PM मोदी ने KMP एक्सप्रेसवे का किया उद्घाटन, कांग्रेस बोलीं, आधे-अधूरे KMP का उद्घाटन कर हज़ारों लोगों की जान जोखिम में क्यों डाल रही है सरकार

KMP expressway inauguration

सोमवार (19 नवंबर) को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक तरफ जहां केएमपी एक्सप्रेसवे का उद्घाटन किया तो वहीं बल्लभगढ़ मेट्रो को भी हरी झंड़ी दिखाई। बताया जा रहा है कि, केएमपी एक्सप्रेसवे के एक बार खुलने के बाद दिल्ली में प्रवेश करने वाले ट्रकों की संख्या में कम होगी जिससे शहर के प्रदूषण के स्तर में कमी आएगी।

लेकिन इसी बीच कांग्रेस ने केएमपी एक्सप्रेसवे के उद्घाटन पर सवाल उठाते हुए बीजेपी सरकार पर निशाना साधा है। दरअसल, कांग्रेस का दावा है कि पीएम मोदी और हरियाणा के सीएम मनोहरलाल खट्टर ने राज्य में ‘आधे-अधूरे’ एक्सप्रेसवे का उद्घाटन किया है, जिससे लोगों की जान जोखिम में पड़ सकती है।

फर्स्टपोस्ट की रिपोर्ट के मुताबिक, कांग्रेस के मुख्य प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला ने सोशल मीडिया पर ट्वीट कर कहा, ‘मोदी जी और खट्टर साहब, आधे अधूरे केएमपी का उद्घाटन कर हज़ारों लोगों की जान जोखिम में क्यों डालने जा रहे हैं? कंसल्टेंट और एचएसआईडीसी का कंपलीशन सर्टिफिकेट कहां है? इंजीनियर की जांच के बगैर इसे आंशिक व्यावसायिक शुरुआत कैसे मान सकते हैं?’

उन्होंने आगे कहा, क्या हाइवे बनाने वाली प्राइवेट कंपनी को 26 करोड़ रुपए प्रति महीने का फायदा पहुंचाने के लिए केएमपी परियोजना का उद्घाटन किया गया है? सुरजेवाला ने कहा कि प्रधानमंत्री को इस परियोजना में ‘गड़बड़झाले’ की तुरंत जांच करानी चाहिए।

रिपोर्ट के मुताबिक, सोमवार से शुरू हुए वेस्टर्न पेरिफेरल एक्सप्रेस वे को पूरा करने में 15 साल का लग गया. दरअसल इस परियोजना को 2009 तक पूरा करने का लक्ष्य तय किया गया था लेकिन तब से कई बार इसकी डेड लाइन को आगे बढ़ाया गया, जिसके बाद इसको पूरा होने में 15 साल का समय लग गया।

हालांकि उम्मीद जताई जा रही है कि एक्सप्रेस वे के एक बार खुलने के बाद दिल्ली में प्रवेश करने वाले ट्रकों की संख्या में कम होगी जिससे शहर के प्रदूषण के स्तर में कमी आएगी।

पत्रकार रवीश कुमार ने प्रधानमंत्री मोदी के लिए भाषण लिखा है, क्या वे इसे पढ़ सकते हैं?

Ravish Kumar on speech for PM Modi

भाइयों और बहनों,

आज मैंने भाषण का तरीका बदल दिया है। मैंने अलग अलग फार्मेट में भाषण दिए हैं लेकिन आज मैं वो करने जा रहा हूं जो कांग्रेस के नेता पिछले सत्तर साल में नहीं कर सके। मैंने रटा-रटाया भाषण छोड़ कर कुछ नया करने का फैसला किया है।

मुझे यह कहने में संकोच नहीं कि यह भाषण रवीश कुमार ने लिखा है, लेकिन दोस्तों, भाषण कोई भी लिखे, अगर वह राष्ट्रहित में है। पर मैंने भी कह दिया कि मैं पढूंगा वही जो सरकारी दस्तावेज़ पर आधारित होता है।

रवीश कुमार मान गए और उन्होंने मध्य प्रदेश के उच्च शिक्षा विभाग की वेबसाइट से 2015-16 की रिपोर्ट निकाली। 2016-17 और 2017-18 की रिपोर्ट ही नहीं है, वेबसाइट पर।

मैं तो कहता हूं कि रिपोर्ट होगी मगर सबको खोजना नहीं आता है। ये जो स्पीच राइटर हैं आप तो जानते हैं न इनको। अरे, दो दो साल की रपट वेबसाइट पर नहीं है तो क्या हुआ। जो है उसी को पढ़ेंगे।

हमें पूरा भरोसा है हम किसी भी साल नौजवानों को पीछे रखने में पीछे नहीं हटे हैं। मैंने भी कहा कि मध्य प्रदेश में भाजपा सरकार के 15 साल काम ही काम के साल रहे हैं, पत्रकार भाई तुम 2015-16 की रिपोर्ट से ही भाषण बनाओ। मैं पढ़ दूंगा। डेटा नया ऑयल है। तो जो सरकारी डेटा है उससे हमें तेल निकालना आता है।

मित्रों,

मेरे मध्य प्रदेश में 437 शासकीय महाविद्यालय हैं। गर्वनमेंट कालेज। 437 कालेज भाइयों, बहनों। ये कालेज आपके पैसे से चलते हैं। जबकि 800 से अधिक कालेज ऐसे हैं जिसके लिए आप टैक्स नहीं देते मगर मोटी फीस देकर चला रहे हैं। प्राइवेट से लेकर पब्लिक सेक्टर सब आप ही चला रहे हैं।

1300 से ज़्यादा कालेज हैं। कालेज की कोई कमीं हमने मध्य प्रदेश की जनता को नहीं होने दी है। 2015-16 की रिपोर्ट है। लॉ कालेज के लिए 28 प्रिसिंपल के पद स्वीकृत थे। 28 के 28 खाली थे भाइयों बहनों। प्रिंसिपल की कोई ज़रूरत ही नहीं है। बेवजह नियम बनाते रहते हैं। हम मिनिमम गर्वनमेंट मैक्सिमम गर्वनेंस की बात करते हैं। ये कालेज बिना प्रिंसिपल के अपने आप चलते रहे हैं।

हमने कालेज ही नहीं, क्लास रूम को भी ख़ाली रखा है। नौजवान क्लास में आए, बात-विचार करें, आपस में चर्चा करें, कैंपस में तोप देखें, तिरंगा देखें, अब टीचर होंगे तो ये सब कहां कर पाएंगे। राष्ट्रवाद का निर्माण कहां हो पाएगा। इसलिए 2015-16 की सालाना रिपोर्ट कहती है, और ये मैं नहीं कह रहा हूं।

उच्च शिक्षा विभाग की रिपोर्ट कहती है, 704 प्राध्यापक होने चाहिए थे, हमने 474 रखे ही नहीं। 7412 असिस्टेंट प्रोफेसर होने चाहिएं, शिवराज जी ने कहा कि 3025 असिस्टेंट प्रोफेसर रखने की कोई ज़रूरत नहीं है। हमारा युवा खुद ही प्रोफेसर है। वो तो बड़े बड़े को पढ़ा देता है जी, उसे कौन पढ़ाएगा।

हर युवा मास्टर है, उसका मास्टर कोई नहीं। यह हमारा नारा है। नारा मैं ख़ुद लिख रहा हूं, रवीश कुमार नहीं। पत्रकार लोग डेटा-वेटा करते रहते हैं, चुनाव उससे नहीं होता लेकिन हमने कहा कि चलो भाई आज शिक्षा को मुद्दा बना ही देते हैं।

