सरकार द्वारा रखी गोपनियता को लेकर राजनीति गरमाई हुई है। राफेल डील में हुए खुलासों के बाद विपक्ष ने मोदी सरकार को सवालों के घेरे में खड़ा कर दिया है।

10 दिन के भीतर राफेल की कीमत और डिटेल जमा करें सरकार’- सूप्रीम कोर्ट

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वहीं, एनडीटीवी की रिपोर्ट के मुताबिक, सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार (31 अक्टूबर) को राफेल मामले से जुड़ी याचिकाओं पर सुनवाई केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार से स्पष्ट रूप से कहा है कि वह फ्रांस से खरीदे जा रहे 36 राफेल लड़ाकू विमानों की कीमत की जानकारी उसे 10 दिन के भीतर सीलबंद लिफाफे में सौंपे।

बता दें कि पिछली बार सुप्रीम कोर्ट ने सिर्फ सौदे की प्रक्रिया की जानकारी मांगी थी. मगर इस बार सुप्रीम कोर्ट ने महज 10 दिनों के भीतर राफेल की कीमत और उसकी विस्तृत जानकारी मांगी है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि सरकार जो भी जानकारी कोर्ट को दे, वह याचिकाकर्ताओं को भी दे ताकि वह इस पर अपना जवाब दे सके। साथ ही कोर्ट ने राफेल दिल में ऑफसेट पार्टनर कैसे चुना गया? इस बारे में सरकार से जानकारी मांगी है।

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