CBI के बाद अब RBI में सरकार के हस्तक्षेप पर बोले यशवंत सिन्हा- ‘मोदी सरकार पर देश की संस्थाओं को बर्बाद करने का भूत सवार है’

Yashwant Sinha attacks Modi Govt on RBI

देश की सबसे बड़ी जांच एजेंसी केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) और मोदी सरकार के बीच पिछले कुछ दिनों से घमासान जारी है। विपक्ष लगातार सीबीआई में हस्तक्षेप को लेकर सरकार पर हमलावर है। यहां तक की यह मामला देश की सबसे बड़ी अदालत सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच गया है।

वहीं, सीबीआई के बाद अब रिज़र्व बैंक ऑफ इंडिया (आरबीआई) में हस्तक्षेप को लेकर मोदी सरकार विपक्ष के निशाने पर आ गई है। बता दें कि, आरबीआई के गवर्नर ऊर्जित पटेल और सरकार में कई नीतिगत मुद्दों पर पर्याप्त मतभेद हैं। ब्याज दरों में कटौती को लेकर भी आरीबीआई और सरकार में एक राय नहीं है। दोनों के बीच टकराव की स्थिति ऐसे समय में पैदा हुई है जब भारत की अर्थव्यवस्था हिचकोले खा रही है।

गौरतलब है कि मोदी सरकार ने आरबीआई से ब्याज दर कम करने को कहा था मगर ऐसा हुआ नहीं। आरबीआई का कहना है कि जिस तरह से सरकार बैंकों से लिए कर्ज को माफ़ कर रही है। उसका नतीजा आने वाले समय में खतरनाक साबित हो सकता है। आरबीआई का कहना है कि मोदी सरकार बैंकों के काम में दखल न दे तो ही अच्छा है।

हाल ही में आरबीआई के डिप्टी गवर्नर विरल आचार्य ने सरकार द्वारा आरबीआई के काम में दखल देने से बैंक की स्वायत्तता पर प्रभाव पढ़ने कि बात कही थी। विरल ने बताया कि, इकोनॉमी में सुधार लाने के लिए आरबीआई सरकार से थोड़ा दूरी बनाना चाहती है लेकिन ऐसा हो नहीं पा रहा है। सरकार बैंक के कामों में हस्तक्षेप कर रही है, जो कि ठीक नहीं है।

बीबीसी की रिपोर्ट के मुताबिक, पिछले शुक्रवार को आरबीआई डिप्टी गवर्नर विरल आचार्य ने अपने भाषण में अर्जेंटीना के 2010 के आर्थिक संकट का ज़िक्र करते हुए चेताया था। कहा जा रहा है कि विरल काफ़ी ग़ुस्से में थे और उनका भाषण दर्शकों को हैरान करने वाला था।

Yashwant Sinha attacks Modi Govt on RBI

अर्जेंटीना के केंद्रीय बैंक के गवर्नर को जमा पूंजी सरकार को देने के लिए मज़बूर किया गया था. अर्जेंटीना को डिफ़ॉल्टर तक होना पड़ा था। विरल आचार्य ने कहा कि अर्जेंटीना को सरकार के हस्तक्षेप की भारी क़ीमत चुकानी पड़ी थी।

आचार्य ने कहा था, ”जो सरकारें केंद्रीय बैंकों की स्वतंत्रता का सम्मान नहीं करती हैं वहां के बाज़ार तत्काल या बाद में भारी संकट में फंस जाते हैं। अर्थव्यवस्था सुलगने लगती है और अहम संस्थाओं की भूमिका खोखली हो जाती है.” अर्जेंटीना में 2010 में ठीक ऐसा ही हुआ था।

गौरतलब है कि, आरबीआई की स्थिति को देख कर साफ जाहीर हो रहा है कि मोदी सरकार बैंक पर अपना दबाव बना रही है। जबकि आरबीआई स्वतंत्र रूप से काम करना चाहती है। वहीं, आरबीआई में हस्तक्षेप को लेकर मोदी सरकार की विपक्ष जमकर आलोचना कर रहा है।

इसी बीच, पूर्व केंद्रीय मंत्री यशवंत सिन्हा ने इसपर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए ट्वीट किया, “सीबीआई के बाद अब आरबीआई की बारी है। सरकार पर देश की संस्थाओं को बर्बाद करने का भूत सवार है। अब लोग हमारी संस्थाओं के ख़िलाफ़ सर्जिकल स्ट्राइक से जाग चुके हैं”।

वहीं, सीपीआईएम नेता सीताराम येचूरी ने इस मामले को लेकर मोदी सरकार पर निशाना साधते हुए ट्विटर के ज़रिए कहा, “किसी की नहीं सुनी। सिर्फ़ जुमला कसना और लोगों से झूठे वायदे करना मोदी सरकार का उद्देश्य है। आर॰बी॰आई॰ के पूर्व गवर्नर की राय के ख़िलाफ़ नोटबंदी लागू कर के अर्थव्यवस्था तहस-नहस कर दी। अब फिर विनाश की ओर”।

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