लाइब्रेरी की कोई ज़रूरत नहीं है। आप तो स्मार्ट फोन से सब पढ़ लेते हो। 264 महाविद्यालयों औऱ यूनिवर्सिटी में वाई फाई की सुविधा दे दी गई है। आपको मिल रही है कि नहीं, मिल रही है। हाथ उठा कर बोलिए, आपके कालेज में वाई फाई है या नहीं।

391 लाइब्रेरियन के पद मंज़ूर हैं लेकिन 253 पद ख़ाली रख छोड़े थे हमने। एक कालेज में प्रिंसिपल से लेकर प्राध्यक के बहुत पद होते हैं। इस तरह से दोस्तों 9377 पद पर लोग होने चाहिए थे, 4374 पद ख़ाली थे दोस्तों, 4374। क्या क्या नहीं ख़ाली था। प्रिंसिपल, प्राध्यपक, असिस्टेंट प्रोफेसर, क्रीड़ा अधिकारी, रजिस्ट्रार हमने सब ख़ाली रख छोड़े हैं। ऐसा नहीं है कि हमने भर्ती न करने की कसम खा ली हो।

हम विज्ञापन निकालते रहते हैं। 2015-16 में 2371 पदों की बहाली निकाली थी। अब ये पता नहीं कि बहाली हुई या नहीं, काश 2016-17 की रपट भी वेबसाइट पर मिल जाती। मध्य प्रदेश का पौने छह लाख युवा कालेजों में बिना प्राध्यापक, सहायक प्राध्यापक के ही पढ़ा रहा है।

हमारे युवाओं ने दुनिया को दिखा दिया है। हमारा युवा देश मांगता है, कालेज और कालेज में टीचर नहीं मांगता है। वो देश के लिए ख़ुद चार घंटा अधिक पढ़ लेगा। और ट्यूशन के लिए मास्टर कहां कम हैं। तभी तो हम स्कूटी और मोपेड देने वाले हैं ताकि बच्चे कालेज कम जाएं, सीधे ट्यूशन जाएं।

परमानेंट टीचर का झंझट ही छोड़ दिया। इस साल तो शिवराज सिंह चौहान ने अतिथि विद्वानों का मानदेय न्यूनतम 30,000 कर दिया है वर्ना कई साल तक तो वे न्यूनतम मज़दूरी से भी कम पर पढ़ा रहे थे। इसे त्याग कहते हैं। 15 साल हमने यूं ही राज नहीं किए हैं। तभी तो चुनाव के कारण हमने जुलाई में न्यूनतम 30,000 कर दिया।

दिवाली आई तो हमने कहा कि एक महीने की सैलरी दे दो ताकि लगे कि सैलरी मिल सकती है। पांच महीने में एक महीने की सैलरी दे दो, नौजवान काम करने के लिए तैयार है। हम तो वो भी नहीं देते मगर राज्य मानवाधिकार आयोग ने नोटिस दे दिया कि इन्हें सैलरी दी जाए।

तभी कहता हूं कि विकास के काम में ये मानवाधिकार आयोग वाले बहुत रोड़ा अटकाते हैं। कोई नहीं, हमने भी चार महीने की सैलरी नहीं दी। एक ही महीने की दी। दीवाली का ख़र्चा ही क्या है। पटाखे तो बैन हो गए हैं। दीया तो मिट्टी से बन जाता है।

अब देखिए, चार महीने की सैलरी नहीं दी है तब भी अतिथि विद्वान कालेज जा रहे हैं। पढ़ा रहे हैं। विरोधी कहते हैं कि तिरंगा और तोप का कोई लाभ नहीं। ये सब कैसे हो रहा है, मित्रों, मैं मानता हूं कि राष्ट्रवाद के कारण हो रहा है। राष्ट्रवाद की भावना से प्रेरित नौजवान बिना सैलरी के पढ़ा रहे हैं और बिना टीचर के पढ़ रहे हैं। ये लिबरल और अबर्न नक्सल कुछ भी कहते रहें, आज देश को शिक्षा की ज़रूरत ही नहीं है। हमने उसकी ज़रूरत ही ख़त्म कर दी है। हम नए विचारों को लेकर आगे बढ़ रहे हैं।

हम अतिथि विद्वानों को छुट्टी भी नहीं देते हैं। छुट्टी लेते हैं तो सैलरी काट लेते हैं। मित्रों, मैंने एक दिन की भी छुट्टी नहीं ली है। ये अतिथि विद्वान ही असली मोदी हैं। बिना छुटटी के पढ़ा रहे हैं। साल में 1 लाख 20,00 लेकर पढ़ाने वाले दुनिया में ऐसे शिक्षक कहीं नहीं मिलेंगे। शहरों में दिक्कत होती है, मैं मानता हूं। इसलिए ज़्यादातर अतिथि विद्वानों को हमने गांवों में लगा रखा है।

2002 में एक कक्षा के 75 रुपये मिलते थे और एक दिन में चार कक्षा के पैसे मिलते थे। आंदोलन हो गया। हमने कहा बढ़ा दो। चार कक्षा की जगह तीन कक्षा के पैसे दे दिए। उनका कुछ बढ़ गया लेकिन हमारा बहुत नहीं घटा। मध्य प्रदेश के कालेजों में एम ए पास, नेट पास, पीएचडी किए नौजवानों ने कई साल देशहित में 13 हज़ार, 14 हज़ार महीने की कमाई पर पढ़ाया है। भाइयो, बहनो, ये देश मोदी नहीं चला रहा है। ये देश इन नौजवानों से चला रहा है। जो अपना भविष्य ख़तरे में डालकर राज्य का भविष्य संवार रहे हैं।

मित्रों, मेरा स्पीच रवीश कुमार ने लिखा है। उन्होंने अतिथि विद्वानों के नेता देवराज से बात कर ली है। देवराज ने इन्हें बता दिया है कि यूजीसी के हिसाब से 30 छात्र पर एक सहायक प्रोफेसर होना चाहिए। तो इस हिसाब से 12000 सहायक प्रोफेसर होने चाहिएं। सरकारी कालेजों में सहायक प्रोफेसर के लिए 7000 से अधिक पद मंज़ूर हैं लेकिन 5000 से अधिक शिक्षक अतिथि विद्वान हैं।

हमन न तो किसी को परमानेंट रखा न इन अतिथि विद्वानों को कभी पूरी सैलरी दी। परमानेंट करता तो डेढ़ लाख महीने की सैलरी देनी पड़ती मगर यही नौजवान 15 साल से मात्र एक लाख की सैलरी में पूरा साल पढ़ा रहे थे। मध्य प्रदेश की जनता यू हीं मामा नहीं कहती हैं। भांजों का काम ही क्या है। मामा मामा करना है। मां भी खुश, मामा भी खुश।

यही नहीं जो जनभागीदारी से कालेज चलते हैं, वो भी चालाक हो गए हैं। एक ही शहर का एक कालेज एक शिक्षक को 18000 सैलरी देता था तो दूसरा कालेज उसी विषय को 10,000 में पढ़वा रहा था। भाजपा की सरकार ने उच्च शिक्षा पर उच्चतम पैसे बचाए हैं। आज तक किसी ने इसकी शिकायत की, किसी ने नहीं की।

आंदोलन वगैरह होते रहते हैं मगर ये नौजवान जानते हैं कि इनका मामा अगर कोई है तो वो कौन है। भांजा कभी मामा से बग़ावत करता है क्या। भारतीय परंपरा है। भारतीय परंपरा है। हम संस्कार को शिक्षा के पहले रखते हैं। पहले राष्ट्रवाद, फिर संस्कार और दोनों से सरकार।

अभी हम इन अतिथि विद्वानों को भी निकालने वाले हैं। अप्रैल में 3200 की वेकैंसी निकाली थी, 2600 का रिज़ल्ट निकला है। अभी ज्वाइनिंग नहीं हुई है। इनके कालेज जाते ही, पुराने अतिथि विद्वान निकाल दिए जाएंगे।

नए नौजवान आएंगे और जमकर पढ़ाएंगे। इस तरह से अगर हम पंद्रह पंद्रह साल में परमानेंट शिक्षक की भर्ती करें तो शिक्षा का बजट कितना कम हो सकता है। मित्रों, मैं रवीश कुमार की बात से सहमत नहीं हूं कि नौजवानों की पोलिटिकल क्वालिटी थर्ड क्लास है।

आज मध्य प्रदेश के नौजवानों ने बिना टीचर के पढ़ कर दुनिया को दिखा दिया है। मध्य प्रदेश के पढ़े लिखे नौजवानों ने दस दस साल एक लाख रुपये में पूरे साल पढ़ा कर जो दिखाया है, वह बताता है कि इनकी पोलिटिकल समझ थर्ड क्लास नहीं है। इनके मां बाप ने शिकायत नहीं की। इन्होंने शिकायत नहीं की। अब आप ही पूछो कि रवीश कुमार को क्या प्राब्लम है। उन्हें क्यों शिकायत है?

मैं बधाई देता हूं कि हमने मध्य प्रदेश में उच्च शिक्षा का विकास किया है। मैं तो कहता हूं कि आ जाए कोई हमसे इस मामले में बहस कर ले। मेरे मध्य प्रदेश के नौजवान किसी से बहस नहीं करते। वैसे चुनावों में बातें तो बहुत होती हैं मगर शिक्षा पर कोई भी मुझसे बात कर ले। पूछो जो पूछना है, मैं जवाब दूंगा। अरे पूछोगे तब न जब हम तुमको पूछने के लायक बनाएंगे। भारत माता की जय। भारत माता की जय।

नोट- दोस्तों, चुनाव दर चुनाव मैंने देखा है कि शिक्षा जैसे ज़रूर विषय पर बात नहीं होती। नेता बात नहीं करते, जनता बात नहीं करती है। तो सोचा कि लिखने की शैली में बदलाव करता हूं। प्रधानमंत्री के करीब हो जाता हूं। उनका भाषण लिख देता हूं।

एक कोशिश करता हूं कि चुनाव में शिक्षा की बात हो। नौजवान मध्य प्रदेश के कालेज, क्लास रूम की तस्वीर खींच कर प्रधानमंत्री और राहुल गांधी को टैग करें। ट्विट करें। कालेज जाने वाले नौजवान बात नहीं करेंग तो कौन करेगा। क्या वो चाहेंगे कि यह बात साबित हो जाए कि नौजवानों की राजनीतिक समझ थर्ड क्लास है। नहीं न। तो कल से मध्य प्रदेश के नौजवान अपने अपने कालेज का हाल तस्वीर के साथ ट्वीट करें। टैग करें। मुझे बताएं।

(यह लेख मूल रूप से रवीश कुमार के ब्लॉग कस्बा पर प्रकाशित हुआ है.)

 

दिल्ली में फिर इंसानियत हुई शर्मसार: डेढ़ साल की बच्ची का अपहरण कर दुष्कर्म, स्वाति मालीवाल बोलीं- ‘बेटी बचाओ- बेटी बढ़ाओ’ का नाटक बंद करो मोदीजी, पहले मासूम बेटियों के रेप रोकिए!

Delhi 2 year old girl raped

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बड़े ज़ोरशोर के साथ देश में ‘बेटी बढ़ाओ बेटी बचाओ’ योजना की शुरुवात की थी। साथ ही बेटियों की सुरक्षा और उनके सम्मान को लेकर बड़े बड़े दावे भी किए, लेकिन आज पीएम मोदी के तमाम दावे और योजना महस एक दिखावा साबित हुए  है। हकीकत तो यह है कि पीएम मोदी के नेतृत्व वाली बीजेपी सरकार के राज में देश महिलाओं के लिए सबसे असुरक्षित देश बन गया है। मासूम बेटियों के साथ रेप, बलात्कार जैसे घिनौने अपराध हो रहे हैं, लेकिन केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार धृतराष्ट्र की तरह आंख बंद कर बैठी है।

जनता का रिपोर्टर की खबर के मुताबिक, देश की राजधानी दिल्ली में एक बार फिर इंसानियत को शर्मसार कर देने वाली घटना सामने आई है। उत्तरी दिल्ली में एक युवक ने मां के साथ फुटपाथ पर सो रही करीब डेढ़ साल की एक बच्ची को अगवा कर उसके साथ बलात्कार की घटना को अंजाम दिया। बच्ची को इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया है जहां उसकी हालत गंभीर बनी हुई है। फिलहाल, पुलिस ने आरोपी युवक को गिरफ्तार कर लिया गया है।

मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, बताया जा रहा है कि चांदनी चौक के शीशगंज गुरुद्वारा के पास बच्ची माता-पिता के साथ शुक्रवार की रात फुटपाथ पर सो रही थी। यहीं से दरिंदों ने डेढ़ साल की मासूम का अपहरण कर उसके साथ बलात्कार किया। इसके बाद आरोपी ने पीड़ित बच्ची को पुरानी दिल्ली रेलवे स्टेशन के पार्सल गोदाम के पास तड़पता हुआ छोड़कर फरार हो गए।

पीड़ित बच्ची के निजी अंग से खून बह रहा था और चेहरे के साथ शरीर पर दांत काटने के जख्म थे। बाद में किसी राहगीर ने बच्ची को रेलवे ट्रैक पर देखा, तो उसने पुलिस को इस बात की सूचना दी। मौके पर पहुंची पुलिस ने बच्ची को अस्पताल में एडमिट कराया फिर आरोपी की तलाश में जुट गई।

पुलिस ने घटनास्थल के आस पास लगे सीसीटीवी कैमरों के फुटेज के आधार पर एक आरोपी को गिरफ्तार किया है। आरोपी की पहचान अनिल (25) के तौर पर हुई है। आरोपी कूड़ा बीनता है और नशे का आदी है। पुलिस के मुताबिक, पीड़ित बच्ची अपने परिजनों के साथ बवाना इलाके में रहती है। उसके पिता चांदनी चौक में रिक्शा चलाते हैं, जबकि उसकी मां कूड़ा बीनती है।

खबर के मुताबिक, रविवार की शाम करीब पांच बजे बच्ची को देखने के लिए दिल्ली महिला आयोग की अध्यक्ष स्वाति मालिवाल पहुंची। उन्होंने काफी वक्त हॉस्पिटल में बिताया। पीड़ित बच्ची से मिलने के बाद स्वाति ने ट्विटर पर लिखा, “1.5 साल की बच्ची के नन्हे हाथ जिसके साथ दिल्ली में बर्बरता से रेप हुआ। सुन्न पड़ गयी उसकी हालत देख। कैसी घटिया मानसिकता है। ऐसे जानवरों को तुरंत फांसी देनी चाहिए। पर केंद्र धृतराष्ट्र की तरह आंख बन्द कर बैठा है। समझ नही आता सरकार को जगाने के लिए अनशन तक किया, अब क्या करूँ?”

वहीं एक बयान में स्वाति ने कहा, “डेढ़ साल की बच्ची है जिसका रेप हुआ है, वह रो रही है उसके सिसकियां सुन लीजिएगा तो आपको नींद नहीं आएगी, मेरे रोंगटे खड़े हो गए मुझे रोना आ रहा है। कानून बनने के बाद भी आज तक क्यों नहीं बलात्कारियों को फांसी की सजा हो रही, आज तक निर्भया की मां को भी इंसाफ नहीं मिला”।

PM मोदी ने सीताराम केसरी को बताया ‘दलित’, कांग्रेस बोलीं- ‘झूठ बोलना मोदीजी की आदत हो गई है, दलित नहीं थे केसरी’

Congress attacks PM Modi on Sitaram Kesri remark

देश में लोकसभा चुनाव होने में बहुत कम समय बाकी रह गया है। इससे पहले साल के अंत में पाँच राज्यों में विधानसभा चुनाव हो रहे हैं। जिसके मद्देनजर राजनीतिक सरगर्मियां तेज हो गई है। साथ ही चुनाव नजदीक आते ही राजनीतिक दलों की तरफ से एक दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप का सिलसिला शुरू हो गया है।

इसी बीच, मध्यप्रदेश विधानसभा चुनाव के मद्देनजर एक जनसभा के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कांग्रेस पार्टी पर वंशवाद को बढ़ावा देने के बहाने सोनिया गांधी और राहुल गांधी पर जमकर निशाना साधा।

पीएम मोदी ने छत्तीसगढ़ के महासमुंद में चुनावी जनसभा को संबोधित करते हुए कहा कि सीताराम केसरी एक ‘दलित’ थे और कांग्रेस अध्यक्ष के तौर पर उन्हें पांच साल का कार्यकाल पूरा नहीं करने दिया गया, बल्कि सोनिया गांधी के लिए रास्ता बनाने की खातिर उन्हें हटा दिया गया। उन्होंने कहा ‘‘जो लोग दलित, पीड़ित, शोषित को दो साल भी झेल नहीं पाए, वह कैसे पांच साल के लिए इस परिवार से बाहर के लोगों को अध्यक्ष बना सकते हैं।’’

हालांकि इस दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने एक बार फिर से अपने भाषण के दौरान बड़ी गलती कर दी। जिसे लेकर पीएम मोदी खुद ही फस गए और विपक्ष  के निशाने पर आ गए।

sonia_gandhi_sitaram_kesari
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दरअसल, पीएम मोदी ने कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष सीताराम केसरी को ‘दलित’ बता दिया और कहा कि सोनिया गांधी को अध्यक्ष बनाने के लिए कांग्रेस ने उन्हें उठाकर बाहर फेंक दिया। जबकि जानकारों के मुताबिक सीतराम केसरी ‘दलित’ नहीं थे, बल्कि वे पिछड़े समाज वैश्य (बनिया) से थे। सीताराम केसरी बिहार के दानापुर के रहने वाले थे।

वहीं, कांग्रेस ने पार्टी के पूर्व अध्यक्ष सीताराम केसरी को दलित बताने तथा शोषित समुदाय से आने संबंधी बयान के लिए पीएम मोदी पर जमकर निशाना साधा है। मोदी के इसी दावे को कांग्रेस ने झूठ करार दिया है। पार्टी ने एक खबर को साझा करते हुए कहा कि सीताराम केसरी दलित नहीं थे बल्कि सीताराम केसरी बनिया थे और कांग्रेस के बड़े नेताओं में गिने जाते थे।

कांग्रेस प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला ने ट्वीट कर पीएम मोदी के बयान के बहाने लाल कृष्ण आडवाणी, मुरली मनोहर जोशी, केशुभाई पटेल की याद दिलाई। उन्होंने कहा, “रोज़ नई झूठ परोसना अब मोदीजी की आदत हो गई है। कृपया अपने गिरेबां में झांककर भी बताएं की आपने बीजेपी के इन क़द्दावर नेताओं से कैसा व्यवहार किया- लाल कृष्ण अडवाणी, मुरली मनोहर जोशी, कलराज मिश्र, केशुभाई पटेल, हीरेन पण्ड्या, सुरेश भाई मेहता, संजय जोशी।”

वहीं कांग्रेस प्रवक्ता मनीष तिवारी ने कहा, “केसरी दलित नहीं बल्कि बिहार के ओबीसी बनिया थे। हालांकि, मोदी ने कब तथ्यों अथवा सच्चाई को रास्ते में आने दिया है?” उन्होंने कहा कि केसरी को सभी ने सम्मान दिया। तिवारी ने बताया, “1996-1998 के बीच उनके कानूनी मामलों में शामिल होने के नाते मैं यह दावे के साथ कह सकता हूं।”

इतना ही नहीं, कांग्रेस की ओर से तारिक अनवर ने भी पीएम मोदी पर झूठ बोलने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा, प्रधानमंत्री एक बार फिर से गलत हैं क्योंकि (सीताराम) केसरी जी दलित नहीं थे, वह वैश्य समुदाय से थे।’

वरिष्ठ कांग्रेस नेता ने कहा, ‘केसरी जी ने खुद कांग्रेस अध्यक्ष के पद से इस्तीफा देने की पेशकश की थी अगर सोनिया गांधी अध्यक्ष बनती तों। उस समय मैं सीताराम केसरी का राजनीतिक सलाहकार था इसलिए मुझे यह जानकारी है।’

गौरतलब है कि, यह पहली बार नहीं है जब पीएम मोदी अपने झूठे बयान को लेकर विपक्ष के निशाने पर आए हो। इससे पहले भी कई बार पीएम मोदी अपने भाषण में झूठ बोल चुके हैं। जिसे लेकर  पीएम मोदी पर  प्रधानमंत्री पद के गरिमा की परवाह  किए बिना देश को गुमराह करने का आरोप तक विपक्ष लगा चुका है।

रेप की घटनाओं पर CM खट्टर ने दिया शर्मनाक बयान, स्वाति मालीवाल बोलीं- ‘देश की महिलाएं उनके मुंह पर कालिख पोते और चप्पलों से पिटाई करे’

Haryana CM Khattar shameful rape remark

Haryana CM Khattar shameful rape remark

‘बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ’ जैसे बड़े-बड़े नारे लगाकर सत्ता में आई भारतीय जनता पार्टी (BJP) के नेता खुद ही बेटियों का सम्मान नहीं करते हैं। तभी रेप, बलात्कार, और यौन उत्पीड़न जैसे अपराध में कई बार बीजेपी नेताओं के नाम सामने आते हैं। साथ ही महिलाओं के खिलाफ हो रहे अपराध पर भी भाजपा नेता शर्मनाक बयान देने से बाज नहीं आते।

गौरतलब है कि, अगर सत्ता में बैठे लोगों की सोच ही महिलाओं के प्रति इतनी शर्मनाक होंगी तो फिर कैसे उस देश में महिलाएं सुरक्षित हो सकती है। यही कारण है कि बीजेपी राज में देश महिलाओं के लिए सबसे असुरक्षित देश बन गया है।

हाल ही में इसका एक ताजा उदाहरण भी सामने आया है, जहां बीजेपी के नेतृत्व में हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर ने रेप की घटनाओं के लिए सीधे तौर पर लड़कियों को ही जिम्मेदार ठहराते हुए बेहद शर्मनाक बयान दिया है।

जी हाँ,  मनोहर लाल खट्टर ने कहा, “रेप की घटनाए बढ़ी नहीं है, पहले भी ऐसी घटनाए होती थी और आज भी होती हैं। सबसे बड़ी चिंता यह है कि रेप और छेड़छाड़ की घटनाएं 80 से 90 फीसदी जानकारों के बीच में होती हैं। एक दूसरे को जानते हैं. बहुत घटनाएं तो ऐसी होती है जिसमें काफी समय तक इकट्ठे घुमते रहते हैं और एक दिन थोड़ी गड़बड़ हो गई, तो उस दिन उठाकर के एफआईआर करवा देते हैं कि इसने मुझे रेप किया।”

रेप की घटनाओं पर मुख्यमंत्री खट्टर के इस शर्मनाक बयान का वीडियो सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हो रहा है। जिसके बाद वे विपक्ष के निशाने पर आ गए हैं। सोशल मीडिया पर खट्टर की तीखी आलोचना हो रही है।

खट्टर के इस शर्मनाक बयान पर कांग्रेस ने जमकर हमला बोला है। कांग्रेस प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला ने खट्ट के कथित बयान का वीडियो शेयर कर ‘महिला विरोधी’ बताते हुए कहा है कि खट्टर को इसके लिए माफी मांगनी चाहिए।

कांग्रेस के मुख्य प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला ने शनिवार को खट्टर के इस बयान को वीडियो ट्वीट कर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री खट्टर ने रेप के संदर्भ में ”महिला विरोधी” टिप्पणी की है इसके लिए उन्हें माफी मांगनी चाहिए।

सुरजेवाला ने ट्विटर पर खट्टर के बयान का वीडियो शेयर करते हुए लिखा है, “हरियाणा के CM खट्टर जी की निन्दनीय टिप्पणी- “रेप की अधिकतम घटनायें उनके साथ होतीं है जो लड़कों के साथ उठती-बैठतीं व घूमती-फिरतीं है” बढ़ते रेप व गैंगरेप की घटनाओं का दोष महिलाओं के चरित्र पर मढ़ना बेहद शर्मनाक! माफ़ी माँगे CM,”

Haryana CM Khattar shameful rape remark

जनता का रिपोर्टर की खबर के मुताबिक, दिल्‍ली महिला आयोग की अध्यक्ष स्वाति मालीवाल ने भी बलात्कार की घटनाओं पर हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर के विवादित बयान की आलोचना की और कहा कि देश की महिलाएं उनके मुंह पर कालिख पोते और सड़क पर घुमा कर चप्पलों से पिटाई करे। स्वाति मालीवाल के इस बयान का एक वीडियो भी सामने आया है, जो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है।

स्वाति मालीवाल ने अपने बयान में कहा, “मुझे लगता है सीएम खट्टर एक बहुत ही शर्मनाक आदमी है उन्हें कोई हक नहीं बनता की वो मुख्यमंत्री के पद पर बने रहें। जिस स्टेट में इतने ज्यादा बलात्कार होते हैं वहां के मुख्यमंत्री इतना भद्दा बयान देता है। ऐसे आदमी को पीएम मोदी जी को तुरंत मुख्यमंत्री पद से बर्खास्त कर देना चाहिए। मैं देश के महिलाओं से अपील करुंगी कि इस आदमी के मुंह पर कालिख मल कर उसको सड़क पर घुमाए और इसे चप्पलों से पिटाई करिए।”

इतना ही नहीं, दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने मनोहर लाल खट्टर के विवादित बयान की रविवार को आलोचना की और इस राज्य में महिलाओं की सुरक्षा के मुद्दे को उठाया। केजरीवाल ने हिन्दी में ट्वीट करते हुए लिखा, “खट्टर साहिब के इस बयान से हरियाणा की महिलाओं में ख़ासा रोष है। महिलाओं का कहना है की जो मुख्यमंत्री महिलाओं के ख़िलाफ़ इस तरह के बयान देते हैं, उनके राज्य में महिलायें कैसे सुरक्षित हो सकती हैं।”

आम आदमी पार्टी (AAP) के हरियाणा के प्रदेश अध्यक्ष नवीन जयहिंद ने ट्वीट करते हुए लिखा, “रेपिस्ट मानसिकता के मुख्यमंत्री है? खट्टर साहब शर्म नही आती। रेपिस्टों के सरगना की तरह बात कर रहे है।रेपिस्टों को सजा देने की बजाय रेपिस्टों को बढ़ावा दे रहे है, 5 साल की बच्ची के साथ रेप होता है वो किसके साथ घूमती है।रेप पीड़ित छेड़खानी पीड़ित लड़कियों महिलाओ से माफी मांगो सीएम”

दिग्गज भाजपा नेता ने ‘मोदी’ को हराने का दिया ‘मंत्र’, पार्टी में मचा हडकंप – पढ़ें

How Bjp can be defeated

बीजेपी छोड़ चुके पूर्व केंद्रीय मंत्री यशवंत सिन्हा ने विपक्षी दलों को सत्तारूढ़ बीजेपी को हराने का मंत्र दिया है। एनडीटीवी को लिखे आलेख में यशवंत सिन्हा ने कहा है कि अगर पूरा विपक्ष एकजुट होकर 2019 का लोकसभा चुनाव लड़े तो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को सत्ता से बेदखल किया जा सकता है। उन्होंने लिखा है कि अभी भी मोदी को हराने की रणनीति बनाने में विपक्षी नेता बहुत पीछे हैं और रोज समय गंवा रहे हैं। उन्होंने यह भी लिखा है कि विपक्षी दलों के अलग-अलग नेताओं द्वारा आने वाले बयान उनके अंदर उलझनें पैदा कर रहा है।

पूर्व मंत्री ने लिखा है कि विपक्षी दलों द्वारा मौजूदा समय में तीन तरह के विकल्प की बात की जा रही है। विपक्ष के कुछ नेताओं का कहना है कि चुनाव पूर्व कोई गठबंधन नहीं हो सकता है। जो भी गठबंधन होना है वो चुनाव बाद होगा।

दूसरे विकल्प के तौर पर सभी क्षेत्रीय दल गैर भाजपाई, गैर कांग्रेसी मोर्चा बनाकर चुनाव लड़ें और तीसरा विकल्प है कि कांग्रेस की अगुवाई में देशभर में एक महागठबंधन बने और साझा रूप से पीएम मोदी और एनडीए के खिलाफ लड़ाई लड़ी जाय।

महागठबंधन बेहतर विकल्प:

सिन्हा ने लिखा है कि कांग्रेस के साथ मिलकर एक महागठबंधन बनाकर मोदी के खिलाफ एकजुट होकर लड़ना सबसे बेहतर विकल्प हो सकता है। उन्होंने लिखा है कि इस गठबंधन के लिए यह जरूरी है कि वो बिना किसी नाम की चर्चा किए सिर्फ बीजेपी को सत्ता से बेदखल करने के बड़े इरादे से राजनीतिक लड़ाई लड़े। हालांकि, सिन्हा ने चेताया है कि ऐसी सूरत में मोदी-शाह की टीम अक्सर पूछेगी कि इधर तो मोदी है उधर कौन?

सिन्हा ने लिखा है कि विपक्षी दलों को बीजेपी के इस जाल में नहीं फंसना चाहिए क्योंकि इस चुनाव में मोदी मुद्दा नहीं हैं बल्कि वो सारे मुद्दे अब मुद्दा बन गए हैं जिनके बल पर 2014 में मोदी ने सत्ता पाई थी। यशवंत सिन्हा ने लिखा है कि विपक्षी मोर्चे के पास मोदी से निपटने के लिए निश्चित तौर पर एक प्रभावी और लोकलुभावन एजेंडा होना चाहिए क्योंकि वे वैकल्पिक नेता के सहारे नहीं बल्कि वैकल्पिक एजेंडे के सहारे ही उन्हें हरा सकते हैं।

चौथा विकल्प भी सुझाया:

यशवंत सिन्हा ने सभी क्षेत्रीय दलों का गठजोड़ बनाकर चुनाव लड़ने को भी तो बेहतर बताया है मगर व्यापक गठबंधन न बन पाने की स्थिति में चौथे विकल्प का रास्ता भी सुझाया है। उन्होंने लिखा है कि जिन-जिन राज्यों में जो सबसे बड़े गैर भाजपाई क्षेत्रीय दल हैं वो मिलकर वहां-वहां चुनाव लड़ें। उन्होंने पांच राज्यों में इसकी मजबूती का हवाला देते हुए कहा है कि यूपी में जहां सपा, बसपा और रालोद मिलकर लड़ सकती है, वहीं बिहार में राजद-कांग्रेस का गठबंधन पहले से ही है।

झारखंड में भी जेएमएम और कांग्रेस का गठबंधन पुराना है। महाराष्ट्र में कांग्रेस और एनसीपी जबकि कर्नाटक में कांग्रेस और जेडीएस गठबंधन को चुनाव में उतरने को कहा है। इन पांच राज्यों में लोकसभा की कुल 210 सीटें आती हैं जहां 2014 के चुनावों में बीजेपी ने कुल 145 सीटें जीती थीं।

सिन्हा का मानना है कि अगर इन पांचों राज्यों में अलग-अलग गठबंधन ने बीजेपी के खिलाफ चुनाव लड़ा तो टीम मोदी की खाट कड़ी हो सकती है क्योंकि हालिया उप चुनावों ने इसके सबूत दे दिए हैं। यूपी की कैराना, नूरपुर, गोरखपुर, फूलपुर सीटों के नतीजे इस पर मुहर लगाते हैं। उन्होंने लिखा है कि कांग्रेस-जेडीएस ने जब मिलकर कर्नाटक उप चुनाव लड़ा तो जयनगर सीट कांग्रेस के खाते में आ गई जो 2008 से बीजेपी के पास थी।

कांग्रेस की उम्मीदें बरकरार:

सिन्हा ने दूसरे कैटगरी में हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, हरियाणा, राजस्थान, मध्य प्रदेश, गुजरात और छत्तीसगढ़ को रखा है जहां कांग्रेस का सीधा मुकाबला बीजेपी से है। इन राज्यों में लोकसभा की कुल 110 सीटें आती हैं। इनमें से 104 पर बीजेपी ने साल 2014 में जीत दर्ज की थी। सिन्हा ने लिखा है कि हिमाचल, गुजरात, उत्तराखंड और राजस्थान में बीजेपी ने 100 फीसदी सीटें जीती थीं लेकिन पांच साल बाद यही दोहराया जाएगा अब यह मुश्किल लगता है। वहां कांग्रेस को अपने बूते जोर लगाना चाहिए क्योंकि उप चुनाव के नतीजे कांग्रेस को उम्मीद देते हैं।

बीजेपी सबसे बड़ी पार्टी बनी तोे:

सिन्हा ने लिखा है कि अगर कांग्रेस की अगुवाई में कोई महागठबंधन नही बन पाता है तब भी यूपी, बिहार जैसे राज्यों का गठबंधन बीजेपी के राह में बड़ा रोड़ा अटका सकता है। हालांकि, उन्होंने लिखा है कि महागठबंधन नहीं बनने की स्थित में यह खतरा हमेशा बरकरार रहेगा कि बीजेपी सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभर सकती है और तब राष्ट्रपति सबसे बड़े दल को ही सरकार बनाने के लिए आमंत्रित करेंगे।

अगर ऐसा होता है तब बीजेपी न केवल सरकार बनाने में कारगर होगी बल्कि की क्षेत्रीय दलों को साधने में भी कारगर हो जाएगी। लिहाजा, विपक्षी दलों को इस आशंका को मद्देनजर रखते हुए ही रणनीति बनानी चाहिए क्योंकि इस वक्त चुनाव पूर्व गठबंधन ही वक्त की सबसे बड़ी मांग है। भले ही उसका स्वरूप और आकार कैसा भी हो?

नज़रिया:शहरों के नामकरण से ग़रीबी,बेरोज़गारी और भुखमरी खत्म नही होगा!

city name change in india

2019 लोकसभा चुनाव नज़दीक आ चुका है, मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ में चुनावी माहौल अपने चरम पर है, देश की जनता

2014 में विकास के नाम पर भाजपा को अपना बहुमूल्य वोट देकर नरेंद्र मोदी को अपना प्रधानमंत्री बनाती है,जनता भाजपा को गरीबी,महँगाई, बेरोज़गारी, और विकास के मुद्दों पर वोट देती है लेकिन भाजपा इसके विपरीत राम धुन गाते हुए नोटबन्दी कर सैकड़ो कंपनियों को बंद करके लाखों लोगों को खुले आसमान के नीचे सड़क पर लाकर खड़ा कर देती है!

सुरक्षा व्यवस्था पूरी तरह से भंग हो जाती है,आए दिन लूट पाट औऱ हत्या होने लगती है, किसानों को अपने फसल का उचित दाम न मिलने पर वो खुदकुशी करने पर मजबूर हो जाते हैं,पेट्रोल डीज़ल के कीमतों का लगातार बढ़ना आम जनता को दुःख के समंदर में धकेल देता है,आए दिन बेटियों के रेप होते हैं,बनारस क्योटो नही बनता है,गंगा का मैला पानी साफ नही होता है,हर साल दो करोड़ रोज़गार नही दे पाते हैं तब जाति और धर्म के नाम पर लोगो की हत्या होती है,लोगों के घर मे घुस कर फ्रीज़ चेक किया जाता है, जानवरो का महत्व इंसानो के मुलाबले में बढ़ जाता है, पूर्ण बहुमत के बावजूद राम मंदिर का नाम नही लिया जाता, तब क्या करते?

City name change
City name change

फ़िर शमसान और कब्रिस्तान की बात होती है, ईद और दीवाली को बांटा जाता है,रोहित बेमुला फांसी पर झूल जाता है,इंस्टिट्यूशन पर तरह तरह के हमले होते है ,राष्ट्रवाद की नई परिभाषा गढ़ी जाती है,देश भक्ति और देश द्रोही का सर्टिफिकेट बांटा जाता है, जिन्नाह को कब्र से निकाल कर अपनी राजनीति पर दमदार धार लगाई जाती है,अखलाक को पत्थरो से कुंच दिया जाता है,गौरी लंकेश की हत्या होती है और उनकी मौत पर उनको कुतिया बोलने वाले व्यक्ति को फॉलो किआ जाता है,मैन स्ट्रीम मीडिया हुकूमत के आगे घुटने टेक देती है,पूरी तरह से जनहित मुद्दों पर फ्लॉप ये सरकार फिर जनता के कानों में भावनाओ मंत्र जपना शुरू कर देती है और कहती है कि भारत की संस्कृति को बचाना है इसके लिए शहरों का नामकरण होना शुरू होता है!

जिससे लोगो के भावनाओ से खेल कर अपनी राजनीतिक नय्या पार लगाई जा सके,जनता को शहरों के नाम पर लाकर दुसरे मुद्दे खत्म कर सत्ता का फिरसे सुख उठाया जा सके!
लेकिन सवाल तो वही होगा ना…….

क्या इलाहाबाद का नाम प्रयागराज करने से वहां के सारे घर मे रोशनी आ गई?
क्या फैज़ाबाद का नाम बदलने से देश से भूखमरी नेस्त नाबूद हो गई?
क्या हज़रत गंज चौक को अटल चौक करने देश में पुलिस व्यवस्था सही हो गया?क्या अहमदाबाद के

नामकरण से देश मे दंगे रुक गए?

क्या शहरों के नाम करण को ही राम राज्य कहते हैं?

समझना होगा जनता को…कि ये सब सिर्फ और सिर्फ इसलिए हो रहा है कयूनकी आप खामोश है!
जिस दिन जनता अपने असली मुद्दो को अपने वोट देने की वजह बना लेगी उसी दिन इस देश से गरीबी,बेरोज़गारी,भुखमरी,धर्म एवं प्रतीक की राजनीति समाप्त हो जाएगा, और जब धर्म, जाति एवं प्रतीक की राजनीति का खात्मा होगा तभी देश विकास के मार्ग पर अग्रसर होगा!

UPA के समय 400 रू सिलेंडर पर हल्ला मचाने वाली स्मृति ईरानी आज 900 रू सिलेंडर पर चुप क्यों है

Cylinder Price Hike Gas

मुरादाबादः अपनी ही सरकार पर आए दिन हमला बोलने वाले यूपी सरकार में कैबिनेट मंत्री ओमप्रकाश राजभर ने फिर से भाजपा पर हमला बोला है। उन्होंने कहा कि जब सिलेंडर 300 रुपये का था। तब बीजेपी के बड़े नेता सिलेंडर लेकर धरना देते थे, लेकिन आज 800 के सिलेंडर को लेकर कोई धरना देता नजर नहीं आ रहा है।

इतना ही नहीं मंत्री ने कहा कि जब पार्टियां सत्ता से बाहर रहती हैं तो उनको गरीबी, महंगाई, बेरोजगारी, अशिक्षा सब कुछ नजर आता है, लेकिन जब सत्ता में होती हैं तो वह सब कुछ भूल जाती हैं। राजभर ने कहा कि कांग्रेस सरकार के समय भाजपा नेता प्याज की माला और गैस सिलेंडर के साथ कचहरी पर धरना देते थे। आज जब सिलेंडर की कीमत 900 के पार पहुंच गई है। कोई भी धरना देता नजर नहीं आ रहा है।

गौरतलब है कि कांग्रेस के समय इतनी मंहगाई नहीं थी जितना आज मोदी सरकार में है, सवाल अब यह उठता है कि उस वक्त तीन सौ रू प्रति सिलेंडर था फिर भी भाजपा के तमाम नेता विरोध करते थे फिर आज नौ रू सिलेंडर मिलने पर खामोश क्यों है?

बीजेपी भगाओ, देश बचाओ रैली में कन्हैया कुमार का जबरदस्त भाषण: देखें विडियो

Kanhaiya Kumar BJP Bhagao

कई वर्षों के अंतराल के बाद सीपीआई ने पटना के गांधी मैदान में बृहस्पतिवार को ‘भाजपा भगाओ, देश बचाओ रैली’ का आयोजन किया। इस रैली में  केंद्र में सत्तारूढ़ एनडीए विरोधी अधिकांश दलों के नेता जहां मौजूद थे वहीं सीपीआई ने जेएनयू छात्र संघ के पूर्व अध्यक्ष कन्हैया कुमार को अपना चेहरा बनाकर पेश किया।

इस रैली में कांग्रेस के गुलाम नबी आजाद, शरद यादव, सीपीआई-एमएल के दीपांकर भट्टाचार्य, पूर्व मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी, NCP के डीपी त्रिपाठी और राजद के रामचंद्र पूर्वे सहित CPI के तमाम वरिष्ठ नेता मौजूद थे।

कन्हैया ने अपने भाषण में राज्य सरकार से अधिक केंद्र सरकार पर अपना ह~मला जारी रखा। कन्हैया ने कहा कि कि केंद्र की सरकार जुमले वादियों की सरकार है और इसके खिलाफ संगठित होकर ही मुकाबला किया जा सकता है।

उन्होंने BJP को याद दिलाया कि जिस श्रीकृष्ण सिंह की जयंती वह आज मना रहे हैं वे बिहार में कांग्रेस के कई दशकों तक कर्ताधर्ता थे। उन्होंने कहा कि लेकिन देखिए बीजेपी की कथनी और करनी में फर्क, एक तरफ कांग्रेस मुक्त भारत की बात करते हैं, वहीं कांग्रेस पार्टी के संस्थापक में से एक डॉक्टर श्रीकृष्ण सिंह की जयंती भी मनाते हैं।

कन्हैया ने बार-बार अपने भाषण में देश में बेरोज़गारी और किसानों की बदहाल स्थिति का जिक्र करते हुए कहा कि जहां एक और उद्योगपतियों का तीन लाख सोलह हजार करोड़ से अधिक का कर्ज़ माफ़ किया गया है वहीं किसानों का पांच रुपये, दस रुपये और सौ रुपये कर्ज़ माफ़ किया जाता है।

हालांकि इस रैली में बिहार में विपक्ष के नेता तेजस्वी यादव नज़र नहीं आए लेकिन सभी नेताओं ने माना कि बिहार में नीतीश कुमार के ख़िलाफ़ लड़ाई तेजस्वी यादव के नेतृत्व में ही लड़ी जाएगी।

Kanhaiya kumar speech
Kanhaiya kumar speech

कन्हैया ने भी अपने भाषण में तेजस्वी यादव के हाल के संविधान बचाओ-देश बचाओ यात्रा का ज़िक्र करते हुए कहा कि उनकी रेली मैं जैसी भीड़ उमड़ रही है वह साफ़ दिखाती है कि लोग केंद्र और राज्य सरकार से परेशान हैं।

2019 के चुनावी साल में मीडिया की लाश आपके घर आने वाली है, आपकी क्या तैयारी है

Ravish Kumar Media Fact

2019 के चुनाव में अब 9 महीने रह गए हैं। अभी से लेकर आख़िरी मतदान तक मीडिया के श्राद्ध का भोज चलेगा। पांच साल में आपकी आंखों के सामने इस मीडिया को लाश में बदल दिया गया। मीडिया की लाश पर सत्ता के गिद्ध मंडराने लगे हैं। बल्कि गिद्धों की संख्या इतनी अधिक हो चुकी है कि लाश दिखेगी भी नहीं। अब से रोज़ इस सड़ी हुई लाश के दुर्गन्ध आपके नथुनों में घुसेंगे। आपके दिमाग़ में पहले से मौजूद सड़न को खाद देंगे और फिर सनक के स्तर पर ले जाने का प्रयास करेंगे जहां एक नेता का स्लोगन आपका स्लोगन हो जाएगा। मरा हुआ मीडिया मरा हुआ नागरिक पैदा करता है। इस चुनावी साल में आप रोज़ इस मीडिया का श्राद्ध भोज करेंगे। श्राद्ध का महाजश्न टीवी पर मनेगा और अखबारों में छपेगा।

Ravish Kumar TV
Ravish Kumar TV

2019 का साल भारत के इतिहास में सबसे अधिक झूठ बोलने का साल होगा। इतने झूठ बोले जाएंगे कि आपके दिमाग़ की नसें दम तोड़ देंगी। न्यूज़ चैनल आपकी नागरिकता पर अंतिम प्रहार करेंगे। ये चैनल अब जनता के हथियार नहीं हैं। सरकार के हथियार हैं। चैनलों पर बहस के नक़ली मुद्दे सजाए जाएंगे। बात चेहरे की होगी, काम की नहीं। चेहरे पर ही चुनाव होना है तो बॉलीवुड से किसी को ले आते हैं। प्रवक्ता झूठ से तमाम बहसों को भर देंगे। किसी सवाल का सीधा जवाब नहीं होगा। भरमाने का महायुद्ध चलेगा। भरमाने का महाकुंभ होगा। चलो इस जनता को अब अगले पांच साल के लिए भरमाते हैं। जनता झूठ की आंधियों से घिर जाएगी। निकलने का रास्ता नहीं दिखेगा। मीडिया उसे गड्ढे में गिरने के लिए धक्का दे देगा। जनता गड्ढे में गिर जाएगी।

2019 का चुनाव जनता के अस्तित्व का चुनाव है। उसे अपने अस्तित्व के लिए लड़ना है। जिस तरह से मीडिया ने इन पांच सालों में जनता को बेदखल किया है, उसकी आवाज़ को कुचला है, उसे देखकर कोई भी समझ जाएगा कि 2019 का चुनाव मीडिया से जनता की बेदखली का आखिरी धक्का होगा। टीवी की बहस में हर उस आवाज़ की हत्या होगी जो जनता की तरफ से उठेगी। छोटे से कैंपस में नकली जनता आएगी। वो ताली बजाएगी। चेहरे और नेता के नाम पर। कुर्सी फेंक कर चली जाएगी। हंगामा ही ख़बर होगा और ख़बर का हंगामा।

Ravish Kumar Narendra Modi
Ravish Kumar Narendra Modi

मुद्दों की जगह प्रचार के चमत्कार होंगे। प्रचार के तंत्र के सामने लोकतंत्र का लोक मामूली नज़र आने लगेगा। धर्म के रूपक राजनीतिक नारों में चढ़ा दिए जाएंगे। आपके भीतर की धार्मिकता को खंगाला जाएगा। उबाला जाएगा। इस चुनाव में नेता आपको धर्म की रक्षा के लिए उकसाएंगे। हिन्दू मुस्लिम डिबेट चरम पर होगा। इस डिबेट का एक ही मकसद है। बड़ी संख्या में युवाओं को दंगाई बनाओ। दंगों के प्रति सहनशील बनाओ। उनके मां-बाप की मौन सहमति इन युवाओं को ऊर्जा देगी।

भारत एक नए दौर में जा रहा है। हत्याओं के प्रति सहनशील भारत। बलात्कार के प्रति सहनशील भारत। बस उसकी सहनशीलता तभी खौलेगी जब अपराधी का धर्म अलग होगा। बलात्कार और हत्या की शिकार का धर्म अलग होगा तो कोई बात नहीं। धर्म से नहीं बहकेंगे तो पाकिस्तान के नाम पर बहकाया जाएगा। भारत में सांप्रदायिकता पारिवारिक हो चुकी है। मां बाप और बच्चे खाने की मेज़ पर सांप्रदायिकता से सहमति जताते हैं। नफ़रत सामाजिक हो चुकी है। इसी की जीत का साल होगा 2019। इसी की हार का साल होगा 2019। मुकाबला शुरू हुआ है। अंजाम कौन जानता है।

मेरी समझ से 2019 का चुनाव जनता के नागरिक होने के बोध की हत्या का साल होगा। जनता खुद ही पुष्टि करेगी कि हां हमारी हत्या हो चुकी है और हम मर चुके हैं। अब हमें ज़ुबान की ज़रूरत नहीं है। अपनी आवाज़ की ज़रूरत नहीं है। प्रचंड प्रचार के संसाधनों के बीच आखिर जनता ज़िंदा होने का सबूत कैसे देगी। सबके बस की बात नहीं है झूठ की आंधी को समझना और उससे लड़ना। मुख्यधारा के प्राय सभी मीडिया संस्थानों का मैदान साफ है। सरकार के दावों को ज़मीन से जांचने वाले पत्रकार समाप्त हो चुके हैं। गोदी मीडिया के गुंडे एंकर आपको ललकारेंगे। आपके दुख पर पत्थर फेंकेंगे और आपके हाथ में माला देंगे कि पहना दो उस नेता के गले में जिसकी तरफदारी में हम चीख रहे हैं।

Ravish Kumar Ji
Ravish Kumar Ji

जनता इस चुनाव में मीडिया हार जाएगी। मीडिया की चालाकी समझिए। वो चुनावी साल में अपनी री-ब्रांडिंग कर रहा है। उसे पता है कि जनता को मालूम है कि मीडिया गोदी मीडिया हो गया था। उसके एंकरों की साख समाप्त हो चुकी है। इसलिए बहुत तेज़ी से मीडिया हाउस अपनी ब्रांडिंग नए सिरे से करेंगे। सच को लेकर नए नए नारे गढ़े जाएंगे। मीडिया जनता के लिए आंदोलनकारी की भूमिका में आएगा। आप झांसे में आएंगे। ज़मीन पर जाकर दावों की परीक्षा नहीं होगी क्योंकि इसमें जोखिम होगा। सरकार को अच्छा नहीं लगेगा।

भारत का मीडिया खासकर न्यूज़ चैनल भारत के लोकतंत्र की हत्या करने में लगे हैं। यकीन न हो तो यू ट्यूब पर जाकर आप इन पांच साल के दौरान हुए बहसों को निकाल कर देख लें। आपको पता चल जाएगा कि ये आपको क्या बनाना चाहते थे। आपको यह भी पता चलेगा कि जो बनाना चाहते थे, उसका कितना प्रतिशत बन पाए या नहीं बन पाए। आप कुछ नहीं तो प्रधानमंत्री मोदी के दो इंटरव्यू देख लीजिए। एक लंदन वाला और एक पकौड़ा वाला। आपको शर्म आएगी। अगर शर्म आएगी तो पता चलेगा कि आपके भीतर की नागरिकता अभी बची हुई है। अगर नहीं आएगी तो कोई बात नहीं। री-ब्रांडिंग के इस खेल में विश्वसनीयता खो चुके एंकरों से दूरी बनाने की रणनीति अपनाई जाएगी। चैनलों में काफी बदलाव होगा। एंकरों के स्लाट बदलेंगे। कार्यक्रम के नाम बदलेंगे। मुमकिन है कि इंटरव्यू के लिए नए एंकर तलाशे जाएं। हो सकता है मुझ तक भी प्रस्ताव आ जाए। यह सब खेल होगा। सत्ता इस्तमाल करने के लिए लोगों को खोज रही है। बहुत चालाकी से गोदी मीडिया आपको गोदी जनता में बदल देगा।

जनता क्या कर सकती है? मेरी राय में उसे पहली लड़ाई खुद को लेकर लड़नी चाहिए। उसे 2019 का चुनाव अपने लिए लड़ना होगा। वह हिन्दी के अख़बारों को ग़ौर से देखे। दूसरे अख़बारों को भी उसी निर्ममता के साथ देखे। किस पार्टी का विज्ञापन सबसे ज़्यादा है। किस पार्टी के नेताओं का बयान सबसे ज़्यादा है। अखबारों के पत्रकार नेताओं के दावों को अपनी तरफ से जांच कर रहे हैं या सिर्फ उन्हें जस का तस परोसने की चतुराई कर रहे हैं।

जब भी आप न्यूज़ चैनल देखें तो देखें कि प्रधानमंत्री की रैली कितनी बार दिखाई जाती है। कितनी देर तक दिखाई जाती है। उनके मंत्रियों की रैली कितनी बार दिखाई जाती है। कितनी देर तक दिखाई जाती है। फिर देखिए कि विपक्ष के नेताओं की रैली कितनी बार दिखाई जाती है। कितनी देर तक दिखाई जाती है। बात बार और देर की नहीं बात है कि मुद्दों को रखने की जिस पर नेता जवाब दें। न कि नेताओं के श्रीमुख से निकले बकवासों को मुद्दा बनाए। आपको पता चलेगा कि आने वाला भारत कैसा होने जा रहा है।

मरे हुए मीडिया के साथ आप इस चुनावी साल में प्रवेश कर रहे हैं। इसलिए इस मीडिया को परखिए। इम्तहान पत्रकार दे रहा है और प्रश्न पत्र की सेटिंग मालिक कर रहे हैं। इस खेल को समझने का साल है। इस चुनाव में न्यूज़ चैनल और अख़बार विपक्ष की हत्या करेंगे। विपक्ष भी अपनी हत्या होने देगा। वह अगर मीडिया से नहीं लड़ेगा तो आपके भीतर के विपक्ष को नहीं बचा पाएगा। आप देखिए कि विपक्ष का कौन नेता इस गोदी मीडिया के लिए लड़ रहा है। इस बार अगर आप नागरिकता के इस इम्तहान में हारेंगे तो अगले पांच साल ये मीडिया अपने कंधे पर आपकी लाश उठाकर नाचेगा।

अपवादों से कुछ मत देखिए। इस देश में हमेशा कुछ लोग रहेंगे। मगर देखिए कि जहां बहुत लोग हैं वहां क्या हो रहा है। आपकी हार मैं जानता हूं, क्या आप अपनी जीत जानते हैं? 2019 के जून में इस पर बात होगी। मीडिया को मारकर आपको क्या मिलेगा, इस पर एक बार सोच लीजिएगा।